गांव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना: वंचित छात्राएं अब फिर कर सकेंगी आवेदन

भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों एवं प्रतिभा किरण योजना का लाभ लेने से चूक गई विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग ने स्कॉलरशिप पोर्टल को पुनः खोलने के आदेश दिए हैं।
शैक्षणिक
वर्ष 2025-26 में विभिन्न कारणों से योजनाओं का लाभ नहीं ले सकने वाली योग्य छात्राएं अब फिर से आवेदन कर सकेंगी। मंत्री परमार ने विभाग को निर्देशित किया था कि कोई भी पात्र छात्रा योजना से वंचित न रहे और तेजी से कार्रवाई की जाए।
पोर्टल
फिर से शुरू
उच्च
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार गांव की बेटी योजना और प्रतिभा किरण योजना के लिए स्कॉलरशिप पोर्टल पुनः सक्रिय किया गया है। अब नई और नवीनीकरण दोनों श्रेणी की छात्राएं ऑनलाइन तरीके से आवेदन दे सकेंगी।
आवेदन
की अंतिम तिथि
छात्राओं
के लिए स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन करने की आखिरी तिथि 15 मई 2026 तय की गई है। विभाग ने योग्य छात्राओं से निवेदन किया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपने आवेदन प्रस्तुत करें।
योजनाओं
का उद्देश्य
इन
योजनाओं का प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
सरकार
का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक छात्राएं उच्च शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बनें और शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी को बढ़ावा मिले।

10th-12th Result MP Board 2026: टॉप 10 में इस जिले के 5 छात्र, मेरिट लिस्ट में बनाया दबदबा

10th-12th Result MP Board 2026: इस जिले के 5 छात्रों ने टॉप 10 में जगह बनाई, मेरिट लिस्ट में दबदबा बनाते हुए MP Board Result 2026: मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा के परिणाम बुधवार को दोपहर में घोषित कर दिए गए। माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश (MPBSE) ने आज 10वीं और 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम जारी किया। कटनी जिले ने यहाँ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कक्षा 10 का परीक्षा परिणाम पिछले साल की तुलना में में और भी अच्छा रहा है। हालाँकि, कक्षा 12 के परीक्षा परिणाम में थोड़ी गिरावट आई है। जानकारी के अनुसार, कक्षा 10 में 84.42 प्रतिशत छात्रों ने सफलता हासिल की है जबकि 2025 में यह आंकड़ा 81.13% था। कक्षा 10 में राज्य में जिले ने 11वां स्थान प्राप्त किया है। 12वीं के परिणाम में थोड़ी कमी देखी गई है।

इसी
प्रकार कक्षा 12 में 81.72 प्रतिशत बच्चे सफल हुए हैं, जो राज्य में 27वां स्थान है जबकि 2025 के परिणाम में जिले में कक्षा 12 में 82.39% छात्र उत्तीर्ण हुए थे। इसी तरह राज्य की मेरिट लिस्ट में कक्षा 12 में एक छात्रा का नाम दर्ज किया गया है। सव्यांसांची पांडे, जो पिता प्रवीण पांडे के पुत्र हैं, ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल स्लीमनाबाद से 500 में से 485 अंक प्राप्त कर गणित संकाय में राज्य में आठवां स्थान हासिल किया है। कक्षा 10 में पांच बच्चे प्रदेश में टॉपर बने हैं।

इसी
प्रकार कक्षा 10 में पांच छात्रों ने राज्य की मेरिट लिस्ट में स्थान पाया है। जानकारी के अनुसार, आदित्य तिवारी, पिता मनोज, किड्स वे अकादमी खन्ना बंजारी से 500 में से 493 अंक प्राप्त कर सातवाँ स्थान प्राप्त किया, और प्रतिभा पिता सोनेलाल साहू, मॉडल स्कूल बड़वारा से भी 500 में से 493 अंक प्राप्त कर राज्य में सातवां स्थान हासिल किया है।

इसी
प्रकार, श्वेता पांडे, पिता उमाशंकर पांडे, नोबल हार्ट पब्लिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से 500 में से 492 अंक लेकर पहले स्थान और राज्य में आठवें रैंक पर, शिवानी पाठक, पिता विनोद पाठक, हाई स्कूल देवरा खुर्द से 500 में से 490 अंक प्राप्त कर पहले और दसवें स्थान पर रही हैं। तनवी गुप्ता, पिता सत्यनारायण, ग्रेस मिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल स्लीमनाबाद में 500 में से 490 अंक के साथ पहले और दसवें स्थान पर पहुँची हैं।

यह टॉप 10 छात्रों की लिस्ट (10वीं)

प्रतिभा सिंह सोलंकी (प्रथम) – 499 अंक
अक्षरा घोडेश्वर (दि्तीय)- 498 अंक
अभय गुप्ता (दि्तीय)- 498 अंक
योगेंद्र सिंह परमार (तृतीय) – 497 अंक
अनन्या वर्मा (तृतीय) -497 अंक
शिवम बोपचे (तृतीय)-497 अंक
अर्जुन सिंह राजपूत (तृतीय)-497 अंक
अवनीश कुमार नाई (तृतीय)-497 अंक
हिमांशी धाकड़ (तृतीय) -497 अंक
निकिता फरकासे (तृतीय)-497 अंक

सव्य साची पांडेय

तन्वी गुप्ता

आज घोषित होंगे एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणाम, सुबह 11 बजे जारी होगा रिजल्ट, पढ़े खबर कैसे देख सकेंगे रिजल्ट

आज घोषित होंगे एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणाम, सुबह 11 बजे जारी होगा रिजल्ट, पढ़े खबर कैसे देख सकेंगे रिजल्ट

कटनी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को समत्व भवन, भोपाल से 2026 की एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं, 12वीं और पूर्व प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा (डी.पी.एस.ई.) की मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषणा करेंगे। यह परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पेश किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने छात्रों की सहूलियत के लिए विभिन्न वेबसाइटों पर परिणाम देखने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त, छात्र-छात्राएं अपने मोबाइल ऐप और डिजिलॉकर के जरिए अपने परीक्षा परिणाम की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
विद्यार्थी
इन वेबसाइटों पर देख सकेंगे परीक्षा परिणाम
-https://mpbse.mponline.gov.in
-https://www.digilocker.gov.in/web/dashboard/issuers
-https://www.jagranjosh.com
-https://education.indianexpress.com
-https://www.fastresult.in
-https://www.hindustantimes.com/education www.livehindustan.com
-https://toi.in/mpbseresult_class12 https://toi.in/mpbseresult class10

विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती में पशुधन प्रबंधन एवं जैविक खाद निर्माण का तकनीकी प्रशिक्षण

कटनी – वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में जैविक कृषि के जानकार रामसुख दुबे द्वारा विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कम लागत की विधियों में जीरो बजट फार्मिंग के बारे में बताया गया, जिसमें पशु प्रबंधन एक महत्वपूर्ण तरीका है। इसमें पशुओं को केवल दूध उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि कृषि प्रणाली में एक आवश्यक भाग के रूप में देखा जाता है। इस प्रणाली में फसलें और पशु एक-दूसरे के पूरक होते हैं, जिससे खेत एक स्वयं-निर्भर और स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित होते हैं।

प्रशिक्षण
के दौरान पशुधन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों के भीतर पशुओं के प्राकृतिक जीवन, उनके प्राकृतिक आहार, और स्वस्थ तथा रोगमुक्त पशुधन के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही जैविक कृषि में पशुधन के महत्व पर चर्चा करते हुए जैविक खाद के स्रोत, गोबर की खाद और गोमूत्र, ऊर्जा और श्रम का साधन, हल चलाना, परिवहन और आत्मनिर्भरता के आधार के साथ-साथ पशुधन प्रबंधन के फायदों जैसे लागत में कमी, आय का बढ़ना, वातावरण का संरक्षण और मिट्टी की सेहत के बारे में बताया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों को जैविक खेती में अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण और शहरी खाद निर्माण, पशु अपशिष्ट से खाद तैयार करना और खली के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

जर्जर भवन, शौचालय एवं बाउंड्रीवाल को करें तुरंत डिस्मेंटल कटनी

कटनी (09 अप्रैल) – निर्माणाधीन सभी स्कूल भवनों एवं शौचालय को समय-सीमा में पूर्ण करें। जर्जर भवन शौचालय एवं बाउंड्रीवाल को तुरंत डिस्मेंटल करें। कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी ने यह निर्देश गुरूवार को आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में दिये। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर भी मौजूद रहीं। जर्जर इमारत, शौचालय और बाउंड्रीवाल को तत्काल ध्वस्त करने का आदेश – कलेक्टर श्री तिवारी
प्राचार्यों
को अपार आईडी और आधार अपडेट करने के लिए निर्देशित किया गया
कलेक्टर
श्री तिवारी की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया
बैठक में डाइट कटनी ने जिले की शैक्षणिक स्थिति पर एक प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण दिया। इस प्रस्तुतिकरण में शैक्षणिक चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। कलेक्टर श्री तिवारी के निर्देशानुसार कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए ई-शिक्षा सामग्री क्यूआर कोड के रूप में सभी स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों के लिए जारी की गई। सभी विकास खंड शिक्षा अधिकारियों और बीआरसी को ई-मटेरियल प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराने तथा उसके उपयोग के लिए निर्देशित किया गया। शिक्षकों के बिना विद्यालय और स्मार्ट बोर्ड वाले विद्यालय विशेष रूप से इसका लाभ उठाएंगे और शिक्षक प्रभावी पाठ्यक्रम विकसित कर सकेंगे।
बैठक
के दौरान जिले में माध्यमिक स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए डाइट कटनी और पीपल समूह द्वारा विकसित प्रेरणा बुकलेट का विमोचन भी किया गया। सरकारी स्कूलों में कक्षा 1, कक्षा 6 और कक्षा 9 में लक्ष्य के अनुसार प्रवेश, शत-प्रतिशत कक्षोन्नति, एमबीयू पेंडेंसी को स्कूलों के आधार पर निकालना, आधार केंपों या निकटतम केंद्र से अपडेट करने और नए आधार के लिए बच्चों की उपस्थिति अप्रैल के अंत तक सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। महीने में 150 प्रतिशत से अधिक मेंटरिंग, स्कूलों और आधार केंपों में अधिकतम बच्चों की उपस्थिति के निर्देश दिए गए। समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती कौर ने सभी प्राचार्यों को अपार आईडी और आधार अपडेट को तुरंत सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। इस समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेश अग्रहरी, डीपीसी प्रेम नारायण तिवारी, डाइट प्राचार्य एमपी डुंगडुंग, अभय जैन एडीपीसी, वरिष्ठ व्याख्याता राजेन्द्र असाटी, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी और बीआरसीसी, सभी संकुल प्राचार्य, सहायक यंत्री और उपयंत्री तथा जिला प्रोग्रामर सुमंत ताम्रकार उपस्थित रहे।

CBSE का बड़ा फैसला

अब स्कूलों में खत्म होगी अंग्रेजी की अनिवार्यता,थ्री-लैंग्वेज’ फॉर्मूले में पढ़नी होंगी 2 भारतीय भाषाएं
नई
दिल्ली/ देश के शिक्षा तंत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत भाषाओं के चयन के नियमों में बड़ा संशोधन किया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब स्कूलों में अंग्रेजी का अध्ययन आवश्यक नहीं रहेगा। इसकी जगह, विद्यार्थियों को ‘तीन भाषा फॉर्मूला’ के अनुसार कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
​सत्र
2026-27 से लागू होगी व्यवस्था CBSE द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह नई प्रक्रिया कक्षा 6 से शिक्षा सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी। इसे वर्ष 2034 तक कक्षा 10 में पूरी तरह से लागू करने की योजना है। इस परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओं को महत्व देना और विद्यार्थियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
​क्या
है नया ‘भाषा फॉर्मूला’ (R1, R2, R3)?
बोर्ड
ने भाषाओं को तीन श्रेणियों में बांट दिया है: R1 (प्राथमिक भाषा): वह भाषा जो छात्र की मातृभाषा या स्थानीय भाषा है।
R2 (दूसरी भाषा): अनिवार्य रूप से कोई एक भारतीय भाषा (जैसे हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि)। R3 (तीसरी भाषा): इसमें विद्यार्थी अंग्रेजी या किसी अन्य विदेशी भाषा (जर्मन, फ्रेंच आदि) का चयन कर सकते हैं, लेकिन यह अब वैकल्पिक होगी।
​संस्कृत
और क्षेत्रीय भाषाओं को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों
का मानना है कि इस निर्णय के कारण संस्कृत सबसे प्रमुख विकल्प बनकर उभरेगी, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा स्कूलों में इसके शिक्षक और सामग्री पहले से ही मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, पंजाबी, बंगाली, तमिल और तेलुगु जैसी स्थानीय भाषाओं के लिए भी स्कूलों में नए अवसर उत्पन्न होंगे।
स्कूलों
के सामने संसाधनों की चुनौती
इस
नीति को लागू करना विद्यालयों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, जहां बहुभाषी छात्र होते हैं, दूसरे भारतीय भाषा का चुनाव करना और योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करना एक कठिन कार्य साबित हो सकता है। हालांकि, शिक्षाविदों का मानना है कि अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त होने से छात्रों पर मानसिक तनाव कम होगा और वे अपनी इच्छानुसार भाषाएं सीख सकेंगे।

बड़वारा में मनाई गई सम्राट अशोक जयंती

सम्राट अशोक की जयंती का समारोह बड़वारा में बेहद धूमधाम से मनाया गया। इस आयोजन के दौरान लोगों को प्रसाद दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सम्राट अशोक जयंती, जिसे अशोकाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, मौर्य साम्राज्य के महान शासक सम्राट अशोक को समर्पित एक राष्ट्रीय उत्सव माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष चैत्र शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाता है। यह तारीख उनके द्वारा कलिंग युद्ध के बाद अहिंसा, शांति, करुणा और ‘धम्म’ के मार्ग को अपनाने की स्मृति को ताजा करती है। सम्राट अशोक जयंती महान शासक के प्रति श्रद्धांजलि और उनके द्वारा अपनाई गई करुणा-प्रेम की नीति का उत्सव है।



कहा
जाता है कि सम्राट अशोक बिंदुसार के बेटे थे। उन्होंने भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश तक का एक विशाल और अद्वितीय साम्राज्य स्थापित किया। 261 ईसा पूर्व में कलिंग युद्ध के बाद, नरसंहार को देखकर अशोक ने हिंसा छोड़ने का निर्णय लिया और बौद्ध धर्म को अपनाते हुए ‘धम्म’ के सिद्धांत का पालन किया, जिसमें उन्होंने अपनी प्रजा को अपना परिवार माना। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन शांति, समानता और भाईचारे के संदेशों को स्मरण करने और समाज में उन मूल्यों को फैलाने का प्रेरणादायक अवसर भी है। आयोजन के दौरान गोपीचंद मौर्य, जय सूर्यवंशी, काशी कुशवाहा, आनंद कुमार, अभिषेक मौर्य, आदर्श कुमार मौर्य, अरुल मौर्य, बलवंत मौर्य, मलखान सिंह कुशवाहा, विजय मौर्य, विकाश मौर्य, श्रीपत मौर्य सहित कई लोग उपस्थित रहे।

नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में नक़ल करने वाले छात्र हुए pass

प्रभारी प्राचार्य की संलिप्तता से बहोरीबंद उत्कृष्ट विद्यालय में छात्रों को नकल कराने का मामला, शिक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई है।
कटनी
(ईएमएस) शासकीय नवोदय आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में नकल की घटना काफी समय से सुर्खियों में है। परीक्षा के परिणाम आने के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बहोरीबंद में केंद्रीय नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दौरान, प्रभारी प्राचार्य महेन्द्र राय ने परीक्षा ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों के साथ मिलकर कुछ छात्रों को नकल करने की अनुमति दी थी। इसके बाद एक सामान्य अभिभावक ने 19 दिसंबर 2025 को अपनी पहचान गुप्त रखते हुए भारत के प्रधानमंत्री, नवोदय विद्यालय समिति और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भेजी थी।19 जनवरी 2026 को नवोदय विद्यालय समिति भोपाल ने नकल के गंभीर मामलों की जांच के लिए नवोदय विद्यालय बड़वारा को निर्देश दिए थे। 22 जनवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कटनी ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी मनोज गर्ग और बीआरसी प्रशांत मिश्रा को नोटिस भेजा, जिसमें कहा गया कि नवोदय विद्यालय जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में नकल की घटना गंभीर है और तीन दिन के भीतर विभाग को जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था।
परिणाम
के बाद शिक्षक के करीबी सभी छात्र उत्तीर्ण हुए–
17 मार्च 2026 को नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया। महावीर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बहोरीबंद में जिन छात्रों को नकल कराई गई, उनमें से एक छात्रा के अलावा सभी उत्तीर्ण हो गए हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दौरान कुछ शिक्षकों के परिवार या रिश्तेदारों को नकल कराने का लाभ मिला था, और जिन छात्रों के नाम उजागर हुए हैं, वह नवोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए योग्य बताये जा रहे हैं।
आम
अभिभावक ने शिकायत दर्ज कर विद्यालय की पोल खोली–

महावीर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बहोरीबंद में आयोजित परीक्षा के दौरान जिन छात्रों को अनुचित लाभ देकर नक़ल कराई गई थी, उनमें छात्रा देविका सैनी, हेमांग रजक,(शिक्षक ललित रजक का भतीजा) पारुल नायक, (शिक्षक प्रदीप नायक की पुत्री), आराध्या नायक(शिक्षक अरविन्द नायक की पुत्री),संतीक्षा नायक(शिक्षक उमेश नायक की पुत्री),पारुल नायक (शिक्षक प्रदीप नायक की पुत्री) सहित एक अन्य छात्र की शिकायत नामजद की गई थी। यह भी आरोप थे कि उक्त छात्रों को परीक्षा के समय परीक्षा इयूटी में लगे कुछ शिक्षकों ललित रजक, प्रदीप नायक एवं दो अन्य शिक्षकों द्वारा प्राचार्य की मिलीभगत से उक्त गंभीर एवं बेहद निंदनीय कार्यों को अंजाम दिया गया जो परिणाम आने के बाद परीक्षा ड्यूटी के दौरान शिक्षकों पर लगाये गए आरोप सच साबित हो गए है।

आम
अभिभावकों में आक्रोश उत्पन्न हुआ–
महावीर
उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक महेंद्र राय के प्रति अभिभावकों का गुस्सा परिणामों के प्रकाश में बढ़ गया है। अभिभावकों का आरोप है कि प्रधान ने अपने पद की गरिमा को धूमिल किया है, जो नैतिक शिक्षा के विपरीत गंभीर गलत कार्यों में शामिल है। शिक्षण में धांधली, अनैतिक व्यवहार और पेशेवर लापरवाही से शिक्षा प्रणाली के खिलाफ गंभीर अपराध हुआ है।

इनका कहना है- मनोज गर्ग- बीईओ,बहोरीबंद। नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में नक़ल कराने के मामले की जाँच नवोदय विद्यालय समिति ने स्वयं किया है।

15 करोड़ की लागत से बन रही क्रिटिकल केयर यूनिट अब तक शुरू नहीं, मरीजों को नहीं मिल रही बेहतर सुविधा

कटनी. दो वर्ष से चल रहा निर्माण, अब भी 2-3 माह का इंतजार, लापरवाही और धीमी प्रगति पर उठ रहे सवाल
कटनी.
जिले के अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं से सजी क्रिटिकल केयर यूनिट का कार्य पिछले दो वर्षों से चल रहा है, लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस यूनिट से क्षेत्र के मरीजों को बेहतर आपात चिकित्सा सेवा मिलने की आशा थी, जो अभी पूरी नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यूनिट के चालू होने में अगले 2 से 3 महीने लग सकते हैं।
इस
क्रिटिकल केयर यूनिट में आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। साथ ही, यहाँ आइसोलेशन वार्ड और आर्थो (हड्डी रोग) वार्ड भी तैयार किए जा रहे हैं। भवन के पहले तल पर 26 बेड की क्षमता वाला वार्ड बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे तल पर दो आधुनिक ऑपरेशन थियेटर और 16 बेड का आईसीयू स्थापित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, डायलिसिस हेतु 2 बेड की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी। एक अन्य तल पर 16 बेड का एक और आईसीयू भी बनाने का प्रस्ताव है, जिससे गंभीर मरीजों की देखभाल की क्षमता में सुधार होगा।

सुविधाएं
हो रहीं प्रभावित
हालांकि,
निर्माण की धीमी गति के कारण मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में गंभीर मरीजों को सीमित संसाधनों में उपचारित किया जा रहा है, जिसके कारण कई बार उन्हें अन्य जिलों के अस्पतालों में रेफर होना पड़ता है। स्थानीय जनता और मरीजों के परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य की नियमित और प्रभावी निगरानी नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। यदि समय पर कार्य पूरा होता, तो जिले को अब तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल चुकी होती। अब देखना होगा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस महत्वपूर्ण परियोजना को कितनी जल्दी पूरा कर पाते हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

बड़वारा के 15 स्कूलों में 75 लाख का खेल! नियमों को ताक पर रखकर भोपाल के ठेकेदार को सौंपा मरम्मत का काम

बिना किसी टेंडर या कोटेशन के दिए गए कार्य, अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद भुगतान की योजना, बीइओ कार्यालय द्वारा चल रही प्रक्रिया और जिम्मेदार लोगों की चुप्पी पर उठी चिंताएँ। बड़वारा विकासखंड में स्थित 15 सरकारी विद्यालयों में निर्माण और सुधार कार्यों से संबंधित गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। हाल के वर्षों में बने विद्यालय भवन, जिनकी आयु 20 वर्ष से अधिक है, के लिए हर स्कूल को 5 लाख रुपये की राशि मरम्मत, पेंटिंग और शेड निर्माण हेतु मंजूर की गई है, लेकिन इस राशि के इस्तेमाल में नियमों का उलंघन हो रहा है। फिर भी, मरम्मत के लिए धन मिलने से विद्यालय प्रशासन उत्साहित है कि इससे विद्यार्थियों की सुविधाएँ बढ़ेंगी।

सूत्रों
से मिली जानकारी के अनुसार, बिना किसी टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया के, भोपाल के एक ठेकेदार को एक जनप्रतिनिधि के दबाव में सीधे काम आवंटित किया गया। ठेकेदार ने एक दर्जन से अधिक विद्यालयों में कार्य की शुरुआत तो की, लेकिन अधिकांश स्थानों पर कार्य अधूरा ही रह गया है। इसके बावजूद, मार्च में बजट को शेष रखने के नाम पर बिना पूरे कार्य के ही भुगतान करने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि प्राचार्यों से उपयोगिता और पूर्णता प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि कार्य स्थल पर वास्तव में काम अधूरा है। पूरा कार्य बड़वारा बीईओ कार्यालय के माध्यम से संचालित हो रहा है, जहां धन सीधे भोपाल मुख्यालय में पहुंचता है और वहीं से मनमाने तरीके से खर्च किया जा रहा है। इस सभी घटनाक्रम में जिला मुख्यालय स्तर पर कोई निगरानी नहीं की जा रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

इन स्कूलों के लिए आई है राशि

जानकारी के अनुसार बड़वारा विकासखंड के 15 स्कूलों के राशि आई है इनमें गुणाकलां, बिजौरी, निगहरा, राहनियां, खरहटा, पठरा, भजिया, बसाड़ी, गणेशपुर, भदौरा नंबर एक, लुहरवारा, विलायतकला, ठुठिया सलैया, नन्हवारा सेझा, मझगवां स्कूल शामिल है।

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