रीठी/कटनी।
कटनी जिले के राजस्व निरीक्षण मंडल रीठी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत करहिया नं. 1 में बहुमूल्य शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला गरमाता जा रहा है। गांव की कीमती सरकारी जमीन पर हो रहे पक्के निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी असंतोष है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटनी और तहसीलदार रीठी को लिखित आवेदन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जारी निर्माण कार्य को तुरंत रुकवाने की मांग की है।
मामला क्या है?
तहसीलदार रीठी को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, पूरा विवाद ग्राम पंचायत करहिया नं. 1 के हल्का नंबर 16 में स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 424, कुल रकबा 1.00 हेक्टेयर (लगभग 2.47 एकड़) से जुड़ा हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम मझगवां (तहसील रीठी) निवासी राजेन्द्र (पिता राममिलन लोधी) द्वारा इस सरकारी जमीन के अंशभाग पर कथित रूप से पक्के मकान का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा सड़क किनारे नरेश कुमार लोधी (पिता राममिलन लोधी) द्वारा भी निर्माण कार्य किए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।
पट्टे एवं भू-अधिकार पत्रों की वैधता पर खड़े हुए सवाल
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा आवासीय भू-अधिकार योजना के तहत जारी दस्तावेजों का सहारा लिया जा रहा है। आवेदनकर्ताओं ने मांग की है कि:
- अभिलेखों का परीक्षण: संबंधित व्यक्तियों के नाम दर्ज पट्टे, भू-अधिकार पत्र और राजस्व रिकॉर्ड की नियमानुसार जांच की जाए।
- आवंटन का आधार स्पष्ट हो: यह देखा जाए कि शासकीय भूमि का आवंटन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और क्या वहां पक्के निर्माण की वैधानिक अनुमति दी गई है।
- अनियमितता मिलने पर निरस्तीकरण: यदि जांच में भू-अधिकार पत्र या पट्टा नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
भविष्य के सार्वजनिक विकास पर संकट
ग्रामीणों का कहना है कि खसरा नंबर 424 की यह 1 हेक्टेयर भूमि ग्राम पंचायत के केंद्र में स्थित है, जिसका उपयोग भविष्य में शासकीय स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन या अन्य सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए किया जाना प्रस्तावित हो सकता है। यदि आज इस भूमि पर अतिक्रमण नहीं रोका गया, तो भविष्य में शासकीय भवनों के निर्माण के लिए गांव में भूमि की भारी किल्लत पैदा हो जाएगी।
राजस्व जांच टीम गठित कर सीमांकन की मांग
प्रशासन से की गई मांगों के मुख्य बिंदु:
- स्पॉट वेरिफिकेशन: मौके पर राजस्व अधिकारियों की निष्पक्ष जांच टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।
- सीमांकन (Demarcation): भूमि का आधिकारिक सीमांकन कराया जाए ताकि शासकीय और निजी भूमि की सीमाएं स्पष्ट हो सकें।
- अतिक्रमण बेदखली: यदि निर्माण कार्य अवैध या नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो निर्माण को रुकवाकर तत्काल बेदखली की कार्रवाई की जाए।
उच्च अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का खटखटाया दरवाजा
24 सितंबर 2026 की दिनांक वाले इस आवेदन पत्र के साथ ग्रामीणों ने आवासीय भू-अधिकार योजना की नियमावली व संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी संलग्न की हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतिलिपि जिला कलेक्टर कटनी तथा खजुराहो संसदीय क्षेत्र के सांसद को भी अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।
वर्तमान में पूरा मामला प्रशासनिक अधिकारियों के पाले में है। ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय संपत्ति की रक्षा करना प्रशासन का दायित्व है, इसलिए इस विषय पर शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई होना अत्यंत आवश्यक है।











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