बिना किसी टेंडर या कोटेशन के दिए गए कार्य, अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद भुगतान की योजना, बीइओ कार्यालय द्वारा चल रही प्रक्रिया और जिम्मेदार लोगों की चुप्पी पर उठी चिंताएँ। बड़वारा विकासखंड में स्थित 15 सरकारी विद्यालयों में निर्माण और सुधार कार्यों से संबंधित गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। हाल के वर्षों में बने विद्यालय भवन, जिनकी आयु 20 वर्ष से अधिक है, के लिए हर स्कूल को 5 लाख रुपये की राशि मरम्मत, पेंटिंग और शेड निर्माण हेतु मंजूर की गई है, लेकिन इस राशि के इस्तेमाल में नियमों का उलंघन हो रहा है। फिर भी, मरम्मत के लिए धन मिलने से विद्यालय प्रशासन उत्साहित है कि इससे विद्यार्थियों की सुविधाएँ बढ़ेंगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिना किसी टेंडर या कोटेशन प्रक्रिया के, भोपाल के एक ठेकेदार को एक जनप्रतिनिधि के दबाव में सीधे काम आवंटित किया गया। ठेकेदार ने एक दर्जन से अधिक विद्यालयों में कार्य की शुरुआत तो की, लेकिन अधिकांश स्थानों पर कार्य अधूरा ही रह गया है। इसके बावजूद, मार्च में बजट को शेष रखने के नाम पर बिना पूरे कार्य के ही भुगतान करने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि प्राचार्यों से उपयोगिता और पूर्णता प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि कार्य स्थल पर वास्तव में काम अधूरा है। पूरा कार्य बड़वारा बीईओ कार्यालय के माध्यम से संचालित हो रहा है, जहां धन सीधे भोपाल मुख्यालय में पहुंचता है और वहीं से मनमाने तरीके से खर्च किया जा रहा है। इस सभी घटनाक्रम में जिला मुख्यालय स्तर पर कोई निगरानी नहीं की जा रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
इन स्कूलों के लिए आई है राशि
जानकारी के अनुसार बड़वारा विकासखंड के 15 स्कूलों के राशि आई है इनमें गुणाकलां, बिजौरी, निगहरा, राहनियां, खरहटा, पठरा, भजिया, बसाड़ी, गणेशपुर, भदौरा नंबर एक, लुहरवारा, विलायतकला, ठुठिया सलैया, नन्हवारा सेझा, मझगवां स्कूल शामिल है।
