मझगवां ओपन कैप में 51 करोड़ के धान पर फिर मंडराया संकट: तिरपाल के नीचे कीचड़ में सड़ रही फसल, प्रबंधन के दावों की खुली पोल
।** जिले के मझगवां स्थित ओपन कैप वेयरहाउस में एक बार फिर बड़े घोटाले और प्रशासनिक लापरवाही की बू आने लगी है। प्रबंधन द्वारा 51.40 करोड़ रुपये मूल्य के धान को पूरी तरह सुरक्षित बताने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ उजागर हुआ है कि खुले कैप में रखा लाखों क्विंटल धान नीले तिरपाल के नीचे जमा पानी, नमी और कीचड़ की वजह से सड़ रहा है।प्रबंधन की कागजी रिपोर्ट और धरातल के हालात में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है।—### **ग्राउंड रिपोर्ट: तिरपाल फटे, काला पड़ा धान, उठ रही बदबू**वेयरहाउस स्थल पर पहुंची टीम ने पाया कि सुरक्षा के नाम पर ढके गए तिरपाल कई जगहों से फटे हुए हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे बोरियों तक पहुंच रहा है।* **नमी से सड़ी बोरियां:** तिरपाल के नीचे जमा पानी और कीचड़ के कारण निचले हिस्से में रखी बोरियां सड़ चुकी हैं और उनसे तेज बदबू आ रही है।* **अमानक भंडारण:** हवा और बारिश के कारण तिरपाल उड़ जाने से धान खुले में भीग रहा है, जिससे अनाज काला पड़कर पूरी तरह से खराब हो चुका है।* **उठाव में देरी:** स्थानीय किसानों का कहना है कि महीनों से धान का उठाव नहीं हुआ है और न ही इसके सुरक्षित भंडारण के लिए ठोस इंतजाम किए गए हैं।—### **प्रबंधन की छलावा विज्ञप्ति, किसानों ने उठाए सवाल**हाल ही में वेयरहाउस प्रबंधन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में दावा किया गया था कि कैप में संग्रहित समस्त धान सुरक्षित है और कोई नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन मौके के हालात ने प्रबंधन की इस सफाई को पूरी तरह से झूठा साबित कर दिया है।क्षेत्रीय किसानों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में सब कुछ ठीक दिखाकर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रहे हैं। किसानों ने सवाल उठाया है कि सरकारी खजाने और जनता के खून-पसीने की कमाई से खरीदे गए इस अनाज की बर्बादी का जिम्मेदार आखिरकार कौन है?—### **मझगवां ओपन कैप: एक नजर में आंकड़े*** **संग्रहीत धान:** 2,79,350 क्विंटल* **अनुमानित मूल्य:** ₹51.40 करोड़* **स्थान:** मझगवां ओपन कैप, कटनी—### **2023 का पुराना रिकॉर्ड: 6 करोड़ की वसूली का मामला**यह पहला मौका नहीं है जब मझगवां ओपन कैप सुर्खियों में है। वर्ष 2023 में तत्कालीन जीएम ओ.पी. कुशवाहा द्वारा की गई जांच में **GoGreen** कंपनी पर अनियंत्रित भंडारण और गुणवत्ताहीन रखरखाव के कारण लगभग **6 करोड़ रुपये की वसूली** का मामला सामने आया था। इसके बावजूद सबक न लेते हुए पुनः वही पुरानी गलतियां दोहराई जा रही हैं।—### **अधिकारियों का पक्ष**मामले में प्रबंधन का कहना है कि धान पूरी तरह सुरक्षित है और बारिश के कारण आंशिक नुकसान हुआ है, जिसकी शीघ्र सफाई कराकर व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाएगी। हालांकि, मौके पर सड़ रहे धान के ढेर अधिकारियों के इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

