बड़वारा/कटनी। बड़वारा क्षेत्र इन दिनों उद्योग के नाम पर ‘मौत का सामान’ बांटने वाली फैक्ट्रियों का गढ़ बनता जा रहा है। रबड़ और टायर रिसाइक्लिंग के नाम पर संचालित करीब दर्जनभर फैक्ट्रियां चौबीसों घंटे जहरीला धुआं उगल रही हैं, जिससे पूरा इलाका गैस चैंबर में तब्दील हो चुका है। ग्रामीण सालों से घुट-घुटकर जीने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार प्रशासनिक अमला कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो अब क्षेत्र की जनता आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गई है।
ज्ञापन बने रद्दी का टुकड़ा, बेखौफ दौड़ रहीं ‘ज़हर की भट्टियां’
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने शासन, जिला प्रशासन के चौखट पर दर्जनों बार ज्ञापन पटककर अपनी गुहार लगाई। लेकिन अफ़सोस, तंत्र की लाचारी और फैक्ट्री मालिकों के रसूख के आगे ग्रामीणों की फरियाद रद्दी का टुकड़ा बनकर रह गई। कार्रवाई के नाम पर केवल खोखले आश्वासन दिए गए, जिसका नतीजा यह है कि ये फैक्ट्रियां अब और भी बेधड़क होकर प्रदूषण मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं।
ये हैं वो 12 इकाइयां, जो क्षेत्र में घोल रही हैं ‘धीमा जहर’
स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़वारा और आसपास के इलाकों में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की बलि चढ़ाकर निम्नलिखित फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं:
- एम/एस अक्षर एनर्जी
- एम/एस श्री राम फ्यूल इंडस्ट्रीज
- एम/एस अहिंसा लुब्रिकेट्स
- एम/एस श्रीनाथ फ्यूल
- एम/एस गुनसागर प्रो. फ्यूल
- एम/एस श्री श्याम प्रो. फ्यूल
- एम/एस एस आर एम कार्बो फ्यूल्स
- एम/एस सदाशिव फ्यूल कंपनी
- एम/एस विहान फ्यूल
- एम/एस एस आर एम एस फ्यूल कंपनी
- एम/एस श्री खंडल माता जी एनर्जी एण्ड फ्यूल्स
- एम/एस गजलक्ष्मी इंडस्ट्रीज
दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा… 24 घंटे सांसों पर डाका
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह खेल केवल रात के अंधेरे तक सीमित नहीं है। दिन-रात, 24 घंटे इन फैक्ट्रियों की चिमनियों से काला, गाढ़ा और दमघोंटू धुआं लगातार निकल रहा है। रात में जब पूरा गांव सोता है, तब विषैले रसायनों की दुर्गंध इतनी बढ़ जाती है कि लोगों का दम घुटने लगता है। बुजुर्ग, मासूम बच्चे और पहले से बीमार लोग घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: घर-घर पहुंच रही कैंसर और दिल की बीमारियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो टायर और रबड़ के जलने से सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन और PM 2.5 जैसे जानलेवा तत्व हवा में घुल जाते हैं।
- कैंसर का तांडव: धुएं में मौजूद बेंजीन और डाइऑक्सिन सीधे फेफड़ों और ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) का कारण बनते हैं।
- सांसों की नाकेबंदी: हवा में घुला ज़हर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों को हमेशा के लिए बेकार (COPD) कर रहा है।
- कम उम्र में हार्ट अटैक: बारीक विषैले कण खून में मिलकर ब्लड प्रेशर और साइलेंट अटैक का खतरा बढ़ा रहे हैं।
- भविष्य पर खतरा: गर्भवती महिलाओं और मासूम बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर इसका स्थायी और घातक असर पड़ रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल, अब सीधी टक्कर की तैयारी!
बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी जब प्रशासन ने इन 12 फैक्ट्रियों पर शिकंजा नहीं कसा, तो ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला कलेक्टर तुरंत टीम भेजकर इन फैक्ट्रियों की निष्पक्ष जांच कराएं।
- बिना मानक और एनओसी (NOC) के चल रही सभी 12 इकाइयों को तत्काल सील किया जाए।
- क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (Air Quality Index) की सार्वजनिक रिपोर्ट पेश की जाए।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि शासन-प्रशासन ने तुरंत एक्शन नहीं लिया, तो बड़वारा की जनता सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सोए हुए प्रशासन की होगी।










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