करोड़ों की लागत से बना कटनी का स्वामी विवेकानंद सभागार बदहाल:

कटनी:शहरवासियों को सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक आयोजनों के लिए एक आधुनिक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया बस स्टैंड परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार (ऑडिटोरियम) आज प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रख-रखाव के अभाव में यह भव्य इमारत आज जर्जर और खंडहरनुमा स्थिति में पहुँच चुकी है, जहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित होने की आशंका बनी हुई है।3.50 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था निर्माणगौरतलब है कि वर्ष 2019 में ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना’ के तहत प्राप्त आवंटन से लगभग 3.50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया था।क्षमता और सुविधाएं: इस सभागार को लगभग 500 लोगों की बैठने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया था। इसमें अत्याधुनिक मंच, आरामदायक सीटें, हाई-क्वालिटी साउंड सिस्टम और पूरे हॉल में वातानुकूलित (AC) व्यवस्था का प्रावधान था।लोकार्पण और उद्घाटन: दिसंबर 2019 में तत्कालीन महापौर शशांक श्रीवास्तव द्वारा गणमान्य नागरिकों और पत्रकारों की मौजूदगी में इसका लोकार्पण किया गया था। इसके बाद, फरवरी 2020 में तत्कालीन राज्य सरकार के प्रभारी मंत्री प्रियव्रत सिंह ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया था। लेकिन महज कुछ ही वर्षों में यह सौगात उपेक्षा की भेंट चढ़ गई।वर्तमान में बदहाली के प्रमुख और चिंताजनक बिंदुदेख-रेख और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में आज इस पूरे परिसर में बर्बादी का मंजर साफ देखा जा सकता है। वर्तमान में यहाँ निम्नलिखित गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो चुकी हैं:मुख्य द्वार और खिड़कियां क्षतिग्रस्त: ऑडिटोरियम का मुख्य प्रवेश द्वार टूट चुका है। अंदर और बाहर की अधिकांश खिड़कियां व दरवाजे भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके कारण यह स्थान अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है।छत से लटकती एस्बेस्टस शीट (मौत का साया): इमारत की छत से टूटी हुई एस्बेस्टस शीट नीचे की तरफ खतरनाक तरीके से लटक रही हैं। तेज हवा चलने या किसी कार्यक्रम के दौरान यदि ये शीट नीचे गिरती हैं, तो किसी बड़ी जनहानि या दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।टूटी और उखड़ी सीटें: दर्शकों के बैठने के लिए लगाई गई करीब 500 कुर्सियों में से अधिकांश सीटें या तो टूट चुकी हैं या पूरी तरह उखड़ चुकी हैं, जिससे यहाँ किसी भी प्रकार का सामाजिक या सांस्कृतिक आयोजन कराना असंभव हो गया है।शौचालयों की बदतर दुर्दशा: परिसर में बने प्रसाधन गृहों (बाथरूम) की हालत बेहद खराब है। टॉयलेट सीटें टूट चुकी हैं और साफ-सफाई के अभाव में उठने वाली भीषण दुर्गंध से आसपास का पूरा इलाका प्रभावित होता है।दीवारों में गहरी दरारें (क्रैक): भवन की कई प्रमुख दीवारों पर साफ तौर पर गहरी दरारें उभर आई हैं, जो इस इमारत की संरचनात्मक मजबूती (स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी) पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी से आक्रोश, उठी सख्त कार्रवाई व मरम्मत की मांगकटनी के स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और प्रबुद्धजनों ने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया है कि जनता के टैक्स के पैसों से बनी इतनी महत्वपूर्ण और सार्वजनिक संपत्ति को इस तरह वीरान और बर्बाद होने देना बेहद शर्मनाक है। यदि समय रहते इसके रख-रखाव पर ध्यान दिया गया होता, तो आज शहर को इस बहुमूल्य सुविधा से वंचित नहीं होना पड़ता।प्रमुख मांगें:तत्काल बजट आवंटन: जिला प्रशासन और नगर निगम इस जर्जर इमारत के जीर्णोद्धार के लिए तुरंत विशेष बजट स्वीकृत करे।सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: लटकती हुई एस्बेस्टस शीट और जर्जर हिस्सों को तुरंत दुरुस्त करवाकर मंडरा रहे बड़े हादसे के खतरे को टाला जाए।पुनः संचालन: ऑडिटोरियम की सभी व्यवस्थाओं को सुधार कर इसे एक बार फिर शहरवासियों के लिए उपयोग योग्य बनाया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को नया जीवन मिल सके।

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