कटनी (मध्य प्रदेश):मझगवां ओपन कैप वेयरहाउस में खुले आसमान तले भंडारित शासकीय धान के सड़ने और अंकुरित होने का मामला अब जिला प्रशासन के शीर्ष द्वार तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर धान की बर्बादी का वीडियो उजागर होने के बाद किसान प्रतिनिधियों ने जिलाधीश (कलेक्टर) को ज्ञापन सौंपकर “अब तो संज्ञान लीजिए हुज़ूर!” की गुहार लगाई है और मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर तुरंत कठोर कार्रवाई की मांग की है।ओपन कैप में करोड़ों की धान हो रही स्वाहा, प्रशासनिक अमला मौनकलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत ज्ञापन में किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मझगवां ओपन कैप में अन्नदाताओं के खून-पसीने और शासकीय संपत्ति के रख-रखाव में घोर लापरवाही बरती जा रही है। खुले में रखी करोड़ों रुपये की धान बारिश के पानी और नमी की वजह से अंकुरित होकर पूरी तरह सड़ चुकी है। ज्ञापन में यह भी मुद्दा उठाया गया कि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा इस विवादित ओपन कैप पर भंडारण हेतु पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद पुनः धान का भंडारण कर शासकीय धन को गर्त में धकेला गया।अतीत के घोटालों और 17 करोड़ की धान चोरी की भी गूंजज्ञापन में कटनी जिले के चर्चित अनाज घोटालों का जिक्र करते हुए ध्यान दिलाया गया कि मझगवां ओपन कैप पूर्व में भी विवादों के केंद्र में रहा है। यहां से पूर्व में करीब 17 करोड़ रुपये की धान गायब (चोरी) होने का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा पूरे जिले में लगभग 65 करोड़ रुपये की धान से संबंधित गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।६-सूत्रीय प्रमुख मांगें (प्रशासन के समक्ष रखी शर्तें): * मझगवां ओपन कैप में सड़ रही धान की तत्काल उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। * वायरल वीडियो के आधार पर मौके पर जाकर धान की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। * इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो। * पूर्व की 17 करोड़ की धान चोरी एवं 65 करोड़ के कथित घोटालों की फाइलें पुन: खोलकर पारदर्शी जांच की जाए। * गोदाम में मौजूद कुल धान की मात्रा, गुणवत्ता और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। * बची हुई धान को सड़ने से बचाने के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।”कुंभकर्णी नींद से जागे प्रशासन, वरना सड़कों पर उतरेगा किसान”किसान प्रतिनिधियों ने बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि अगले 2 से 4 दिनों के भीतर जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता है, तो किसान अपनी मेहनत की बर्बादी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र व चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।”
अन्न की बर्बादी पर कब टूटेगी खामोशी? मझगवां धान घोटाले पर कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की गुहार












Leave a Reply