आदिवासी अंचल बड़वारा की उखड़ी सांसें: भ्रष्टाचार की बलि चढ़ा बड़वारा-देवरी हटाई मार्ग, उफनती पुलिया पर गहरे गड्ढे दे रहे मौत को दावत; कुंभकर्णी नींद में सो रहा PWD प्रशासन
बड़वारा (कटनी)।एक तरफ प्रदेश सरकार राज्य में चमचमाती सड़कों और आधारभूत ढांचे के विकास के बड़े-बड़े दावे ठोक रही है, तो दूसरी तरफ आदिवासी बहुल बड़वारा विधानसभा क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी के चलते बड़वारा-देवरी हटाई मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और मरीजों के लिए यह मार्ग अब सफर नहीं, बल्कि किसी भयानक सजा से कम नहीं रह गया है।अधिकारियों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि वे किसी बड़ी अनहोनी या जानमाल के नुकसान का इंतजार कर रहे हैं।
बड़वारा के प्रवेश द्वार पर ही खौफनाक गड्ढे: विकास के दावों की खुली पोलक्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि जैसे ही कोई यात्री बड़वारा नगर की सीमा में प्रवेश करता है, मुख्य पुलिया पर बने बड़े-बड़े और जानलेवा गड्ढे उसका स्वागत करते हैं। यह वही पुलिया है जिससे प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियां गुजरती हैं। पुलिया पर जगह-जगह बने ये गड्ढे रोजाना दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।ध्वस्त होने की कगार पर भगनवारा पुलिया: ग्राम भगनवारा स्थित जर्जर पुलिया की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि वह कभी भी जमींदोज हो सकती है। यदि बारिश या भारी वाहनों का दबाव बढ़ा, तो कोई बड़ा हादसा घटित होना लगभग तय है।बम्हगवां मोड़ बना ‘ब्लैक स्पॉट’: बम्हगवां मोड़ की स्थिति यह है कि वहां से दो पहिया तो दूर, चार पहिया वाहन निकालना भी किसी खतरे से खाली नहीं है।
सड़क कम, गड्ढे ज्यादा: इन इलाकों में पैदल चलना भी दूभरबड़वारा से बछरवारा मार्ग पर डामर का नामोनिशान मिट चुका है। स्थिति यह है कि किन-किन टोला, चिरूहली, चांदन, भगनवारा और नन्हवारा मोड़ पर सड़क ढूंढने से भी नहीं मिलती।स्कूली बच्चों और मरीजों पर आफत: रोजाना इसी मार्ग से दर्जनों गांव के बच्चे बड़वारा स्थित स्कूलों और कॉलेजों के लिए निकलते हैं। वहीं आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या मरीजों के वाहनों को अस्पताल पहुंचने में घंटों लग जाते हैं, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।कष्टदायक सफर: चांदन और भगनवारा के आसपास के रास्ते इतने उबड़-खाबड़ और दलदली हो चुके हैं कि राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। एक साल में उखड़ी डामर: घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सड़कस्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार की सांठगांठ पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि:मात्र एक वर्ष पूर्व हुआ था डामरीकरण: इस मुख्य मार्ग पर महज 12 महीने पहले ही डामरीकरण की परत बिछाई गई थी।घटिया सामग्री का इस्तेमाल: गुणवत्ता की अनदेखी और भ्रष्टाचार के चलते पहली ही बारिश में सड़क का डामर बह गया और पूरी सड़क गिट्टी व मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गई।जनता भुगत रही खामियाजा: ठेकेदार अपनी जेबें भरकर निकल गए, जबकि उसका खामियाजा आज बड़वारा क्षेत्र के निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
जनता का फूटा गुस्सा: जल्द सुधार नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलनक्षेत्रीय जनता और ग्रामीण युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने अपनी कुंभकर्णी नींद त्यागकर बड़वारा-देवरी हटाई मार्ग का तत्काल नवनिर्माण या गुणवत्तापूर्ण पैचवर्क शुरू नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।प्रमुख मांगें:बड़वारा प्रवेश द्वार, भगनवारा पुलिया और बम्हगवां मोड़ का तुरंत आपातकालीन सुधार कराया जाए।घटिया सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार और उसे पास करने वाले PWD इंजीनियरों पर जांच बैठाकर वैधानिक कार्रवाई की जाए।स्कूली बच्चों और आम जनता की सुरक्षा को देखते हुए पूरे मार्ग के स्थायी नवनिर्माण की स्वीकृति दी जाए।

