झिंझरी पीएम आवास योजना: 1,500 बेघरों का हक छीन निजी हाथों में सौंपा प्रोजेक्ट, अपनी नाकामी छुपाने नगर निगम ने रचा खेल

कटनी। शहर के सबसे गरीब, बेघर और वंचित तबके को पक्की छत देने का दावा करने वाली नगर निगम कटनी का एक बड़ा और दागदार कारनामा सामने आया है। 1,500 से अधिक गरीब और आम परिवारों का हक छीनकर प्रोजेक्ट को मुनाफा कमाने के लिए निजी कंपनी (प्राइवेट डेवलपर) के सुपुर्द कर दिया गया है।

इस पूरे सौदेबाजी के खेल में बिल्डर और नेता मालामाल हो रहे हैं, जबकि जिस गरीब की आस इस मकान से जुड़ी थी, वह पहले भी सड़क पर था और आज भी पन्नी-त्रिपाल की झोपड़ियों व किराए के मकानों में दर-दर भटकने को मजबूर है।

3 साल का ग्रेस पीरियड… फिर भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की चढ़ गया चढ़ावा

वर्ष 2017-18 में स्वीकृत लगभग ₹85 से ₹90 करोड़ की लागत वाले इस झिंझरी प्रोजेक्ट (1,512 फ्लैट्स) को 2021-22 तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाना था। कोरोना महामारी और शुरुआती अड़चनों का बहाना बनाकर ठेकेदार व अधिकारियों को पूरे 3 साल का अतिरिक्त समय (ग्रेस पीरियड) दिया गया।

मुख्य प्रशासनिक सवाल:

  • 3 साल का लंबा अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ?
  • अधिकारियों की सरपरस्ती के कारण क्या ठेकेदार पर मॉनिटरिंग का कोई दबाव नहीं बनाया गया?
  • क्या बजट का बंदरबांट होता रहा और काम जानबूझकर कछुआ गति से चलाया गया?

नगर निगम की मौन सहमति और नाकामी छुपाने का खेल

नगर निगम की कमान संभाल रहीं महापौर प्रीति संजीव सूरी और परिषद के पार्षद इस पूरे घपले पर आंखें मूंदे बैठे रहे। समय पर ठोस समीक्षा करने के बजाय जिम्मेदार मूकदर्शक बने रहे।

जब ग्रेस पीरियड खत्म हुआ और प्रोजेक्ट का ढांचा जस का तस अधूरा खड़ा रहा, तो अपनी प्रशासनिक नाकामी और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए नगर निगम ने वर्ष 2025 में शासन की आड़ लेकर इस प्रोजेक्ट को प्राइवेट डेवलपर को सौंपने का रास्ता चुना।

अफोर्डेबल हाउसिंग बना ‘कमर्शियल रियल एस्टेट’

जिस जमीन पर गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए EWS और LIG फ्लैट्स बनने थे, वह अब पूरी तरह से कमर्शियल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में बदल चुका है।

  • बिल्डर और नगर निगम की सांठगांठ: हस्तांतरण के बाद अब वहां महंगे फ्लैट्स बनाकर मुनाफा कमाने का खेल जारी है।
  • टैक्सपेयर्स का पैसा दांव पर: योजना की मूल भावना को मारकर निजी कंपनियों और राजनीतिक आकाओं की जेबें भरी जा रही हैं, जबकि आम जनता के टैक्स का पैसा और गरीबों का अधिकार दांव पर लग गया है।
  • हितग्राहियों पर कुठाराघात: वर्षों पहले पंजीयन कराकर बैंक लोन की किश्तें भरने का सपना देख रहे हितग्राहियों के साथ यह सीधा छलावा है।

जनता और सामाजिक संगठनों की स्पष्ट मांग

झिंझरी पीएम आवास मामले को लेकर स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है और निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. EOW / SIT से उच्चस्तरीय जांच: इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) या उच्चस्तरीय SIT से कराई जाए तथा तत्कालीन नगर निगम आयुक्तों, महापौर प्रीति सूरी, संबंधित पार्षदों और ठेकेदार पर आपराधिक मामला दर्ज हो।
  2. निजीकरण का फैसला तुरंत रद्द हो: वर्ष 2025 में किए गए निजी हस्तांतरण के फैसले को तत्काल निरस्त कर झिंझरी की जमीन को पुनः गरीब व वंचित हितग्राहियों के लिए आरक्षित किया जाए।
  3. चरणबद्ध पजेशन की गारंटी: वास्तविक पात्र हितग्राहियों को तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूर्ण कराकर चरणबद्ध तरीके से पजेशन सौंपा जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!