कन्हवारा बीड मामला (फॉलो-अप): बीड गार्ड सुजीत यादव का बयान, सागौन माफिया पर केस दर्ज; पर क्या सूचना देने वाले को मिलेगी सजा?

कन्हवारा बीड मामला: बीड गार्ड सुजीत यादव का बयान, सागौन माफिया पर केस दर्ज; पर चौकीदार की बहाली पर बजट का रोना

विशेष रिपोर्ट |

कटनी। कटनी जिले के बहुचर्चित कन्हवारा बीड वन क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और लगातार उठते सवालों के बीच वन विभाग ने अपनी कार्रवाई का ब्योरा जारी किया है। विभाग का दावा है कि सागौन माफिया के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है, लेकिन दूसरी ओर सबसे पहले सजगता दिखाकर वीडियो बनाने वाले चौकीदार पंचम लाल यादव की बहाली पर विभाग “बजट के अभाव” का रोना रो रहा है।

बीड गार्ड सुजीत यादव का बयान: माफिया के खिलाफ हुई एफआईआर

कन्हवारा बीड के बीड गार्ड सुजीत यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए विभाग ने जांच शुरू की थी।

सुजीत यादव के अनुसार:

“जांच के आधार पर अवैध रूप से सागौन काटने वाले के खिलाफ केस दर्ज करा दिया गया है। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। वन विभाग की टीम क्षेत्र में मुस्तैदी से गश्त कर रही है और आगे की अतिरिक्त जांच जारी है।”

पंचम लाल यादव की बहाली पर संकट — बजट का रोना क्यों?

मामले का दूसरा पहलू विभागीय मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है। सबसे पहले अवैध कटाई की जानकारी उजागर करने वाले चौकीदार पंचम लाल यादव को अब तक काम पर वापस नहीं लिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, विभाग का कहना है कि उनके पास बजट की कमी है, जिस वजह से चौकीदार को मानदेय देना और काम पर रखना संभव नहीं हो पा रहा है। इस रवैये से स्थानीय ग्रामीणों और जन-प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। लोगों का सीधा सवाल है कि क्या जंगलों की रक्षा करना और सच सामने लाना ही पंचम लाल के लिए सजा बन गया?

कन्हवारा बीड: इतिहास और वर्तमान की चुनौती

कटनी का कन्हवारा बीड क्षेत्र 1980 के दशक से ही संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में दर्ज है और कीमती सागौन के पेड़ों के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद, बीते कुछ समय से क्षेत्र में लकड़ी तस्कर सक्रिय हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर वन विभाग वास्तव में जंगलों को बचाना चाहता है, तो सूचना देने वाले कर्मियों और ग्रामीणों को संरक्षण देना होगा, न कि बजट का बहाना बनाकर उन्हें हटाना। अब देखना यह है कि प्रशासन मामले में क्या रुख अपनाता है।

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