कटनी अमीरगंज स्थित नगर निगम की गौशाला एक बार फिर गंभीर विवादों और प्रशासनिक लापरवाही के घेरे में आ गई है। जिस गौशाला में कभी व्यवस्थाओं का ढोल पीटा जाता था, आज वहां से दिल नहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। गौशाला परिसर के अंदर मृत मवेशियों के शव खुले में पड़े मिले, वहीं पीछे की ओर मृत बछड़ों के शवों को कौवों द्वारा नोचे जाने की दर्दनाक स्थिति देखी गई। इस घटना ने गौशाला में बेसहारा पशुओं के रख-रखाव, भोजन और निगरानी व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाजसेवियों ने लिया जायजा, व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग
मामले की जानकारी मिलते ही समाजसेवियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर गौशाला का जायजा लिया। इस दौरान गौशाला के भीतर बदहाली का आलम साफ नजर आया। उन्होंने मृत मवेशियों के शवों का तत्काल सम्मानपूर्वक निस्तारण कराने के साथ-साथ जीवित पशुओं के लिए पर्याप्त चारा, पीने योग्य पानी, नियमित उपचार और परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने की कड़ा विरोध जताते हुए मांग की।
ड्यूटी कर्मचारियों और निगरानी तंत्र की खुली पोल
इस पूरी घटना ने नगर निगम के प्रशासनिक दावों और निगरानी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि गौशाला में कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी लगाई जा रही थी, तो मृत मवेशियों के शव कई दिनों तक समय पर क्यों नहीं हटाए गए?
- क्या ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने मवेशियों की मौत की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं दी थी?
- या फिर सूचना मिलने के बावजूद अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और कार्रवाई में लापरवाही बरती?
इन सभी सवालों के जवाब अब एक निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
स्थानीय निवासियों ने की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासियों और गो-सेवकों ने प्रशासन से मांग की है कि एक विशेष टीम भेजकर गौशाला का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। वहां मौजूद कुल मवेशियों की संख्या, उनकी मौतों के वास्तविक कारण, चारे-पानी का बजट, चिकित्सीय सुविधाओं और कर्मचारियों की उपस्थिति की गहनता से जांच की जानी चाहिए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही पाई जाती है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
गौशाला का मूल उद्देश्य बेसहारा और बीमार मवेशियों को सुरक्षित आश्रय और उपचार देना है, लेकिन मृत पशुओं के शवों का इस तरह लावारिस पड़े रहना व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन सिर्फ कागजी खानापूर्ति और सफाई कराकर मामले को दबाता है या फिर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई कर व्यवस्था में सुधार लाता है।












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