कटनी:कानून की रक्षा और आमजन को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर है, जब वही संरक्षक भक्षक बन जाएं तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से पुलिस महकमे को हिला देने वाला एक और गंभीर मामला सामने आया है। कुठला थाना क्षेत्र के चर्चित छग्गू कोल हत्याकांड में फंसे एक आरोपी को बचाने का झांसा देकर, करोड़ों रुपए कीमती बेशकीमती जमीन महज 18 लाख रुपए में कौड़ियों के भाव लिखवाने का संगीन आरोप कटनी सीएसपी और कुठला थाना प्रभारी पर लगा है। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत में परिवाद दाखिल किया गया है।
क्या है पूरा मामला?कटनी जिला जेल में बंद विचाराधीन बंदी रमेश लोधी, उनके बेटे आकाश लोधी और दामाद सतीश लोधी की तरफ से उनके वकील अवनीश तिवारी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन (तिवारी) की अदालत में यह परिवाद (यूएनसीआर 1589/2026) प्रस्तुत किया है। आरोप है कि कुठला थाना अंतर्गत कन्हवारा गांव में हुई छग्गू कोल की हत्या के मामले में पुलिस अधिकारियों ने अपने रसूख और पद का दुरुपयोग करते हुए इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।
एक करोड़ की जमीन का सौदा सिर्फ 18.20 लाख मेंعدالت میں پیش کیے गए दस्तावेजों के मुताबिक:सरकारी कीमत (गाइडलाइन): कन्हवारा स्थित खसरा नंबर 2618/1 (रकबा 2.15 हेक्टेयर) की कुल शासकीय गाइडलाइन वैल्यू 82.86 लाख रुपए है।बाजार मूल्य: इस जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य एक करोड़ सात लाख रुपए (1.07 करोड़) से अधिक आंका गया है।कौड़ियों के भाव रजिस्ट्री: आरोप है कि सीएसपी और कुठला थाना प्रभारी की कथित मिलीभगत और संरक्षण में यह बेशकीमती जमीन 15 अप्रैल 2026 को सिर्फ 18.20 लाख रुपए में एक खरीददार के नाम पर ट्रांसफर (रजिस्ट्री) करवा दी गई।
परिवार का दर्द है कि विक्रेता रमेश लोधी को इसके एवज में केवल 15 लाख रुपए का एक चेक थमाया गया, और बाकी बची रकम देने का जो वादा किया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ।बेटे को रिहा करने के नाम पर चला वसूली का खेलआरोप है कि गत 3 अप्रैल 2026 को रमेश लोधी के बेटे आकाश लोधी को हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि सीएसपी और थाना प्रभारी की तरफ से आकाश को इस झूठे या गंभीर मामले से बरी कराने और छोड़ने के एवज में 15 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की गई।दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते मजबूर पिता से सीएसपी के एक करीबी (जिसे परिवाद में कथित एजेंट बताया गया है) के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। हैरानी की बात यह है कि जमीन हाथ से निकल जाने के बाद भी उनका बेटा रिहा नहीं हुआ, बल्कि पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए 17 मई 2026 को खुद पिता रमेश लोधी और दामाद सतीश लोधी को भी गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद और बढ़ गया उत्पीड़नजब जमीन की पूरी रकम नहीं मिली और बेटे को भी नहीं छोड़ा गया, तो पीड़ित पिता ने पटवारी के पास इस बात की आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद 18 मई 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत (क्रमांक 38397487) दर्ज कराई गई।शिकायतकर्ता का आरोप है कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सजा उन्हें यह मिली कि पुलिस ने उन्हें अवैध हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया और जबरन जेल भेज दिया। हालांकि, इन संगीन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।अदालत ने मांगी जांच रिपोर्ट, राष्ट्रपति और डीजीपी तक पहुंचा मामलामामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने प्रकरण को पंजीबद्ध कर संबंधित थाने से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट तलब की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 9 सितंबर 2026 को तय की गई है।
दूसरी ओर, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अवनीश तिवारी ने देश के महामहिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को ईमेल के जरिए पत्र भेजा है। इसमें एक उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कमेटी गठित करने, संबंधित पुलिस अधिकारियों की कॉल डिटेल (CDR) निकलवाने, आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने तथा विवादित भूमि पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने की मांग की गई है।तीन दिन में दूसरा बड़ा विवाद, पुलिस की साख पर बड़े सवालकटनी पुलिस के लिए पिछले कुछ दिन बेहद दागदार रहे हैं। महज तीन दिन पहले ही एक ट्रक चालक ने इसी सीएसपी पर 30 हजार रुपए की अवैध वसूली करने और शिकायत वापस लेने का गंभीर दबाव बनाने के सनसनीखेज आरोप लगाए थे। हालांकि उस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएसपी के ड्राइवर सिपाही को तो निलंबित कर दिया और जांच बिठा दी, लेकिन अब हत्या के आरोपी को बचाने के नाम पर करोड़ों की जमीन हड़पने का यह नया मामला सामने आने के बाद पुलिस की साख पर चौतरफा सवाल खड़े हो गए हैं।
आम जनता के बीच चर्चा का विषय यह है कि यदि खाकी के पहरेदार ही इस तरह जमीनों के सौदों और अवैध वसूली में लिप्त पाए जाएंगे, तो आम आदमी न्याय के लिए आखिर किसकी शरण में जाएगा? बहरहाल, इन सभी गंभीर आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच और अदालत के फैसले के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी, लेकिन इस घटनाक्रम ने कटनी पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा कर दिया है।
