पर्यावरण व स्वास्थ्य संकट: झुकेही से कैमोर तक प्रदूषण का कहर, भारी मात्रा में एस्बेस्टस कचरे और धूल से जनजीवन प्रभावित

यहाँ दी गई खबर का एक स्पष्ट, प्रभावशाली और बेहतर समाचार प्रारूप (बिना किसी नाम और समाचार पत्र के नाम के) प्रस्तुत है:पर्यावरण व स्वास्थ्य संकट: झुकेही से कैमोर तक प्रदूषण का कहर, भारी मात्रा में एस्बेस्टस कचरे और धूल से जनजीवन प्रभावितकटनी | 28 सितंबर 2026कटनी जिले के झुकेही से कैमोर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और एस्बेस्टस कचरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभिन्न रिपोर्टों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में वर्षों पुराना एस्बेस्टस कचरा पड़ा हुआ है, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।मुख्य बातें और रिपोर्ट के बड़े खुलासे: * 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरे का दावा: हालिया सर्वेक्षण रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस युक्त मिट्टी मौजूद होने की बात सामने आई है। यह भारत की पहली एस्बेस्टस फैक्ट्रियों में से एक का कचरा बताया जा रहा है। * स्वास्थ्य पर असर: कचरे और लगातार उड़ती धूल के कारण सैकड़ों ग्रामीणों के बीमार होने का दावा किया जा रहा है। क्षेत्र का सर्वेक्षण करने पहुंची टीमों द्वारा विशेष मास्क पहनकर जांच करने की बात भी सामने आई है। * क्रेशर और चूना भट्टियों का प्रदूषण: ग्रामीणों का आरोप है कि झुकेही से कैमोर तक सड़क के दोनों ओर 400 से अधिक चूना भट्टियां, क्रेशर और पत्थर खदानें संचालित हैं। इनके द्वारा पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने से पूरे क्षेत्र में धुएं और धूल का गुबार छाया रहता है। * वन्यजीवों का पलायन: भारी ब्लास्टिंग और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण ऐतिहासिक कैमोर पहाड़ियों और आसपास के जंगलों से जीव-जंतुओं का पलायन हो रहा है।प्रशासन और सरकार से जनता के प्रमुख सवाल: * 10 लाख टन एस्बेस्टस कचरे के दावे की निष्पक्ष जांच कब होगी? * इस कचरे को सुरक्षित रूप से हटाने या निस्तारण (Disposal) की क्या योजना है? * चूना भट्टियों और क्रेशरों के तय पर्यावरण मानकों की जांच कब की जाएगी? * बिना पर्यावरण क्लीयरेंस के संचालित इकाइयों पर क्या कार्रवाई होगी? * धूल-धुएं से प्रभावित गांवों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य शिविर और चिकित्सा सुविधाएं कब उपलब्ध कराई जाएंगी? * जंगलों से वन्यजीवों के पलायन को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे?ग्रामीणों की मांग: विकास आवश्यक है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच और स्वास्थ्य सर्वे कराने की मांग की है।

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