₹1 और ₹2 के सिक्के न लेने पर फूटा गुस्सा: जय सूर्यवंशी ने टीम के साथ तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

बड़वारा। क्षेत्र में लंबे समय से ₹1 और ₹2 के वैध भारतीय सिक्कों का चलन बंद होने की आड़ में आम जनता के साथ हो रही धोखाधड़ी और दुर्व्यवहार के खिलाफ जन-आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता जय सूर्यवंशी ने अपनी टीम के साथ तहसील कार्यालय पहुँचकर तहसीलदार महोदय को ज्ञापन सौंपा और दुकानदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।आम जनता और गरीब वर्ग सबसे ज़्यादा परेशानज्ञापन सौंपते हुए जय सूर्यवंशी ने कहा कि बड़वारा क्षेत्र में स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों द्वारा ₹1 और ₹2 के सिक्के लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। सिक्कों के बंद होने की झूठी अफवाह के कारण रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ खरीदने आने वाले आम नागरिकों, विशेषकर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सिक्का न लेने के कारण दुकानों पर आए दिन ग्राहकों और व्यापारियों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है, जिससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बिगड़ने की संभावना बनी रहती है।प्रशासन से की गई मुख्य माँगें:कानूनी कार्रवाई: सिक्के स्वीकार न करने वाले दुकानदारों और व्यापारियों के खिलाफ बैंक नोट/सिक्का अधिनियम और नियमों के तहत त्वरित एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।सार्वजनिक मुनादी: क्षेत्र में फैली अफवाह को दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा तुरंत लाउडस्पीकर से मुनादी कराई जाए ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके।सख्त निर्देश: सभी छोटे-बड़े व्यापारियों को लिखित निर्देश जारी किए जाएं कि वे वैध भारतीय मुद्रा लेने से मना न करें।मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनीजय सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमानुसार वैध मुद्रा को लेने से मना करना एक दंडनीय अपराध है। यदि प्रशासन ने इस ज्ञापन को संज्ञान में लेते हुए जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनहित में इस लड़ाई को और तेज़ किया जाएगा तथा व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।इस अवसर पर जय सूर्यवंशी के साथ उनकी पूरी टीम और क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं युवा उपस्थित रहे।

छात्रों का आंदोलन बना राजनीतिक अखाड़ा: क्रेडिट लेने की होड़ से जनता में ‘मोहभंग’ की आशंका

नई दिल्ली:देश की राजधानी दिल्ली में NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब पूरी तरह से राजनीतिक मोड़ ले चुका है। लुटियंस दिल्ली और जंतर-मंतर का इलाका पिछले दो दिनों से एक राजनीतिक समरक्षेत्र में तब्दील हो गया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही इस छात्र आंदोलन में जिस तरह राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी है, उससे आम जनता और छात्रों के बीच आंदोलन को लेकर बन रहा नैतिक समर्थन अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। क्रेडिट लेने की होड़ से भटकता मूल मुद्दामंगलवार को दिनभर लुटियंस दिल्ली में विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े चेहरों की आवाजाही और प्रेस कॉन्फ्रेंसों का दौर जारी रहा। हर दल इस व्यापक छात्र आक्रोश का श्रेय अपने पाले में खींचने की होड़ में दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गैर-राजनीतिक आंदोलन में इस तरह से राजनीतिक चेहरे हावी होने लगते हैं, तो आम जनता के लिए मुख्य मांगों (जैसे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को मुआवजा) और नेताओं की अपनी सियासत के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन, जिस जमीनी समर्थन के बूते यह प्रदर्शन खड़ा हुआ था, उसमें जनता का मोहभंग होने का खतरा बढ़ गया है। पिछले 24 से 48 घंटों में क्या-क्या हुआ? (मुख्य घटनाक्रम)संसद मार्ग पर भारी भिड़ंत और लाठीचार्ज: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हजारों की संख्या में पहुंचे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े। भारी नुकसान और चोटें: दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस झड़प में करीब 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर दर्जनों छात्र चोटिल हुए, जिन्हें आरएमएल (RML) और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। करीब 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

संसद में हंगामा और वाकआउट: संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन इस लाठीचार्ज की गूंज राज्यसभा और लोकसभा में सुनाई दी। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सदन से वाकआउट किया और कई सांसद सीधे जंतर-मंतर पहुंचे। गृह मंत्रालय तक पहुँची वार्ता: CJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की और तीन मुख्य मांगें (सोनम वांगचुक की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा) रखीं। हालांकि, यह वार्ता बेनतीजा रही। सोशल मीडिया और बॉलीवुड का रुख: अभिनेता दिलजीत दोसांझ, सोनू सूद, वीर दास और निर्देशक अनुराग कश्यप जैसे कई प्रमुख कलाकारों ने छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। आम जनता के बीच क्या है संदेश?शुरुआत में यह आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक, युवाओं की निष्पक्ष आवाज और व्यवस्था के खिलाफ एक स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन पिछले दो दिनों में लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी दलों की सीधी भागीदारी के बाद, यह डर सताने लगा है कि कहीं यह आंदोलन भी अन्य राजनीतिक बहसों की भेंट न चढ़ जाए। छात्र नेताओं का कहना है कि वे अपने आंदोलन को राजनीतिक रूप से हाईजैक होने से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नेताओं का जमावड़ा उनकी मुख्य मांगों को धुंधला कर रहा है।

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस का लाठीचार्ज, कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली:

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर पुलिस कार्रवाई को लेकर बवाल मच गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर रुख कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने भारी लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

​कई छात्र घायल, RML अस्पताल में भर्ती

​पुलिस के इस कड़े एक्शन के बाद घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लाठीचार्ज में दर्जनों छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं। घायलों को तुरंत पास के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

  • गंभीर चोटें: कई छात्रों के सिर पर चोटें आई हैं और हाथ-पैर में फ्रैक्चर की खबरें हैं।
  • वेंटिलेटर पर छात्रा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाठीचार्ज के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई एक युवा छात्रा की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

​CJP ने लगाया अमानवीयता का आरोप

​कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि छात्र पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। सरकार और पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं।

​पुलिस का पक्ष

​दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग की ओर बढ़ने से रोका गया था। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

​घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है। विरोध प्रदर्शन में छात्रों के घायल होने की घटना के बाद अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी हंगामा, पुलिस बल प्रयोग के बाद तनाव बढ़ा”

नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों और दिल्ली पुलिस के जवानों के बीच अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है।घटनाक्रम: क्या हुआ जंतर-मंतर पर?प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न मांगों को लेकर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। दोपहर के समय प्रदर्शनकारी जब अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करने लगे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।देखते ही देखते बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और बुजुर्गों सहित कई निहत्थे आंदोलनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।प्रदर्शनकारियों के गंभीर आरोपआंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठा रहे थे।”हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी उकसावे के जबरन लाठियां भांजना शुरू कर दिया।

कई साथियों को सिर और हाथों में गंभीर चोटें आई हैं।” — एक प्रत्यक्षदर्शी/प्रदर्शनकारीघायलों को पास के ही राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।पुलिस का पक्षघटना पर पुलिस प्रशासन की ओर से भी बयान आया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार निर्धारित दायरे में रहने की हिदायत दी जा रही थी।बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश: पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्र की तरफ बढ़ने की कोशिश की।हल्का बल प्रयोग: स्थिति बिगड़ने और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को खतरा देखकर केवल “हल्का बल प्रयोग” किया गया।कानून-व्यवस्था का हवाला: जंतर-मंतर पर स्थिति को अब नियंत्रण में बताया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

बड़वारा में गूंजी बदलाव की आवाज: शिक्षा की शुचिता और सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय उपवास व धरना प्रदर्शन

बड़वारा की सड़कों पर निकली ‘पाप के घड़े’ की रैली: नायाब तहसीलदार के सामने जय सूर्यवंशी ने फोड़ा मटका, गूंजे नारे बड़वारा।शिक्षा की शुचिता, छात्र अधिकारों की रक्षा और प्रख्यात पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के समर्थन में बड़वारा में एक दिवसीय उपवास, धरना प्रदर्शन और विशाल रैली का आयोजन किया गया। आंदोलन के दौरान जागरूक युवाओं और ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा।सिर पर ‘पाप का घड़ा’ रखकर निकाली गई आक्रोश रैली आंदोलन की शुरुआत एक अनोखे और तीखे विरोध प्रदर्शन के साथ हुई। युवा नेता जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं और ग्रामीणों ने बड़वारा की सड़कों पर एक विशाल रैली निकाली। इस रैली का मुख्य आकर्षण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम का ‘पाप का घड़ा’ रहा।

कार्यकर्ता इस घड़े को सिर पर रखकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे। रैली में शामिल छात्र और ग्रामीण “शिक्षा व्यवस्था में सुधार करो” और “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” के गगनभेदी नारे लगा रहे थे।नायाब तहसीलदार के सामने फूटा गुस्सा रैली के समापन पर प्रदर्शनकारी तहसील कार्यालय पहुंचे, जहाँ देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ पर तीखा हमला बोला गया। जय सूर्यवंशी ने कहा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पाप का घड़ा अब पूरी तरह भर चुका है और युवा अब और शांत नहीं बैठेंगे।”अपनी बात को सिद्ध करते हुए जय सूर्यवंशी ने नायाब तहसीलदार के ठीक सामने विरोध स्वरूप उस ‘पाप के घड़े’ को पटक कर फोड़ दिया। यह दृश्य देखकर वहाँ मौजूद हर कोई दंग रह गया।

इसके बाद महामहिम राष्ट्रपति और माननीय प्रधानमंत्री के नाम नायाब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।”हम बड़वारा बचाने निकले हैं, बड़वारा जिंदा है”उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए जय सूर्यवंशी ने कहा, “हम शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी और क्रांतिकारी सुधार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आज हमने साबित कर दिया है कि बड़वारा जागरूक है।” कार्यक्रम में शामिल सैकड़ों ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने एक सुर में कहा कि “हम बड़वारा बचाने निकले हैं और बड़वारा जिंदा है, आज इस आंदोलन ने इसका सबूत दे दिया है।

“आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:NEET पेपर लीक की उच्च-स्तरीय जांच: नीट परीक्षा मामले की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय जांच हो।दोषियों पर सख्त कार्रवाई: दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।सुरक्षित प्रणाली: भविष्य की सभी परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और लीक-प्रूफ प्रणाली लागू हो।सैकड़ों ग्रामीणों और छात्रों की उपस्थिति इस एक दिवसीय उपवास, रैली और धरने में युवाओं का भारी हुजूम उमड़ा। आंदोलन में मुख्य रूप से जय सूर्यवंशी, अरविंद सिंह, नागेंद्र अहिरवार, राघवेंद्र, ओंकार, रोहित, पंकज, अंग्रेज, सतेन्द्र सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने उपवास रखकर सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति भी अपनी एकजुटता प्रकट की।

कटनी: सरस्वाही कन्या छात्रावास में फूड पॉइजनिंग से 20 से अधिक छात्राएं बीमार, परिजनों का फूटा गुस्सा

कटनी। जिले के सरस्वाही स्थित माता शबरी कन्या शिक्षा परिषद में दूषित भोजन और पानी के सेवन से 20 से अधिक छात्राओं के बीमार होने का मामला सामने आया है। शनिवार से शुरू हुआ यह सिलसिला रविवार तक जारी रहा, जिससे हॉस्टल में हड़कंप मच गया। एक छात्रा की हालत नाजुक होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर करने की तैयारी की जा रही है।सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्दबीमार छात्राओं ने सांस लेने में तकलीफ और सीने में गंभीर दर्द की शिकायत की है। मौके पर पहुंची डॉक्टरों की टीम ने प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, मामला संदिग्ध फूड पॉइजनिंग का लग रहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर हॉस्टल की रसोई और पानी के स्रोत के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। प्रबंधन की लापरवाही पर भड़के परिजनघटना से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण स्कूल परिसर के बाहर जमा हो गए हैं।

अरविंद सिंह टेकाम जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने हॉस्टल प्रबंधन और शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।परिजनों का कहना है कि छात्रावास में लंबे समय से साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदारों ने हमेशा अनदेखी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती और छात्राएं स्वस्थ नहीं हो जातीं, उनका धरना जारी रहेगा।प्रशासन ने लिया संज्ञान, पुलिस बल तैनातमामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अपर जिला पंचायत सीईओ समेत शिक्षा और खाद्य विभाग के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्राओं का समुचित इलाज उनकी पहली प्राथमिकता है। साथ ही, जांच रिपोर्ट आने के बाद छात्रावास प्रबंधन या जिम्मेदार वेंडर के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम को सोफा गया ज्ञापन

बड़वारा में पट्टा वितरण में बड़े घोटाले का आरोप: अपात्रों ने कूटरचित दस्तावेजों से हड़पी जमीन, ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

बड़वारा: बड़वारा ग्राम में शासन की आवासीय पट्टा वितरण योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपकर इस पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।अपात्रों ने रची साजिश, विधवा बताकर हड़पे पट्टेग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आवासीय कॉलोनी में कई ऐसे लोगों ने पट्टा प्राप्त कर लिया है जो पात्रता की श्रेणी में ही नहीं आते। ज्ञापन में खुलासा किया गया कि कई मामलों में पति के जीवित रहते हुए महिलाओं ने खुद को ‘विधवा/बेवा’ बताकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर पट्टा हासिल किया है। निवासियों ने इन दस्तावेजों की तत्काल गहन जाँच की मांग की है।भू-माफियाओं का कब्जा, नियम ताक परज्ञापन के अनुसार, यह योजना मूलतः भूमिहीनों और गरीबों के कल्याण के लिए थी, लेकिन रसूखदार लोगों ने अपनी पहुंच का फायदा उठाकर जमीनें हथिया ली हैं। ऐसे व्यक्ति जिनके पास पहले से ही पक्के मकान और पर्याप्त भूमि है, उन्हें भी पट्टे आवंटित किए गए हैं।

साथ ही, खसरा संख्या 39, 25, 197, 46, 429, 127, 485, 436/1, 425, 63, 486/1, 453, 466/1, 458/1, 132, 426/1, 446, 427/1, 432 सहित अन्य पर अवैध निर्माण और बेनामी सौदों का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि पट्टा धारक कोई और है और निर्माणकर्ता कोई और, जो सरकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है।प्रशासन पर भेदभाव का आरोप स्थानीय ग्रामीणों ने हल्का पटवारी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन गरीब और असहाय लोगों के कच्चे घरों को तोड़ने के लिए तो तत्परता से नोटिस जारी कर रहा है, लेकिन रसूखदार लोगों के भव्य और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने से बच रहा है।ये हैं प्रमुख मांगें:उल्लेखित खसरा नंबरों की तत्काल भौतिक और अभिलेखीय जाँच हो।फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों पर धारा 420, 467, 468 के तहत एफआईआर दर्ज हो।अपात्रों के पट्टे निरस्त कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे भेदभावपूर्ण रवैये को तुरंत बंद किया जाए।जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जाँच और कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

बड़वारा में फूटा जनता का आक्रोश: दारू भट्टी और नो-एंट्री नियमों को लेकर ‘मिशन 💯 शोषितों की आवाज’ का चक्काजाम!

बड़वारा मुख्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब ‘मिशन 💯 शोषितों की आवाज’ संगठन के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन कर दिया। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही शराब की बिक्री और भारी वाहनों के कारण होने वाले हादसों से नाराज प्रदर्शनकारियों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। आंदोलन के चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।🗣️ जय सूर्यवंशी ने प्रशासन को घेरा: “शराबियों की टिप्पणियों से छात्राएं परेशान”आंदोलन के दौरान अपनी बात रखते हुए जय सूर्यवंशी ने प्रशासन को सीधे आड़े हाथों लिया। उन्होंने बड़वारा बस्ती से दारू भट्टी को तुरंत हटाने की मांग करते हुए कहा:”बड़वारा बस्ती के भीतर संचालित हो रही इस दारू भट्टी के कारण क्षेत्र में आए दिन विवाद और आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि शराब पीकर हुड़दंग करने वाले लोग स्कूल और कॉलेज जाने वाली हमारी छात्र-छात्राओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं।

हमारी बेटियों का सुरक्षित निकलना मुश्किल हो गया है। इस भट्टी को यहाँ से हटाना ही होगा।”ओवरलोडिंग ट्रैकों का आतंक: नो-एंट्री नियम सिर्फ कागजों पर?चक्काजाम के दौरान भारी वाहनों की वजह से होने वाली मौतों और हादसों पर भी गहरा आक्रोश जताया गया। आंदोलनकारियों ने मांग की कि:नो-एंट्री नियमों को धरातल पर कड़ाई से लागू किया जाए: बड़वारा क्षेत्र में नो-एंट्री के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।ओवरलोडिंग पर लगे लगाम: क्षेत्र से गुजरने वाले ओवरलोडिंग ट्रक काल बनकर दौड़ रहे हैं, जिनसे रोज कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। इन पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।आंदोलन में यह रहे उपस्थित (ग्रामीणों की भारी मौजूदगी)इस जन-आंदोलन और चक्काजाम में ‘मिशन 💯 शोषितों की आवाज’ संगठन के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

मुख्य रूप से:जय सूर्यवंशी, नागेन्द्र अहिरवार, अनुज, धनेंद्र, हिमांशु, पीतम, खिलावन, वीरू, छोटे लाल, करन, पंकज, रमन, शुभम, मनोज, कमलेश और देवकरण सहित सैकड़ों ग्रामीणों की दमदार मौजूदगी रही।👮 मौके पर पहुंचा प्रशासनिक अमलाचक्काजाम की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और जाम खुलवाने का काफी प्रयास किया। जय सूर्यवंशी और आंदोलनकारियों के तीखे तेवरों को देखते हुए प्रशासन को झुकना पड़ा। अधिकारियों द्वारा लिखित आश्वासन और उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद ही चक्काजाम को समाप्त किया गया।संगठन की दो टूक चेतावनी’मिशन 💯 शोषितों की आवाज’ संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दिए गए समय के भीतर बस्ती से शराब भट्टी को शिफ्ट नहीं किया गया और ओवरलोडिंग ट्रैकों पर नो-एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन शुरू नहीं कराया गया, तो अगली बार चक्काजाम इससे भी ज्यादा उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री उल्लंघन के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा, तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन

बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री उल्लंघन के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा, तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन२४ घंटे में कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन और चक्काजाम की दी चेतावनीबड़वारा (कटनी)।बड़वारा बस्ती के अंदर नो-एंट्री के नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियों और तेज रफ्तार ओवरलोड वाहनों के आतंक से परेशान स्थानीय ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। क्षेत्र में लगातार मंडरा रहे हादसे के मूक साए को देखते हुए आज बड़वारा के जागरूक नागरिकों और युवाओं ने लामबंद होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर तहसीलदार (बड़वारा), थाना प्रभारी (बड़वारा) और यातायात प्रभारी (कटनी) के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा।मौत की रफ्तार: नियमों को ठेंगा दिखा रहे भारी वाहनसौपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित किए जाने के बावजूद, भारी डंपर, ट्रक और ट्राले बेधड़क बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। इन वाहनों की रफ्तार इतनी तेज और अमानवीय होती है कि सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा हलक में अटकी रहती है। कागजों पर चल रही नो-एंट्री, जमीनी हकीकत शून्य” – जय सूर्यवंशीज्ञापन सौंपने के दौरान अगुवाई कर रहे जय सूर्यवंशी ने स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग पर सीधे व गंभीर आरोप लगाए। जय सूर्यवंशी ने कहा, “प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित करना महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि भारी डंपर, ट्रक और विशालकाय ट्राले बेधड़क और पूरी रफ्तार के साथ बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं नियमों को ताक पर रखकर इन वाहन मालिकों को शह दी जा रही है।”जय सूर्यवंशी ने पूर्व के हादसों का हवाला देते हुए आगे आरोप लगाया कि, “बड़वारा में पहले भी कई हृदयविदारक और बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। क्या प्रशासन किसी और बड़ी लाश गिरने का इंतजार कर रहा है? आबादी वाले क्षेत्र में इन भारी वाहनों की रफ्तार इतनी अमानवीय होती है कि सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा खतरे में रहती है।”

ग्रामीणों का कहना है कि बड़वारा में पहले भी कई हृदयविदारक और बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:१. बड़वारा बस्ती के प्रवेश और निकास द्वारों पर तुरंत ‘नो-एंट्री’ के बड़े साइन बोर्ड लगाए जाएं।२. नो-एंट्री के समय को कड़ाई से लागू करवाने के लिए मुख्य चौराहों पर स्थायी पुलिस बल (फिक्स पिकेट) तैनात किया जाए।३. आबादी वाले क्षेत्र में तेज गति से दौड़ने वाले और क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर सख्त कानूनी व चालानी कार्रवाई की जाए। २४ घंटे का अल्टीमेटम: “नहीं तो होगा चक्काजाम”ज्ञापन सौंपते हुए युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि १ दिवस (२४ घंटे) के भीतर इस जानलेवा ट्रैफिक पर रोक नहीं लगाई गई और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं दिखी, तो बड़वारा की जनता अपनी आत्मरक्षा के लिए उग्र आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।👥 ये रहे उपस्थित:इस दौरान मुख्य रूप से जय सूर्यवंशी, नागेन्द्र अहिरवार, रामखिलवान, अनुज, धनेंद्र सहित भारी संख्या में स्थानीय युवा और बड़वारा बस्ती के पीड़ित नागरिक उपस्थित रहे और एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

कटनी: महानदी में नहाने गए 19 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत

कटनी: महानदी में नहाने गए 19 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत, गोताखोरों ने निकाला शव
कटनी (झिंझरी)।
कटनी जिले के झिंझरी क्षेत्र से दोस्तों के साथ घूमने निकले एक 19 वर्षीय युवक की महानदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना बड़वारा थाना क्षेत्र के चपाना ग्राम स्थित महानदी की है। पुलिस और गोताखोरों की मदद से युवक के शव को नदी से बाहर निकाला गया, जिसके बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
दोस्तों के साथ गया था घूमने, नहाते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, झिंझरी निवासी संतोष चौधरी का 19 वर्षीय पुत्र ऋषि चौधरी अपने दोस्तों के साथ चपाना ग्राम के पास महानदी में घूमने गया था। गर्मी के मौसम में नदी किनारे पहुंचे युवक खुद को रोक नहीं पाए और नदी में नहाने उतर गए। इसी दौरान ऋषि ने नदी में छलांग लगाई, लेकिन वह दोबारा पानी के ऊपर नहीं आया।
सर में पत्थर लगने से हुआ हादसा, दोस्तों में मची खलबली
प्रत्यक्षदर्शियों और दोस्तों के मुताबिक, नदी में कूदते समय ऋषि का सर पानी के अंदर किसी भारी पत्थर से टकरा गया, जिससे वह अचेत होकर गहराई में चला गया। जब काफी देर तक ऋषि पानी के ऊपर नहीं आया, तो उसके दोस्तों ने चारों तरफ उसकी तलाश की। ऋषि का कहीं पता न चलने पर दोस्त घबरा गए और उन्होंने तत्काल इसकी सूचना ऋषि के परिजनों को दी।
गोताखोरों ने निकाला शव, बड़वारा अस्पताल रेफर
घटना की सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। गोताखोरों ने नदी में छलांग लगाकर कड़ी मशक्कत के बाद ऋषि को ढूंढ निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
अस्पताल में घोषित किया मृत: पुलिस और परिजनों द्वारा युवक को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़वारा लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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