मध्य प्रदेश के छतरपुर में आपातकालीन सेवा के रूप में जानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक सायरन बजाते हुए एम्बुलेंस में किसी मरीज की बजाय एक कॉलेज की छात्रा पाई गई। रिपोर्टों के अनुसार, एम्बुलेंस का चालक सरकारी वाहन का उपयोग निजी काम के लिए कर रहा था और छात्रा को ले जा रहा था, जिससे प्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। कॉलेज की लड़की के साथ पकड़े गए एम्बुलेंस चालक
यह घटना मंगलवार को शाम के समय हुई। एक स्थानीय युवक ने एम्बुलेंस के अंदर छात्रा को देखकर संदेह किया। इसके बाद, उसने अपनी मोटरसाइकिल से एम्बुलेंस का पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे रोक लिया। जब चालक भगत सिंह यादव से सवाल पूछे गए, तो वह चिंतित हो गया और छात्रा को अपनी बहन बताने लगा, लेकिन वह उसका नाम तक नहीं बता सका।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
इस घटना का एक वीडियो मौके पर ही रिकॉर्ड किया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। आम लोगों का कहना है कि जब गंभीर रूप से बीमार मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलती, तब इस तरह के दुरुपयोग को देखना अत्यंत चिंताजनक है। यह न केवल सेवा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि आपातकालीन व्यवस्था की निगरानी पर भी गहरी चिंताएं व्यक्त करता है। एम्बुलेंस चालक को नौकरी से निकाल दिया गया
इसी प्रकार, जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जननी बाहन यानी 108 एम्बुलेंस के चालक को तुरंत नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ ही, वाहन के विक्रेता को भी उसके वाहन समेत हमेशा के लिए बर्खास्त कर दिया गया है।
