बड़वारा में टायर फैक्ट्रियों का जानलेवा ज़हर: विधायक के पत्र और समाज सेवी जय सूर्यवंशी की चेतावनियों के बाद भी अफ़सर बेखबर, 12 फैक्ट्रियों के धुएं से ग्रामीणों में कैंसर व टीबी का खौफ, जल्द शुरू होगा उग्र आंदोलन

बड़वारा में टायर फैक्ट्रियों का जानलेवा ज़हर: विधायक के पत्र और समाज सेवी जय सूर्यवंशी की चेतावनियों के बाद भी अफ़सर बेखबर, 12 फैक्ट्रियों के धुएं से ग्रामीणों में कैंसर व टीबी का खौफ, जल्द शुरू होगा उग्र आंदोलन

(विशेष रिपोर्ट — News 7 India)

बड़वारा (कटनी)। कटनी जिले के बड़वारा तहसील क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से चलाई जा रही 12 टायर रिसाइकलिंग और ऑयल एक्सट्रैक्शन इकाइयों ने पूरे इलाके को गंभीर वायु प्रदूषण के संकट में धकेल दिया है। इन फैक्ट्रियों की चिमनियों से दिन-रात निकलने वाला ज़हरीला काला धुआँ और कार्बन डस्ट आसपास के दर्जनों गाँवों के वातावरण को विषैला बना रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जाँच और कार्रवाई की गुहार लगाई थी। वहीं दूसरी ओर, क्षेत्रीय समाज सेवी जय सूर्यवंशी ने भी इस मुद्दे पर कई बार तहसीलदार बड़वारा को ज्ञापन सौंपकर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मूकदर्शक बना हुआ है। लगातार अनदेखी से आक्रोशित समाज सेवी जय सूर्यवंशी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध इकाइयों को बंद नहीं किया गया, तो वे क्षेत्र की जनता को साथ लेकर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।

जनस्वास्थ्य पर गहराया संकट: घर-घर फेफड़ों और सांस के मरीज

पुराने टायरों को पिघलाकर तेल निकालने की प्रक्रिया से सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, डाइऑक्सिन, और हैवी मेटल्स (जैसे लेड और जिंक) वातावरण में घुल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इससे स्थानीय ग्रामीणों को निम्नलिखित गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है:

  1. कैंसर का गंभीर खतरा: टायर के धुएं में पाए जाने वाले पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAH) और डाइऑक्सिन जैसे तत्व फेफड़ों और त्वचा के कैंसर का मुख्य कारक बनते हैं।
  2. अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और टीबी: हवा में तैरते सूक्ष्म कण (PM 2.5) सांस के जरिए फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर टीबी, अस्थमा और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण पैदा कर रहे हैं।
  3. हृदय रोग (Cardiovascular Risks): जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस खून में ऑक्सीजन के प्रवाह को बाधित कर दिल के दौरे और उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ा रही है।
  4. त्वचा व आंखों में जलन: जहरीली राख और धुएं के लगातार संपर्क में आने से ग्रामीणों को आंखों में जलन, एलर्जी और त्वचा रोग की शिकायतें आ रही हैं।
  5. कृषि और पर्यावरण को नुकसान: फैक्ट्रियों से निकलने वाली काली राख खेतों पर जम जाने के कारण उपजाऊ जमीन की उर्वरता नष्ट हो रही है और फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

बाहरी उद्योगपतियों का दबदबा और प्रशासनिक सांठगांठ

विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह के पत्र और ज्ञापन के अनुसार, बड़वारा क्षेत्र में दूसरे राज्यों से आए उद्योगपति अवैध रूप से इन इकाइयों का संचालन कर रहे हैं। अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग न किए जाने के कारण फैक्ट्री संचालकों के हौसले बुलंद हैं और वे पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

क्षेत्र में प्रदूषण फैला रही इन 12 कंपनियों की सूची:

  1. एम/एस अक्षर एनर्जी
  2. एम/एस श्री राम फ्यूल इंडस्ट्रीज
  3. एम/एस अहिंसा लुब्रिकेंट्स
  4. एम/एस श्रीनाथ फ्यूल
  5. एम/एस गुनसागर प्रो. फ्यूल
  6. एम/एस श्री श्याम प्रो. फ्यूल
  7. एम/एस एस आर एम कार्बो फ्यूल्स
  8. एम/एस एस आर एम एस फ्यूल कंपनी
  9. एम/एस सदाशिव फ्यूल कंपनी
  10. एम/एस विहान फ्यूल
  11. एम/एस श्री खंडेल माता जी एनर्जी एण्ड फ्यूल
  12. एम/एस गजलक्ष्मी इंडस्ट्रीज

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