कटनी (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्या हाल है, इसकी एक बानगी कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र से सामने आई है। यहाँ शासकीय हाई स्कूल पड़रभटा में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण छात्र-छात्राओं को पहले तो बड़ी धूमधाम से निःशुल्क साइकिलें बांटी गईं, लेकिन महज़ एक महीने बाद ही स्कूल प्रबंधन ने यह कहते हुए सभी साइकिलें वापस छीन लीं कि “आप लोग इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।”
सरकार की तरफ से मिली खुशी अचानक छीन लिए जाने के बाद मासूम विद्यार्थियों के चेहरों पर निराशा है और उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है।
जुलाई में छाई थी खुशी, अगस्त में छलका दर्द
पूरा मामला ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम महमगवां और पड़रभटा का है। महमगवां गांव के दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन करीब 2 किलोमीटर का कच्चा-पक्का सफर तय करके शासकीय हाई स्कूल पड़रभटा पढ़ाई करने जाते हैं।
- उम्मीद की नई किरण: जुलाई 2026 में जब मध्य प्रदेश शासन की ‘निःशुल्क साइकिल प्रदाय योजना’ के तहत इन विद्यार्थियों को चमचमाती साइकिलें सौंपी गईं, तो गांव और घर में खुशी का माहौल था। दूर-दराज से पैदल आने वाले मासूमों को लगा कि अब उनकी पढ़ाई की राह आसान हो जाएगी।
- अचानक छीन ली गईं खुशियां: छात्रों के मुताबिक, महज़ एक महीने इस्तेमाल करने के बाद अगस्त महीने में स्कूल के प्राचार्य (प्रिंसिपल) ने फरमान जारी कर दिया। विद्यार्थियों को बुलाकर कहा गया कि वे नियम और पात्रता की शर्तों में फिट नहीं बैठते हैं, इसलिए साइकिलें तुरंत स्कूल जमा कराएं।
मासूमों के तीखे सवाल: “अगर हम अपात्र थे, तो पहले बांटी ही क्यों गई?”
स्कूल प्रबंधन के इस तुगलकी फरमान से विद्यार्थियों और उनके परिजनों में भारी रोष है। पीड़ित छात्र-छात्राओं ने दुखी होकर सवाल उठाया है कि:
- जब जुलाई में वितरण हो रहा था, तब सत्यापन (Verification) और पात्रता की जांच क्यों नहीं की गई?
- क्या अधिकारियों को पहले अपनी ही योजनाओं के नियम और पात्रता सूची का ज्ञान नहीं था?
- पहले बच्चों के मन में उम्मीद और खुशी जगाना और फिर अचानक साइकिल खींच लेना, क्या मासूमों के साथ क्रूर मज़ाक नहीं है?
शिक्षा विभाग में हड़कंप, जिला शिक्षा अधिकारी बोले- ‘जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी’
मामला मीडिया में तूल पकड़ने और परिजनों के विरोध के बाद शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं।
पूरे मामले पर कटनी के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सच्चिदानंद पांडे ने बयान जारी करते हुए कहा है कि “मामला संज्ञान में आया है और इसकी पूरी निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। वितरण और वापस लेने की प्रक्रिया में कहां लापरवाही हुई है, जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
छात्रों की मांग: जांच कराकर वापस दिलाई जाएं साइकिलें
प्रभावित छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन व कटनी कलेक्टर से गुहार लगाई है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि वितरण में स्कूल प्रबंधन या बाबू की गलती थी, तो उसकी सजा मासूम बच्चों को न दी जाए और पात्र विद्यार्थियों को तुरंत उनकी साइकिलें वापस लौटाई जाएं, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।












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