नई दिल्ली:
देश में इन दिनों भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर राजनीति पूरी तरह से गरमाई हुई है। चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदमों और देश भर में मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया के बाद विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
क्या है पूरा विवाद और SIR प्रक्रिया?
निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘एसआईआर’ (SIR) अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मृतक, दोहरी प्रविष्टियों (Duplicate Entries) और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके अयोग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाना तथा नए पात्र युवाओं के नाम जोड़ना है।
हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राज्यों में करोड़ों नामDraft सूचियों से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है:
- विपक्षी दलों के आरोप: कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे सुनियोजित तरीके से मतदाताओं (विशेषकर marginalized समुदायों और प्रवासियों) को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास करार दिया है।
- दस्तावेजों की अनिवार्यता: सत्यापन के दौरान मांगे जाने वाले कड़े दस्तावेजों और प्रशासनिक नियमों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में विरोध देखने को मिला है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और न्यायिक स्थिति
इस पूरे मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का भी रुख सामने आ चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार और दायित्व है, और यह प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही संचालित की जा रही है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी वैध मतदाता के अधिकारों का हनन न हो।
चुनाव आयोग (ECI) के हालिया कदम और राहत
बढ़ते विरोध और राजनीतिक सरगर्मी के बीच निर्वाचन आयोग ने प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं:
- दावे और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाई गई: महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नागरिकों और राजनीतिक दलों की मांग पर फॉर्म जमा करने तथा आपत्तियों के निपटारे की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया है ताकि किसी को असुविधा न हो।
- डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन पर जोर: आयोग ने स्पष्ट किया है कि अनमैप्ड मतदाताओं के सत्यापन के लिए अधिकारी खुद घर-घर जाकर दस्तावेज लेंगे ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
- पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश: आयोग के भीतर आंतरिक बैठकों, डिजिटल पोर्टल्स की समीक्षा और निर्णयों में पारदर्शिता लाने के लिए भी नए निर्देश जारी किए गए हैं।
यह वीडियो Election Commission announces a slew of SIR decisions for voter rolls चुनाव आयोग द्वारा SIR और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े ताजा फैसलों और प्रशासनिक बदलावों की पूरी जानकारी देता है।












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