बड़वारा के गुड़ाकला और विजयराघवगढ़ के पुरैनी रेत स्टॉक में पकड़ा गया भारी अंतर
कागजों और मौके की रेत में बड़ा अंतर मिलने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
कलेक्टर और खनिज विभाग से उठे तीखे सवाल: ‘आपराधिक जांच और एफआईआर में देरी क्यों?’
कटनी।
कटनी जिले के खनिज महकमे और प्रशासनिक गलियारों में अरबों रुपये के कथित रेत घोटाले की गूंज से हड़कंप मचा हुआ है। मामला ‘Vista Sales Private Limited’ के दो प्रमुख रेत स्टॉकों में पाई गई भारी गड़बड़ी और उससे जुड़े करोड़ों रुपये के शासकीय राजस्व के नुकसान का है। कागजों में दर्ज स्टॉक और मौके पर भौतिक सत्यापन के दौरान पाई गई रेत के बीच करीब 2.62 लाख घनमीटर का विशाल अंतर सामने आने के बाद हड़कंप की स्थिति है। हालांकि, मामले में लगभग ₹49.24 करोड़ की भारी-भरकम शास्ति (पेनल्टी) प्रस्तावित की गई है, लेकिन इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद भी आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज न होने पर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कागजों में रिकॉर्ड, मौके पर सन्नाटा: 2.62 लाख घनमीटर रेत का हेरफेर
प्रशासनिक जांच और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान Vista Sales Private Limited के दो अलग-अलग रेत स्टॉकों में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- बड़वारा (गुड़ाकला स्टॉक): भौतिक सत्यापन के दौरान यहाँ स्वीकृत और दर्ज स्टॉक के मुकाबले 1,16,254.68 घनमीटर रेत कम पाई गई।
- विजयराघवगढ़ (पुरैनी स्टॉक): जांच टीम को यहाँ रिकॉर्ड की तुलना में 1,46,362 घनमीटर रेत मौके से गायब मिली।
दोनों स्थानों को मिलाकर कुल 2,62,616.68 घनमीटर रेत का अंतर दर्ज किया गया है। नियमों और शासकीय दरों के आधार पर इस अनधिकृत उठाव व हेरफेर पर दोनों मामलों को मिलाकर लगभग ₹49.24 करोड़ रुपये की पेनल्टी (शास्ति) आकलित की गई है।
कटनी प्रशासन और खनिज विभाग के समक्ष खड़े 4 प्रमुख सवाल
इतने बड़े पैमाने पर खनिज संपदा के गायब होने और भारी राजस्व क्षति के बाद जिला प्रशासन की कार्यशैली को लेकर 4 मुख्य सवाल उठ रहे हैं:
- रेत की निकासी कहाँ हुई? आखिर इतनी विशाल मात्रा (2.62 लाख घनमीटर) में रेत का उठाव कहाँ और किन माध्यमों से किया गया?
- परिवहन और रायल्टी का ब्योरा क्या है? बिना वैध रायल्टी और अनुमति के इतनी बड़ी मात्रा में रेत का परिवहन करने वाले वाहन और जिम्मेदार कौन हैं?
- क्या विभागीय सांठगांठ थी? क्या इतने बड़े स्तर पर खनिज का उठाव बिना किसी स्थानीय प्रशासनिक व विभागीय ढिलाई या संरक्षण के संभव था?
- आपराधिक कार्रवाई में देरी क्यों? जब प्रशासन स्वयं स्वीकार कर रहा है कि ₹49 करोड़ से अधिक की शास्ति का मामला बनता है, तो इसे केवल विभागीय या वित्तीय पेनल्टी तक ही सीमित क्यों रखा जा रहा है? संबंधित फर्म व जिम्मेदार व्यक्तियों पर तत्काल आपराधिक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की जा रही?
“केवल जुर्माना काफी नहीं, जवाबदेही तय हो”
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि कटनी की प्राकृतिक और खनिज संपदा का संरक्षण बेहद आवश्यक है। केवल जुर्माना या पेनल्टी का नोटिस जारी करके इतने बड़े मामले की इतिश्री नहीं की जा सकती।
स्थानीय स्तर पर उठ रही प्रमुख मांगें:
- निष्पक्ष आपराधिक जांच: पूरे मामले की किसी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाए।
- FIR और कानूनी कार्रवाई: सरकारी राजस्व की चोरी, अवैध खनन/परिवहन और दस्तावेजों में हेरफेर की धाराओं के तहत संबंधित कंपनी (Vista Sales) के संचालकों और संलिप्तों पर अविलंब FIR दर्ज की जाए।
- सरकारी नुकसान की वसूली: कटनी के प्राकृतिक संसाधनों की क्षति की भरपाई के लिए अवैध गतिविधियों में शामिल जिम्मेदार लोगों और फर्म से नियमानुसार वसूली की जाए।
प्रशासनिक निर्णय पर टिकीं सभी की नजरें
कटनी जिले में इतने बड़े पैमाने पर रेत का स्टॉक से गायब होना एक बेहद गंभीर विषय है। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन से भी जुड़ा है।
अब देखना यह होगा कि कटनी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस मामले में केवल पेनल्टी की कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहते हैं या फिर मामले की गहराई से आपराधिक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मिसाल कायम करते हैं।











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