बड़वारा जनपद: 5 वर्षों से भुगतान के इंतजार में, संकट में स्व-सहायता समूह की नर्सरी
बड़वारा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी दावे जनपद पंचायत बड़वारा जिला कटनी में बेकार साबित हो रहे हैं। यहां ‘दुर्गा स्व-सहायता समूह’ की सदस्याएं पिछले पांच साल से अपनी मेहनत का भुगतान पाने के लिए सरकारी दफ्तरों में लगातार घूम रही हैं, चक्कर लगा रही है। लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं आया है।
अधिकारियों की लापहरवाही
स्व-सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत के ऊपर भरी बड़ा जनपद पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही।
साल 2020 में उत्साहपूर्वक दुर्गा स्व-सहायता समूह को नर्सरी के संचालन का कार्य सौंपा गया था। महिलाओं ने पूरी मेहनत से पौधों की तैयारी की। इन पौधों का वितरण मनरेगा के माध्यम से जिले के अलग-अलग पंचायतों में किया गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद विभाग ने अपने किए गए वादे को भुला दिया। और अपनी बातो से मुकर गए।
भुगतान
अस्वीकृत भुगतान: 5 साल गुजर जाने के बावजूद पौधों की बिक्री और मेहनत की रकम समूह को नहीं मिली। जो लगत लगाई गई वह भी बसूला नहीं हुई। समूह की महिलाएं तो बर्बाद हो जाएगी।
नर्सरी हुई बंद:
आर्थिक समस्याओं के चलते एक सफल नर्सरी अब वीरान हो चुकी है। पेड़ पूरी तरह से सुख गए ।
सीएम हेल्पलाइन द्वारा सहायता: महिलाओं ने निराश होकर 181 (शिकायत संख्या 37345594) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है,पर अधिकारियों की मिली भगत होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हुई। न ही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को कोई जब्बा मिला।
अधिकारियों पर मनमानी और पक्षपात का आरोप
समूह की महिलाओं का सीधा आरोप बड़वारा में कार्यरत प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह बघेल पर है। उनका कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। और हमेशा कार्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर किया। कुछ खास समूहों को लाभ दिया गया।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं का कहना
“हमने इस नर्सरी को अपने सपनों के साथ शुरू किया था ताकि हम आत्मनिर्भर बन सकें, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही ने हमारे सपने को चूर-चूर कर दिया। आज हम पूरी तरह से टूट चुके हैं। अपना समय और पैसा दोनों ही हमने लगता दिया । पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ। कुछ खास समूहों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और हमें अनदेखा किया जा रहा है।” — अध्यक्ष/सचिव, दुर्गा स्व-सहायता समूह
प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल
एक ओर सरकार ‘महिला सशक्तिकरण’ का संदेश देती है, दूसरी ओर एक ही स्थान पर कई सालों से बैठे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिन पर महिलाओं का उत्पीड़न किया जाता है। और शासन प्रशासन के लोग महिलाओं के हितों को मर रहे हैं। आखिर क्यों एक गरीब स्व-सहायता समूह की फाइल 5 वर्षों तक दबाई रही? समूह ने कुछ पाया नहीं बस अपना सब कुछ खोती रही क्या प्रशासन इन महिलाओं को न्याय दिलाने में सक्षम होगा या उनका हक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा? इस तरह के भ्रष्टाचार को आखिर कब तक लोगों की उम्मीदों से खेलते रहेगा। स्व-सहायता समूह की महिलाओं मांग है कि जल्द से जल्द ठोस कारवाही की जाए। जाने रोज और कितने भ्रष्टाचार बड़वारा जनपद पंचायत के अधिकारियों के द्वारा किए जाते होगे। सच सबके सामने आना चाहिए
