कटनी रेलवे स्टेशन के बाहर दिनदहाड़े सनसनीखेज वारदात: यात्री से ₹3 हजार की लूट, सुरक्षा व्यवस्था और GRP-RPF-पुलिस के समन्वय पर उठे गंभीर सवाल

कटनी। न्यायधान और मध्य प्रदेश के प्रमुख रेल जंक्शनों में शुमार कटनी रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है। स्टेशन के ठीक बाहर चाय के ठेले के पास खड़े एक बेबस यात्री से अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा दिनदहाड़े कथित तौर पर ₹3,000 नकद लूट लिए जाने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। इस घटना ने न केवल स्टेशन के आसपास सक्रिय आपराधिक तत्वों के हौसलों को उजागर किया है, बल्कि पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर भी गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

दिनदहाड़े वारदात, बेबस यात्री बिना शिकायत कराए रवाना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित यात्री कटनी रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद मुख्य द्वार से बाहर निकला और पास ही स्थित एक चाय के ठेले पर रुका था। इसी दौरान पहले से ताक में बैठे अज्ञात बदमाशों ने यात्री को घेर लिया और डरा-धमकाकर उसके पास रखे लगभग ₹3,000 नकद छीन लिए और पलक झपकते ही भीड़भाड़ वाले इलाके से रफूचक्कर हो गए।

अचानक हुई इस वारदात के बाद पीड़ित यात्री बुरी तरह बदहवास और परेशान नजर आया। स्टेशन परिसर में उपस्थित लोगों के अनुसार, यात्री अत्यधिक घबराया हुआ था। हालांकि, ट्रेन छूटने की जल्दबाजी, कानूनी प्रक्रियाओं के लंबे पचड़े में फंसने के डर और समय की भारी कमी के चलते पीड़ित यात्री पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराए बिना ही अपने अगले सफर की ओर रवाना होने को मजबूर हो गया।

सूचना मिलते ही पहुंची डायल-112, पर हाथ खाली

घटना की भनक लगते ही पुलिस हेल्पलाइन डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के दुकानदारों तथा चश्मदीदों से प्रारंभिक पूछताछ शुरू की। पुलिस टीम ने आसपास के क्षेत्र में संदिग्धों की तलाश की, लेकिन तब तक शातिर आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर ओझल हो चुके थे।

इस पूरी घटना के उजागर होने के बाद जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और स्थानीय कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली, नियमित गश्त और आपसी तालमेल को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्टेशन जैसे अति-संवेदनशील और चौबीसों घंटे यात्रियों की भारी आवाजाही वाले स्थान पर दिन के उजाले में ऐसी वारदात होना पुलिस की ढिलाई को दर्शाता है।

CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने पर खुल सकता है राज

उल्लेखनीय है कि रेलवे स्टेशन परिसर और उसके मुख्य प्रवेश द्वारों के आसपास सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। क्षेत्रवासियों और नियमित यात्रियों की मांग है कि पुलिस यदि चाय की दुकान और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच करे, तो संदिग्ध बदमाशों की पहचान आसानी से की जा सकती है।

ज्वलंत सवाल: आखिर यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन?

  • दिनदहाड़े गुंडागर्दी और बेखौफ बदमाश: मुख्य स्टेशन मार्ग पर जहां हर समय पुलिस बल की मौजूदगी का दावा किया जाता है, वहां अपराधी दिनदहाड़े वारदात को अंजाम देकर कैसे निकल जाते हैं?
  • सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल का अभाव: जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय कोतवाली पुलिस के बीच सीमा क्षेत्र और अधिकार क्षेत्र को लेकर अक्सर रहने वाली उदासीनता का फायदा उठाकर अपराधी सक्रिय हो रहे हैं।
  • अवैध जमावड़े पर कार्रवाई कब?: स्टेशन के बाहर चाय, पान और खान-पान के ठेलों के आसपास देर तक जमावड़ा लगाने वाले संदिग्ध तत्वों पर पुलिस की नियमित चेकिंग क्यों नहीं होती?

यह मामला केवल ₹3,000 की लूट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कटनी जंक्शन पर प्रतिदिन आने-जाने वाले हजारों यात्रियों के मन में भय पैदा करने वाला विषय है। यदि समय रहते पुलिस प्रशासन ने स्टेशन परिसर के बाहर गश्त नहीं बढ़ाई और ऐसे अपराधियों पर नकेल नहीं कसी, तो यह क्षेत्र असामाजिक तत्वों का गढ़ बन जाएगा।

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