छात्रों का आंदोलन बना राजनीतिक अखाड़ा: क्रेडिट लेने की होड़ से जनता में ‘मोहभंग’ की आशंका

नई दिल्ली:देश की राजधानी दिल्ली में NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन अब पूरी तरह से राजनीतिक मोड़ ले चुका है। लुटियंस दिल्ली और जंतर-मंतर का इलाका पिछले दो दिनों से एक राजनीतिक समरक्षेत्र में तब्दील हो गया है। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही इस छात्र आंदोलन में जिस तरह राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी है, उससे आम जनता और छात्रों के बीच आंदोलन को लेकर बन रहा नैतिक समर्थन अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। क्रेडिट लेने की होड़ से भटकता मूल मुद्दामंगलवार को दिनभर लुटियंस दिल्ली में विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े चेहरों की आवाजाही और प्रेस कॉन्फ्रेंसों का दौर जारी रहा। हर दल इस व्यापक छात्र आक्रोश का श्रेय अपने पाले में खींचने की होड़ में दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गैर-राजनीतिक आंदोलन में इस तरह से राजनीतिक चेहरे हावी होने लगते हैं, तो आम जनता के लिए मुख्य मांगों (जैसे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को मुआवजा) और नेताओं की अपनी सियासत के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन, जिस जमीनी समर्थन के बूते यह प्रदर्शन खड़ा हुआ था, उसमें जनता का मोहभंग होने का खतरा बढ़ गया है। पिछले 24 से 48 घंटों में क्या-क्या हुआ? (मुख्य घटनाक्रम)संसद मार्ग पर भारी भिड़ंत और लाठीचार्ज: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हजारों की संख्या में पहुंचे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और आंसू गैस के गोले छोड़े। भारी नुकसान और चोटें: दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस झड़प में करीब 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर दर्जनों छात्र चोटिल हुए, जिन्हें आरएमएल (RML) और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। करीब 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

संसद में हंगामा और वाकआउट: संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन इस लाठीचार्ज की गूंज राज्यसभा और लोकसभा में सुनाई दी। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सदन से वाकआउट किया और कई सांसद सीधे जंतर-मंतर पहुंचे। गृह मंत्रालय तक पहुँची वार्ता: CJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की और तीन मुख्य मांगें (सोनम वांगचुक की रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और मृतकों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा) रखीं। हालांकि, यह वार्ता बेनतीजा रही। सोशल मीडिया और बॉलीवुड का रुख: अभिनेता दिलजीत दोसांझ, सोनू सूद, वीर दास और निर्देशक अनुराग कश्यप जैसे कई प्रमुख कलाकारों ने छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। आम जनता के बीच क्या है संदेश?शुरुआत में यह आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक, युवाओं की निष्पक्ष आवाज और व्यवस्था के खिलाफ एक स्वतःस्फूर्त जनाक्रोश के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन पिछले दो दिनों में लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी दलों की सीधी भागीदारी के बाद, यह डर सताने लगा है कि कहीं यह आंदोलन भी अन्य राजनीतिक बहसों की भेंट न चढ़ जाए। छात्र नेताओं का कहना है कि वे अपने आंदोलन को राजनीतिक रूप से हाईजैक होने से बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नेताओं का जमावड़ा उनकी मुख्य मांगों को धुंधला कर रहा है।

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस का लाठीचार्ज, कई छात्र घायल, अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली:

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर पुलिस कार्रवाई को लेकर बवाल मच गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर रुख कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने भारी लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

​कई छात्र घायल, RML अस्पताल में भर्ती

​पुलिस के इस कड़े एक्शन के बाद घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लाठीचार्ज में दर्जनों छात्र और प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं। घायलों को तुरंत पास के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

  • गंभीर चोटें: कई छात्रों के सिर पर चोटें आई हैं और हाथ-पैर में फ्रैक्चर की खबरें हैं।
  • वेंटिलेटर पर छात्रा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाठीचार्ज के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई एक युवा छात्रा की हालत नाजुक बनी हुई है और उसे ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।

​CJP ने लगाया अमानवीयता का आरोप

​कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि छात्र पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। सरकार और पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं।

​पुलिस का पक्ष

​दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग की ओर बढ़ने से रोका गया था। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

​घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है। विरोध प्रदर्शन में छात्रों के घायल होने की घटना के बाद अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी हंगामा, पुलिस बल प्रयोग के बाद तनाव बढ़ा”

नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों और दिल्ली पुलिस के जवानों के बीच अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज में कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है।घटनाक्रम: क्या हुआ जंतर-मंतर पर?प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न मांगों को लेकर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। दोपहर के समय प्रदर्शनकारी जब अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश करने लगे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।देखते ही देखते बहस धक्का-मुक्की में बदल गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और बुजुर्गों सहित कई निहत्थे आंदोलनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।प्रदर्शनकारियों के गंभीर आरोपआंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठा रहे थे।”हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी उकसावे के जबरन लाठियां भांजना शुरू कर दिया।

कई साथियों को सिर और हाथों में गंभीर चोटें आई हैं।” — एक प्रत्यक्षदर्शी/प्रदर्शनकारीघायलों को पास के ही राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।पुलिस का पक्षघटना पर पुलिस प्रशासन की ओर से भी बयान आया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार निर्धारित दायरे में रहने की हिदायत दी जा रही थी।बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश: पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्र की तरफ बढ़ने की कोशिश की।हल्का बल प्रयोग: स्थिति बिगड़ने और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को खतरा देखकर केवल “हल्का बल प्रयोग” किया गया।कानून-व्यवस्था का हवाला: जंतर-मंतर पर स्थिति को अब नियंत्रण में बताया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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