मानसूनी बारिश की भारी कमी और अल नीनो का असर—महाराष्ट्र के तीन-चौथाई हिस्से में अकाल की घोषणा
मुंबई:
महाराष्ट्र इस समय एक गंभीर कृषि और जल संकट से गुजर रहा है। मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश न होने और ‘अल नीनो’ (El Nino) की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित (Drought-affected) घोषित कर दिया है। यह क्षेत्र राज्य के कुल भूभाग का लगभग 74 से 75 प्रतिशत हिस्सा है, जिसके बाद से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है और किसानों की स्थिति को लेकर भारी चिंता जताई जा रही है।
किन क्षेत्रों में सबसे बुरा हाल?
कृषि आयुक्त द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई जिलों में मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र इस सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं:
- छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) डिवीजन: सबसे ज्यादा 74 ताल्लुक सूखे की चपेट में हैं।
- अमरावती डिवीजन: 56 ताल्लुक प्रभावित।
- नाशिक डिवीजन: 49 ताल्लुक प्रभावित।
- नागपुर डिवीजन: 39 ताल्लुक।
- पुणे डिवीजन: 35 ताल्लुक और कोंकण क्षेत्र के 12 ताल्लुक इसमें शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बारिश का गायब रहना (Dry Spells) और वाटर डेफिसिट (Water Deficit) के कारण सोयाबीन और अन्य खरीफ की फसलें खेतों में ही सूख चुकी हैं।
सरकार द्वारा घोषित राहत और उपाय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए राहत उपायों का ऐलान किया है:
- फसल ऋण का पुनर्गठन: किसानों के कृषि ऋणों का पुनर्गठन (Restructuring) किया जाएगा और लोन वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाएगी।
- बिजली बिल में राहत: कृषि पंपों के बिजली बिलों में विशेष छूट दी जाएगी, और सूखा घोषित गांवों में किसानों के कृषि पंपों के कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे।
- राजस्व और परीक्षा शुल्क माफी: प्रभावित क्षेत्रों में भू-राजस्व (Land Revenue) माफ किया जाएगा और स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस भी माफ होगी।
- पेयजल और चारा आपूर्ति: प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीण इलाकों में पानी के टैंकरों की तैनाती की जाए और मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- रोजगार गारंटी योजना: मनरेगा (MGNREGS) के नियमों में ढील देकर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे।
राजनीतिक सरगर्मी और विपक्ष का रुख
इतने बड़े पैमाने पर सूखा घोषित होने के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को देरी से उठाया गया कदम करार दिया है और आरोप लगाया है कि ज़मीनी स्तर पर किसानों की हालत सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक बदतर है। बहरहाल, प्रशासन को युद्धस्तर पर फसलों के नुकसान का पंचनामा (Crop Damage Assessment) तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि प्रभावित किसानों तक जल्द से जल्द वित्तीय सहायता पहुंचाई जा सके।












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