बड़वारा में शासन-प्रशासन की बड़ी लापरवाही: हादसों के बाद भी ‘नो एंट्री’ लागू नहीं, बच्चों की जान पर रोज़ बना रहता है ख़तरा

बड़वारा (कटनी)। बड़वारा में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और जन-आंदोलनों के बावजूद शासन-प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार ज्ञापन सौंपने, प्रदर्शन करने और चक्काजाम करने के बाद भी अब तक क्षेत्र में भारी वाहनों के लिए ‘नो एंट्री’ नियम लागू नहीं किया गया है।

​इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण रोज़ाना हज़ारों स्कूली बच्चों और आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ी रहती है।

क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?

​बड़वारा क्षेत्र में पहले भी कई दर्दनाक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई परिवार अपनी जान और माल का नुकसान उठा चुके हैं। इसके बावजूद बड़वारा तहसीलदार एवं थाना प्रभारी द्वारा इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

​दिन के समय, विशेषकर स्कूल और कोचिंग के आवागमन के वक्त, सड़कों पर बेधड़क दौड़ते भारी और अनियंत्रित वाहन मासूम बच्चों के लिए काल बनकर घूम रहे हैं। अभिभावक हर पल किसी अनहोनी के डर में जीने को मजबूर हैं।

“लगातार संवाद करने और ध्यानाकर्षण कराने के बाद भी नो एंट्री चालू न करना यह दर्शाता है कि बड़वारा प्रशासन जनता की सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है। हमारे नन्हे-मुन्ने बच्चों के भविष्य और उनकी ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए।”

मुख्य माँगें:

  1. नो एंट्री तत्काल लागू हो: बड़वारा के मुख्य और व्यस्त मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश के लिए समय-सीमा (नो एंट्री) तय की जाए।
  2. स्कूल समय में विशेष सुरक्षा: सुबह और दोपहर में स्कूल खुलने व बंद होने के समय पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
  3. गति सीमा पर नियंत्रण: कस्बे के अंदर से गुज़रने वाले वाहनों की गति पर सख्त पाबंदी लगाई जाए।

माँगें न मानने पर उग्र जन-आंदोलन की चेतावनी

​क्षेत्रीय निवासियों और प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते नो एंट्री लागू नहीं की और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र की जनता एक बार फिर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी बड़वारा शासन-प्रशासन की होगी।

कटनी में ‘खाद सिंडिकेट’ पर बड़ा प्रशासनिक प्रहार: DDA ने दिए जाँच के कड़े निर्देश, जिले के सभी होलसेलरों को जारी होंगे नोटिस

गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी’ का बड़ा खेल उजागर: अपनी ही रिटेल ID पर डंप की यूरिया की बोरियाँ, छोटे व्यापारियों को बना रहे थे मोहरादुकानों और गोदामों का होगा भौतिक सत्यापन; फर्जीवाड़े और अवैध टैगिंग पर लाइसेंस निरस्तीकरण की लटकी तलवारकटनी (विशेष प्रतिनिधि)।कटनी जिले में लंबे समय से जारी यूरिया खाद की कृत्रिम किल्लत, अवैध टैगिंग और होलसेल डीलरों की मनमानी के खिलाफ आखिरकार कृषि विभाग का हंटर चल गया है। खुदरा (रिटेल) खाद व्यापारियों द्वारा साक्ष्यों के साथ की गई शिकायत और ज्ञापन के बाद उप संचालक कृषि (DDA) कटनी ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिलेभर के सभी होलसेलर्स के खिलाफ जाँच के कड़े निर्देश दिए हैं। DDA ने स्पष्ट किया है कि कटनी जिले के सभी बड़े खाद होलसेलरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्टॉक और आवंटन का पाई-पाई का हिसाब माँगा जाएगा

खुद की रिटेल ID में माल डंप, छोटे दुकानदारों को ‘नो स्टॉक’ का झटका जाँच के दौरान जो सबसे चौंकाने वाली कार्यप्रणाली सामने आई है, वह होलसेलरों की सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करती है। शिकायत के अनुसार, कटनी के प्रमुख होलसेलर ‘गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी’ ने भारी मात्रा में यूरिया का स्टॉक अपनी ही खुद की रिटेल ID पर ट्रांसफर/डंप कर रखा है।जब ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों से आने वाले छोटे रिटेल व्यापारी यूरिया की माँग करते हैं, तो उन्हें “स्टॉक खत्म हो गया है” या “ऊपर से माल नहीं आ रहा है” कहकर साफ मना कर दिया जाता है। इस प्रकार होलसेलर अपने चहेते और बड़े खरीदारों को गुप्त तरीके से माल सप्लाई कर रहे हैं और छोटे दुकानदारों को केवल चक्कर कटवा रहे हैं।टैगिंग की आड़ में आर्थिक शोषण और भाषा का छल

रिपोर्ट के मुताबिक, होलसेल व्यापारी कागज़ों पर ‘टैगिंग’ (यूरिया के साथ अन्य बेमतलब का सामान बेचने) का शब्द इस्तेमाल करने से बचते हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से दुकानदारों पर भारी दबाव बनाते हैं। हाल ही में सामने आए उदाहरण में 70 बोरी यूरिया के साथ 10,000 रुपये का बेंटोनाइट सल्फर (Bentonite Sulphur) जबरन लेने की शर्त रखी गई।इसके अलावा, ₹266 की सरकारी दर पर मिलने वाली यूरिया बोरी पर भाड़ा और हमाली का खर्च मिलाकर छोटे व्यापारियों को ₹310 से ₹320 की लागत आ रही है। शासकीय नियमों के कारण वे इसे ₹266 में ही बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें प्रति बोरी ₹30 से ₹40 का सीधा घाटा सहना पड़ रहा था।

प्रशासन का सख्त रुख: गोदामों में होगी अचानक छापेमारी उप संचालक कृषि (DDA) ने आश्वस्त किया है कि:भौतिक सत्यापन (Physical Verification): गुप्ता ट्रेडिंग कंपनी (घंटाघर दुकान व गोदाम), सनत ट्रेडर्स, श्री राम बीज भंडार सहित अन्य बड़े डीलरों के गोदामों में टीम भेजकर स्टॉक की निष्पक्ष जाँच कराई जाएगी।नोटिस व लाइसेंस कार्रवाई: कागज़ों में दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद माल में अंतर पाए जाने या अवैध टैगिंग का प्रमाण मिलने पर संबंधित होलसेलर्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित/निरस्त किए जाएँगे।पारदर्शी आवंटन: छोटे रिटेल विक्रेताओं को उनकी आवश्यकतानुसार बिना किसी शर्त के पारदर्शी तरीके से यूरिया आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।

व्यापारियों और किसानों में जगी उम्मीदकृषि विभाग द्वारा दिए गए जाँच के इन कड़े निर्देशों के बाद जिले के खाद सिंडिकेट और मुनाफाखोरों में हड़कंप मच गया है। छोटे रिटेल व्यापारियों और किसान संगठनों ने इस कड़े रुख का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही यूरिया की कालाबाजारी पर पूर्ण विराम लगेगा।

कटनी में खाकी फिर दागदार? सीएसपी और थाना प्रभारी पर हत्या के आरोपी को बचाने के लिए करोड़ों की जमीन कौड़ियों में हथियाने का सनसनीखेज आरोप

कटनी:कानून की रक्षा और आमजन को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, जब वही संरक्षक भक्षक बन जाएं तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से पुलिस महकमे को हिला देने वाला एक और गंभीर मामला सामने आया है। कुठला थाना क्षेत्र के चर्चित छग्गू कोल हत्याकांड में फंसे एक आरोपी को बचाने का झांसा देकर, करोड़ों रुपए कीमती बेशकीमती जमीन महज 18 लाख रुपए में कौड़ियों के भाव लिखवाने का संगीन आरोप कटनी सीएसपी और कुठला थाना प्रभारी पर लगा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है।

क्या है पूरा मामला?कटनी जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदी रमेश लोधी, उनके बेटे आकाश लोधी और दामाद सतीश लोधी की तरफ से उनके वकील अवनीश तिवारी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन (तिवारी) की अदालत में यह परिवाद (यूएनसीआर 1589/2026) प्रस्तुत किया है। आरोप है कि कुठला थाना अंतर्गत कन्हवारा गांव में हुई छग्गू कोल की हत्या के मामले में पुलिस अधिकारियों ने अपने रसूख और पद का दुरुपयोग करते हुए इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।

एक करोड़ की जमीन का सौदा सिर्फ 18.20 लाख मेंعدالت میں پیش کیے गए दस्तावेजों के मुताबिक:सरकारी कीमत (गाइडलाइन): कन्हवारा स्थित खसरा नंबर 2618/1 (रकबा 2.15 हेक्टेयर) की कुल शासकीय गाइडलाइन वैल्यू 82.86 लाख रुपए है।बाजार मूल्य: इस जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य एक करोड़ सात लाख रुपए (1.07 करोड़) से अधिक आंका गया है।कौड़ियों के भाव रजिस्ट्री: आरोप है कि सीएसपी और कुठला थाना प्रभारी की कथित मिलीभगत और संरक्षण में यह बेशकीमती जमीन 15 अप्रैल 2026 को सिर्फ 18.20 लाख रुपए में एक खरीददार के नाम पर ट्रांसफर (रजिस्ट्री) करवा दी गई।

परिवार का दर्द है कि विक्रेता रमेश लोधी को इसके एवज में केवल 15 लाख रुपए का एक चेक थमाया गया, और बाकी बची रकम देने का जो वादा किया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ।बेटे को रिहा करने के नाम पर चला वसूली का खेलआरोप है कि गत 3 अप्रैल 2026 को रमेश लोधी के बेटे आकाश लोधी को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि सीएसपी और थाना प्रभारी की तरफ से आकाश को इस झूठे या गंभीर मामले से बरी कराने और छोड़ने के एवज में 15 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की गई।दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते मजबूर पिता से सीएसपी के एक करीबी (जिसे परिवाद में कथित एजेंट बताया गया है) के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। हैरानी की बात यह है कि जमीन हाथ से निकल जाने के बाद भी उनका बेटा रिहा नहीं हुआ, बल्कि पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए 17 मई 2026 को खुद पिता रमेश लोधी और दामाद सतीश लोधी को भी गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद और बढ़ गया उत्पीड़नजब जमीन की पूरी रकम नहीं मिली और बेटे को भी नहीं छोड़ा गया, तो पीड़ित पिता ने पटवारी के पास इस बात की आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद 18 मई 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत (क्रमांक 38397487) दर्ज कराई गई।शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सजा उन्हें यह मिली कि पुलिस ने उन्हें अवैध हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया और जबरन जेल भेज दिया। हालांकि, इन संगीन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।अदालत ने मांगी जांच रिपोर्ट, राष्ट्रपति और डीजीपी तक पहुंचा मामलामामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने प्रकरण को पंजीबद्ध कर संबंधित थाने से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तलब की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 9 सितंबर 2026 को तय की गई है।

दूसरी ओर, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अवनीश तिवारी ने देश के महामहिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को ईमेल के जरिए पत्र भेजा है। इसमें एक उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कमेटी गठित करने, संबंधित पुलिस अधिकारियों की कॉल डिटेल (CDR) निकलवाने, आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने तथा विवादित भूमि पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने की मांग की गई है।तीन दिन में दूसरा बड़ा विवाद, पुलिस की साख पर बड़े सवालकटनी पुलिस के लिए पिछले कुछ दिन बेहद दागदार रहे हैं। महज तीन दिन पहले ही एक ट्रक चालक ने इसी सीएसपी पर 30 हजार रुपए की अवैध वसूली करने और शिकायत वापस लेने का गंभीर दबाव बनाने के सनसनीखेज आरोप लगाए थे। हालांकि उस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएसपी के ड्राइवर सिपाही को तो निलंबित कर दिया और जांच बिठा दी, लेकिन अब हत्या के आरोपी को बचाने के नाम पर करोड़ों की जमीन हड़पने का यह नया मामला सामने आने के बाद पुलिस की साख पर चौतरफा सवाल खड़े हो गए हैं।

आम जनता के बीच चर्चा का विषय यह है कि यदि खाकी के पहरेदार ही इस तरह जमीनों के सौदों और अवैध वसूली में लिप्त पाए जाएंगे, तो आम आदमी न्याय के लिए आखिर किसकी शरण में जाएगा? बहरहाल, इन सभी गंभीर आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच और अदालत के फैसले के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी, लेकिन इस घटनाक्रम ने कटनी पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा कर दिया है।

बरही में गूंजा जीत का शंखनाद: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त, जननायक राज भैया संग युवाओं ने मनाया जश्न

बरही (कटनी)।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर युवा जननायक राज भैया के नेतृत्व में पिछले 10 दिनों से चल रहा जन-आंदोलन आज आखिरकार ऐतिहासिक जीत के साथ समाप्त हो गया। आंदोलन की सफलता के बाद पूरे बरही नगर में जीत के जश्न का माहौल रहा और चारों तरफ युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।सड़कों पर उतरा युवाओं का हुजूम, आतिशबाजी और मिठाइयों से गूंजा नगरआंदोलन समाप्त होने की घोषणा के साथ ही बरही नगर में विजय जुलूस निकाला गया। युवाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और गले लगाकर जीत की बधाइयां दीं। इस दौरान पूरा नगर आतिशबाजी के धमाकों और “युवा एकता ज़िंदाबाद” के नारों से गुंजायमान हो उठा।जननायक राज भैया ने युवाओं का जताया आभारजीत के जश्न के बीच युवा जननायक राज भैया ने उपस्थित जनसैलाब को संबोधित करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संघर्षरत युवाओं के एकजुट प्रयास, धैर्य और सत्य की जीत है। उन्होंने बेहद आत्मीयता से बातचीत करते हुए युवाओं का हौसला बढ़ाया और कहा, “10 दिनों का यह कठिन संघर्ष साबित करता है कि जब युवा शक्ति अपने अधिकारों और न्याय के लिए एकजुट होती है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता।”नगर में उत्सव जैसा माहौल बरही के मुख्य चौराहों और बाजारों में दिनभर उत्सव जैसा माहौल बना रहा। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने भी युवाओं के इस संघर्ष और सफलता की सराहना की। युवाओं का कहना है कि राज भैया के कुशल नेतृत्व में मिला यह समर्थन उनके आंदोलन की असली ताकत बना।सोशल मीडिया पोस्ट/कैप्शन के लिए छोटा वर्जन: जीत की हुंकार, युवा शक्ति की जयकार! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर युवा जननायक राज भैया के नेतृत्व में 10 दिनों से चल रहा उग्र प्रदर्शन आज ऐतिहासिक जीत के साथ समाप्त हुआ। बरही नगर में चारों तरफ जश्न का माहौल है! राज भैया ने सभी साथी युवाओं के साथ मीठी बातचीत कर जीत की खुशियां बांटी और युवाओं के अटूट संघर्ष को नमन किया।

कटनी में फूटा छात्रों और युवाओं का गुस्सा: NEET धांधली के विरोध में सड़क पर उतरे,

कटनी (मध्य प्रदेश): नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर में जारी आक्रोश की आंच कटनी जिले में भी साफ देखने को मिल रही है। परीक्षा में हुई भारी गड़बड़ी से नाराज छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय युवा संगठनों ने एकजुट होकर शहर के कचहरी चौक स्थित फर्स्ट प्ले ग्राउंड पर एकत्र होकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया।

​प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उनसे तुरंत इस्तीफे की मांग उठाई।

प्रदर्शन की प्रमुख बातें और मांगें:

  • कचहरी चौक पर जोरदार प्रदर्शन: कचहरी चौक के फर्स्ट प्ले ग्राउंड में एकत्र हुए छात्र-छात्राओं और युवा नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा व्यवस्था में हुई धांधली के खिलाफ अपना विरोध जताया।
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग: प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। इसलिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई और CBI जांच: छात्रों ने मांग उठाई कि पेपर लीक और धांधली में शामिल सभी आरोपियों व सॉल्वर गिरोहों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • पुनः निष्पक्ष परीक्षा का आयोजन: प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना था कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ न्याय तभी होगा जब पूरी पारदर्शिता के साथ दोबारा NEET परीक्षा आयोजित कराई जाएगी।

प्रदर्शनकारियों का रुख:

​”लाखों बच्चों की सालों की दिन-रात की मेहनत को इस धांधली ने बर्बाद कर दिया है। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते और सभी दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक हमारा यह आंदोलन जारी रहेगा।”

स्थानीय छात्र प्रतिनिधि

बड़ी ख़बर: NEET विवाद और छात्र प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली: नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और देश भर में जारी भारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक पत्र जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने की जानकारी दी। इस्तीफे की मुख्य वजहें और पत्र की बड़ी बातें:छात्रों के भविष्य की चिंता: धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि देश के युवा राष्ट्र की असली ताकत हैं। वे नहीं चाहते कि किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों या राजनीतिक भ्रम के जाल में फंसे। विरोधी ताकतों से बचाव: उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बन रहे माहौल का कोई देश-विरोधी तत्व फायदा न उठा सके और देश की एकता बनी रहे, इसी सोच के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया है। नैतिक जिम्मेदारी: 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में धांधली की बात सामने आने के बाद से ही उन्होंने इस स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी ली और जांच CBI को सौंपते हुए परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला किया था। प्रधानमंत्री का आभार: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और अवसर देने के लिए आभार व्यक्त किया तथा कहा कि देश सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। क्या था मामला?NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में छात्रों और विभिन्न संगठनों का जोरदार प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शनकारी लंबे समय से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे। लगातार बढ़ते दबाव और छात्रों के जारी आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने 4 दशक लंबे सार्वजनिक जीवन और शिक्षा सुधारों के अनुभव का हवाला देते हुए अंततः पद छोड़ने का ऐलान कर दिया।

कटनी: खरखरी अमुवारी के सरकारी स्कूल में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का आरोप, केंद्र सरकार तक पहुंची शिकायत

कटनी (विजयराघवगढ़)।जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, खरखरी अमुवारी का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्कूल में कथित वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की शिकायत सीधे केंद्रीय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के जन-शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई है। मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।रिश्वत न देने पर नौकरी से हटाने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय में लंबे समय से कार्यरत अनुसूचित जाति वर्ग की महिला कर्मचारी रानी बाई दहिया को बिना किसी स्पष्ट अथवा कानूनी कारण के सेवा से पृथक कर दिया गया। शिकायत में विद्यालय के शिक्षक भूपत भारती पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उन्होंने महिला कर्मचारी को पुनः बहाल करने के एवज में पैसों की मांग की थी। आरोप है कि राशि देने में असमर्थता जताने पर न केवल उन्हें काम पर वापस लेने से मना कर दिया गया, बल्कि उनके परिवार पर बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) कटवाकर स्कूल छुड़वाने का दबाव भी बनाया गया।ग्रामीणों में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग मामला सामने आने के बाद शिकायतकर्ता कन्हैया लाल ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ स्कूल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासनिक एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे घटनाक्रम पर तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।शिकायत पत्र में मांग की गई है कि मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जाए, दोषी कर्मचारियों पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई हो तथा शिकायत पर की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।

बड़वारा में 12 टायर फ्यूल कंपनियों के प्रदूषण से हाहाकार: तहसीलदार को कई बार ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासन मौन

बड़वारा में 12 टायर फ्यूल कंपनियों के प्रदूषण से हाहाकार: तहसीलदार को कई बार ज्ञापन देने के बाद भी प्रशासन मौनबड़वारा (कटनी) | विशेष समाचारजनपद पंचायत बड़वारा क्षेत्र में संचालित 12 टायर आधारित ईंधन तेल निर्माण इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे भयंकर प्रदूषण से स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता जय सूर्यवंशी द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर तहसीलदार महोदय को कई बार औपचारिक ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक इन कंपनियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।प्रशासनिक उदासीनता के कारण दूसरे राज्यों से आई ये टायर कंपनियाँ बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रही हैं, जिससे बड़वारा के हज़ारों ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला हो रहा है।ज़हरीले धुएँ से बुज़ुर्ग और बच्चे परेशानइन इकाइयों में पुराने टायरों को जलाकर तेल निकाला जाता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाले काले धुएँ, सल्फर और तीव्र दुर्गंध से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है। ग्रामीणों में अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारियां तेज़ी से फैल रही हैं, साथ ही फसलों पर काली राख जमने से कृषि को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है।

इन 12 इकाइयों पर उठ रहे सवाल:

एम/एस अक्षर एनर्जीएम/

एस श्री राम फ्यूल इंडस्ट्रीजएम/

एस अहिंसा लुब्रिकेट्सएम/

एस श्रीनाथ फ्यूलएम/

एस गुनसागर प्रो. फ्यूलएम

/एस श्री श्याम प्रो. फ्यूलएम/

एस एस आर एम कार्बो फ्यूल्सएम

/एस सदाशिव फ्यूल कंपनीएम

/एस विहान फ्यूलएम/

एस एस आर एम एस फ्यूल कंपनीएम

/एस श्री खंडल माता जी एनर्जी एण्ड फ्यूल्सएम/

एस गजलक्ष्मी इंडस्ट्रीजउग्र आंदोलन की चेतावनीजय सूर्यवंशी एवं क्षेत्रीय नागरिकों ने स्पष्ट कहा है कि ज्ञापन देने के बावजूद यदि प्रशासन ने इन कंपनियों की पर्यावरणीय स्वीकृतियों (NOC) की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई और नियम उल्लंघन पर इन्हें सील नहीं किया, तो बड़वारा की जनता सड़कों पर उतरकर व्यापक जन-आंदोलन करेगी।

कटनी: छात्रावास की दो छात्राओं के कथित अपहरण से हड़कंप; पुलिस जांच में जुटी

बरही (कटनी):मध्य प्रदेश के कटनी जिले के बरही थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खितौली स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावास की दो नाबालिग छात्राओं के कथित अपहरण की खबर से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। कक्षा सातवीं में पढ़ने वाली दोनों छात्राओं ने दो अज्ञात नकाबपोश बाइक सवार युवकों पर नशीला पदार्थ सुंघाकर ले जाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, पुलिस मामले की जांच करते हुए इसे छात्राओं के छात्रावास से भागने की साजिश के कोण से भी देख रही है।स्कूल से अपहरण का आरोपछात्राओं के अनुसार, बुधवार को दोपहर के भोजन अवकाश (लंच ब्रेक) के दौरान वे पास की एक किराना दुकान पर गई थीं। उनका आरोप है कि इसी दौरान बाइक पर आए दो नकाबपोश युवकों ने उन्हें कुछ नशीला पदार्थ सुंघा दिया, जिससे वे बेहोश हो गईं। छात्राओं का दावा है कि जब उन्हें होश आया, तो वे बरही के मेला ग्राउंड में थीं।परिचित ऑटो चालक ने की मददछात्राओं ने बताया कि होश में आने के बाद वे किसी तरह मेला ग्राउंड से निकलकर बरही-विजयराघवगढ़ मार्ग पर पहुंचीं। वहां उन्हें एक परिचित ऑटो चालक मिला, जिसे उन्होंने आपबीती सुनाई। ऑटो चालक दोनों छात्राओं को ग्राम देवरा ले गया, जहां एक छात्रा के रिश्तेदार और ग्राम सरपंच की मदद से पुलिस को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही बरही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों छात्राओं को थाने ले आई।पहले भी मिली थी धमकी?मामले में एक नया मोड़ तब आया जब छात्राओं ने बताया कि घटना से एक दिन पहले भी दो नकाबपोश युवकों ने उन्हें धमकी दी थी। छात्राओं का दावा है कि उन्होंने इस बात की जानकारी छात्रावास में ट्यूशन पढ़ाने वाली शिक्षिका को दी थी और परिजनों को सूचित करने का आग्रह किया था।पुलिस का पक्ष:घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों के साथ-साथ पुलिस बल भी थाने पहुंच गया। बरही थाना प्रभारी ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आशंका जताई है कि यह मामला छात्राओं द्वारा छात्रावास से भागने की साजिश भी हो सकता है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी पहलुओं और सीसीटीवी फुटेज आदि की गंभीरता से पड़ताल कर रहे हैं।

कटनी में खाकी पर दाग: आदिवासी महिला का बरही पुलिस पर सनसनीखेज आरोप, फर्जी बयान के लिए बरती बर्बरता!

कटनी। कटनी जिले के बरही थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली और खाकी को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम झिरिया बैकोना टोला निवासी आदिवासी महिला ऊषा बाई भूमिया ने बरही पुलिस के आला अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र सौंपा है। महिला का आरोप है कि पुलिस ने थाने में उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, उस पर दबाव बनाकर झूठा बयान दिलवाया और ससुर की मौत के मामले में उसे ही फंसाने की साजिश रची।ससुर की संदिग्ध मौत और एफआईआर दर्ज न करने का आरोपशिकायत के अनुसार, महिला के ससुर चुन्दुल भूमिया 27 जून को गांव की पारंपरिक पूजा के लिए चंदा एकत्र करने बगदरी टोला गए थे। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्होंने परिजनों को बताया कि रमेश बर्मन और उनके बेटे गोपी बर्मन ने उनके साथ मारपीट की और जबरन “एसिड जैसा कोई जहरीला पदार्थ” पिला दिया।गंभीर हालत में इलाज के दौरान 10 जुलाई को चुन्दुल भूमिया की मौत हो गई। पीड़िता का दावा है कि इस जघन्य अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए वे कई बार बरही थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।”एसपी साहब का आदेश है…” कहकर थाने में दी गई यातनाएं!मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ 12 जुलाई को आया। महिला का आरोप है कि पुलिस उसे और उसके पति को जबरन थाने ले गई, जहाँ उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएँ दी गईं।महिला ने आरोप लगाया:”पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ‘एसपी साहब का आदेश है कि तुमसे यह कबूल करवाना है।’ उन्होंने धमकाया कि अगर पुलिस के बताए अनुसार बयान नहीं दिया, तो पूरी जिंदगी जेल में सड़ा देंगे।”आरोप है कि बर्बरतापूर्वक मारपीट करने के बाद दबाव में महिला का वीडियो बयान रिकॉर्ड कराया गया और कोरे/लिखित कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए गए।मेडिकल जांच में भी धमकी का सायापीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी उजागर किया है कि अस्पताल ले जाते समय पुलिस ने उसे डॉक्टर के सामने मुंह न खोलने और मारपीट की बात छिपाने की सख्त हिदायत दी थी। डर के मारे महिला ने उस वक्त कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद में स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार होने पर हिम्मत जुटाकर उच्च अधिकारियों के सामने न्याय की गुहार लगाई।उच्च अधिकारियों और आरोपियों पर कार्रवाई की मांगपीड़िता ऊषा बाई ने प्रशासनिक तंत्र से न्याय की मांग करते हुए:मुख्य आरोपी रमेश बर्मन, गोपी बर्मन एवं अन्य पर हत्या का मामला दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।बर्बरता करने और पद के दुरुपयोग के आरोप में एसडीओपी वीरेन्द्र सिंह धारवे तथा टीआई अरविंद कुमार चौबे के खिलाफ जांच व सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि भविष्य में उसके या उसके पति के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधिकारियों की होगी।

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