शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी के 9 साल पुराने रिश्ते का अंत, आपसी सहमति से हुआ तलाक
/ कटनी।** शहडोल संसदीय क्षेत्र से लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सांसद चुनी गईं हिमाद्री सिंह और उनके पति पूर्व भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी का दांपत्य जीवन आखिरकार औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति को स्वीकार करते हुए विवाह-विच्छेद (तलाक) की डिक्री जारी कर दी है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत 3 सितंबर 2026 को यह ऐतिहासिक कानूनी फैसला सुनाया गया। विवाह के करीब 9 वर्षों बाद दोनों ने एक-दूसरे से कानूनी तौर पर अलग होने का मार्ग चुना है।—### **सगाई से लेकर अलगाव तक: 2017 से 2021 तक का सफर*** **पारंपरिक विवाह:** हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को संपूर्ण हिंदू रीति-रिवाज के साथ राजेंद्रग्राम में संपन्न हुआ था। विवाह के बाद दोनों राजेंद्रग्राम में ही निवास कर रहे थे।* **बेटी का आगमन:** 20 जून 2019 को उनके घर एक पुत्री का जन्म हुआ, जिससे परिवार में खुशियां आईं।* **बढ़ते वैचारिक मतभेद:** शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच व्यक्तिगत एवं वैचारिक मतभेद उभरने लगे। छोटी-छोटी बातों से शुरू हुआ मनमुटाव धीरे-धीरे इतना गहरा गया कि 5 मई 2021 से दोनों ने पूरी तरह से अलग रहना शुरू कर दिया।* **आपसी सहमति से अर्जी:** कोर्ट में दायर याचिका में दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि उनके बीच का दांपत्य जीवन पूरी तरह समाप्त हो चुका है और पुनर्वास की कोई गुंजाइश नहीं बची है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि दोनों में से किसी भी पक्ष ने एक-दूसरे पर कोई आरोप-प्रत्यारोप नहीं लगाए।—### **6 महीने की मध्यस्थता अवधि रही निष्फल**कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए राजेंद्रग्राम न्यायालय ने अंतिम फैसला सुनाने से पहले दोनों पक्षों को आपसी मतभेद सुलझाने और रिश्ते को एक और मौका देने के लिए 6 महीने का पर्याप्त समय प्रदान किया था। इस दौरान अदालत के स्तर पर मध्यस्थता (Mediation) कराने के गंभीर प्रयास भी किए गए, लेकिन दोनों ही पक्ष अपने निर्णय पर पूरी तरह अटल रहे। 6 महीने की समयावधि पूर्ण होने पर अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों का साथ रहना संभव नहीं है, जिसके बाद आपसी सहमति से कानूनी तलाक की मंजूरी दी गई।—### **बेटी का पालन-पोषण और वित्तीय शर्तें**अदालत के समक्ष दोनों पक्षों ने भविष्य के दायित्वों और शर्तों को पूरी स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया:1. **पुत्री की कस्टडी:** पुत्री वर्तमान में अपनी मां हिमाद्री सिंह के संरक्षण में है। उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, परवरिश और भविष्य की संपूर्ण आर्थिक जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह ही उठाएंगी।2. **गुजारा भत्ते का परित्याग:** सांसद हिमाद्री सिंह ने स्वयं के लिए अथवा अपनी बेटी के पालन-पोषण के लिए पति से किसी भी प्रकार का अलमोनी (गुजारा भत्ता) या आर्थिक सहायता मांगने से साफ इनकार कर दिया।3. **स्त्रीधन और उपहार:** दोनों पक्षों ने कोर्ट को बताया कि शादी के समय मिले उपहारों, जेवरात और अन्य सामानों के बंटवारे को लेकर उनके बीच कोई विवाद या देनदारी शेष नहीं है।—### **सियासी परिवार, पुरानी प्रतिद्वंद्विता और राजनीतिक करियर**सांसद हिमाद्री सिंह (38 वर्ष) का परिवार विंध्य-महाकौशल क्षेत्र की राजनीति में गहरा प्रभाव रखता है।* **पारिवारिक पृष्ठभूमि:** उनके पिता स्वर्गीय दलबीर सिंह 1980, 1984 और 1991 में तीन बार लोकसभा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री रहे। उनकी मां स्वर्गीय राजेश नंदिनी सिंह 1993 में विधायक और 2009 में सांसद चुनी गई थीं।* **दिलचस्प राजनीतिक मोड़:** वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में हिमाद्री की मां राजेश नंदिनी सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र सिंह मरावी को 13,415 मतों से पराजित किया था। सालों बाद उसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नरेंद्र मरावी से हिमाद्री सिंह का विवाह हुआ, जो अब कानूनी अलगाव पर समाप्त हुआ।* **राजनीतिक सफर:** हिमाद्री सिंह ने 2016 में पहला चुनाव कांग्रेस से लड़ा था, जिसमें वे मामूली अंतर से हारीं। इसके बाद मार्च 2019 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं और 2019 तथा 2024 के लोकसभा चुनावों में शहडोल सीट से प्रचंड बहुमत के साथ सांसद निर्वाचित हुईं।तलाक के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेंद्र सिंह मरावी ने मीडिया को बताया कि यह निर्णय दोनों की पूर्व सहमति और विचार-विमर्श के आधार पर लिया गया था, जिसे अदालत ने कानूनी मान्यता प्रदान की है।

