बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री उल्लंघन के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा, तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन२४ घंटे में कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन और चक्काजाम की दी चेतावनीबड़वारा (कटनी)।बड़वारा बस्ती के अंदर नो-एंट्री के नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियों और तेज रफ्तार ओवरलोड वाहनों के आतंक से परेशान स्थानीय ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। क्षेत्र में लगातार मंडरा रहे हादसे के मूक साए को देखते हुए आज बड़वारा के जागरूक नागरिकों और युवाओं ने लामबंद होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या को लेकर तहसीलदार (बड़वारा), थाना प्रभारी (बड़वारा) और यातायात प्रभारी (कटनी) के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा।मौत की रफ्तार: नियमों को ठेंगा दिखा रहे भारी वाहनसौपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित किए जाने के बावजूद, भारी डंपर, ट्रक और ट्राले बेधड़क बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। इन वाहनों की रफ्तार इतनी तेज और अमानवीय होती है कि सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा हलक में अटकी रहती है। कागजों पर चल रही नो-एंट्री, जमीनी हकीकत शून्य” – जय सूर्यवंशीज्ञापन सौंपने के दौरान अगुवाई कर रहे जय सूर्यवंशी ने स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग पर सीधे व गंभीर आरोप लगाए। जय सूर्यवंशी ने कहा, “प्रशासन द्वारा नो-एंट्री का समय निर्धारित करना महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि भारी डंपर, ट्रक और विशालकाय ट्राले बेधड़क और पूरी रफ्तार के साथ बस्ती के बीच से गुजर रहे हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं नियमों को ताक पर रखकर इन वाहन मालिकों को शह दी जा रही है।”जय सूर्यवंशी ने पूर्व के हादसों का हवाला देते हुए आगे आरोप लगाया कि, “बड़वारा में पहले भी कई हृदयविदारक और बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। क्या प्रशासन किसी और बड़ी लाश गिरने का इंतजार कर रहा है? आबादी वाले क्षेत्र में इन भारी वाहनों की रफ्तार इतनी अमानवीय होती है कि सड़कों पर चलने वाले स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की जान हमेशा खतरे में रहती है।”


