कटनी। इंद्रानगर विवाह समारोह को लेकर अब मामला बेहद गंभीर हो गया है। शादी के आयोजन के दौरान बारातियों, महिलाओं और बच्चों पर कथित रूप से लाठीचार्ज और बर्बरता के कारण पूरे जिले में नाराजगी फैल गई है। पीड़ितों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाते हुए 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी कर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस निर्दिष्ट समय सीमा में दोषी पुलिसकर्मियों और सिविल ड्रेस में शामिल हमलावरों पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, तो कटनी में एक बड़ा जन आंदोलन होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। यह आरोप लगाया गया है कि इंद्रानगर में चल रहे विवाह समारोह में पुलिस ने बिना किसी उचित कारण के छापा मारा और बारातियों पर लाठियाँ चलाईं। इस दौरान पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को भी नहीं छोड़ा गया। कई लोग घायल हुए और कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिस परिवार में खुशी का माहौल था, वहां चीखें उठने लगीं। जिले भर के लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि क्या विवाह समारोह भी अब एक अपराध बन गया है?

SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग
गुस्साए नागरिकों ने इस घटना में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत SC/ST एक्ट, मारपीट और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा, सिविल ड्रेस में शामिल हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का आग्रह भी किया गया है।
27 अप्रैल को होगा निर्णायक प्रदर्शन
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि 26 अप्रैल तक न्याय नहीं मिलता है, तो 27 अप्रैल को दोपहर 3 बजे जिला मुख्यालय पर कड़ा धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में सामाजिक संगठनों और आम जनता की बड़ी संख्या में भागीदारी का कार्यक्रम तैयार किया गया है।
पुलिस प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस घटना के पश्चात अब पुलिस की भूमिका पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गए हैं। क्या दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है? क्या सिर्फ कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन से हटाकर इस मामले को ठंडा करने की कोशिश की जा रही है? जनता जवाब चाहती है।
अब प्रशासन पर है जिम्मेदारी
इंद्रानगर मामला अब प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। या तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, या फिर कटनी में लोग सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा प्रकट करेंगे।
