बड़वारा में करोड़ों रुपए की बेस कीमती शासकीय भूमि पर पूंजीपतियों का कब्जा

कटनी जिले के बड़वारा में सरकारी भूमि के पट्टों की गैर कानूनी लेन-देन का एक बड़ा प्रकरण चर्चा में आया है। शुक्रवार को जय सूर्यवंशी ने गांव के निवासियों के साथ मिलकर तहसीलदार ऋषि गौतम को एक शिकायत पत्र प्रस्तुत किया।

गांववासियों का कहना है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने धोखाधड़ी के जरिए खुद को गरीब बताकर सरकारी भूखंड हासिल कर लिए हैं और अब इसे बड़ी कंपनियों को ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। शिकायत में उल्लेखित किया गया है कि बड़वारा की सरकारी भूमि पर व्यापक धांधली की जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कई प्रतिष्ठित लोगों ने बेघर और भूमिहीन होने का दिखावा करते हुए नवोदय विद्यालय के सामने तथा उमंग नगर में सरकारी पट्टे प्राप्त किए। अब ये लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए इन संपत्तियों का लेन-देन पूंजीपतियों के साथ कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुचित है। 

जय सूर्यवंशी और गांववासी अनुरोध कर रहे हैं कि प्रशासन एक टीम बनाकर इन क्षेत्रों की जांच करे। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं-

पट्टा गरीबों के जीवन यापन के लिए दिया जाता है। पर पूंजीपतियों ने पैसे का लालच देकर गरीबों से पट्टा की भूमि खरीद लिया। और पट्टे की भूमि पर लाखों, करोड़ों रुपए का मकान बना लिया ।

कुछ ऐसे मामले हैं जहां पर पूंजीपति खुद को गरीब बता कर भूमि के पट्टा अपने नाम करा लिए।
कुछ मामलों में पूंजीपतियों ने गरीबों को पैसे देकर गरीबों के नाम से पट्टे ले लिए।
ग्रामीणों के अनुसार अधिकारियों की मिली भगत से अपात्रों को पात्र बता कर भूमि के पट्टे दे दिए गए।
जिनको पट्टा दिया गया है वह सभी अपात्र है। सभी की संपत्ति की जांच की जाए जिनको पट्टा दिया गया है वह पहले ही भूमि स्वामी है सभी का पक्का मकान बड़वारा में पहले से बना हुआ है। और अधिकतर लोग बड़वारा के निवासी नहीं है। जिनको पट्टा दिया गया है वह सभी लोग लाखों करोड़ों की भूमि के मालिक है।
कुछ मामले तो ऐसे हैं कि सरकारी कर्मचारी ही सरकार की सैलरी लेकर सरकार को गुमराह कर सरकारीभूमि का पट्टा अपने नाम करा लिया है।

जो लोग झूठ बोलकर पट्टे प्राप्त कर चुके हैं, उनके पट्टे रद्द किए जाएं।

केवल उन गरीबों को पट्टे दिए जाएं जिनके पास वास्तव में रहने के लिए घर या भूमि नहीं है।

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