कटनी – वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय बहोरीबंद में जैविक कृषि के जानकार रामसुख दुबे द्वारा विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को कम लागत की विधियों में जीरो बजट फार्मिंग के बारे में बताया गया, जिसमें पशु प्रबंधन एक महत्वपूर्ण तरीका है। इसमें पशुओं को केवल दूध उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि कृषि प्रणाली में एक आवश्यक भाग के रूप में देखा जाता है। इस प्रणाली में फसलें और पशु एक-दूसरे के पूरक होते हैं, जिससे खेत एक स्वयं-निर्भर और स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित होते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान पशुधन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों के भीतर पशुओं के प्राकृतिक जीवन, उनके प्राकृतिक आहार, और स्वस्थ तथा रोगमुक्त पशुधन के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही जैविक कृषि में पशुधन के महत्व पर चर्चा करते हुए जैविक खाद के स्रोत, गोबर की खाद और गोमूत्र, ऊर्जा और श्रम का साधन, हल चलाना, परिवहन और आत्मनिर्भरता के आधार के साथ-साथ पशुधन प्रबंधन के फायदों जैसे लागत में कमी, आय का बढ़ना, वातावरण का संरक्षण और मिट्टी की सेहत के बारे में बताया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों को जैविक खेती में अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण और शहरी खाद निर्माण, पशु अपशिष्ट से खाद तैयार करना और खली के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
