शासकीय स्कूल परिसर के चारों ओर अवैध रेत का ‘पहाड़’, बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर मंडराया खतरा

देवसर के मजौना (बसहा) स्थित शासकीय स्कूल का मामला; खनिज व राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

सिंगरौली (विशेष संवाददाता):

सिंगरौली जिले में अवैध रेत के डंपिंग और अवैध परिवहन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे विद्या के मंदिर को भी अपना अवैध ठिकाना बनाने से नहीं हिचक रहे। ताजा और चौंकाने वाला मामला देवसर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मजौना स्थित शासकीय स्कूल बसहा से सामने आया है, जहाँ स्कूल परिसर के चारों ओर खुलेआम भारी मात्रा में अवैध रेत का भंडारण (डंपिंग) किया गया है।

तस्वीरों ने खोली दावों की पोल, उठ रहे सुरक्षा पर सवाल

सामने आई तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि स्कूल भवन और परिसर को चारों तरफ से रेत के ढेरों ने घेर रखा है। इससे न केवल स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है, बल्कि यहाँ पढ़ने वाले मासूम छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दिन-रात रेत के उठते गुबार से बच्चों को सांस संबंधी समस्याओं का डर बना हुआ है, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही से किसी अप्रिय दुर्घटना की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

‘अज्ञात डंपिंग’ का पहले से तैयार रहता है बहाना!

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, इस पूरे खेल में शामिल माफिया बेहद शातिराना तरीका अपनाते हैं। किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई या जब्ती से बचने के लिए आरोपी पहले से ही एक शिकायती/सफाई आवेदन तैयार रखते हैं, जिसमें यह दावा कर दिया जाता है कि “रेत किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा रातों-रात डंप कर दी गई है।” इस तरह ‘अज्ञात’ का पर्दा ओढ़कर मुख्य आरोपी आसानी से कानून के शिकंजे से बाहर निकल जाते हैं।

विभागीय निरीक्षण के बावजूद डंपिंग जारी, कार्रवाई पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि महज कुछ ही दिनों पहले खनिज (माइनिंग) और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने उक्त स्थल का निरीक्षण भी किया था। इसके बावजूद स्कूल परिसर के बिल्कुल पास इतनी बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण बदस्तूर जारी रहना, प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली और मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है। आखिर निरीक्षण के बाद भी इस अवैध भंडारण को जब्त क्यों नहीं किया गया? क्या विभागीय अधिकारियों को यह दिखाई नहीं दे रहा?

स्कूलकर्मियों के करीबियों पर साठगांठ का आरोप

स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इस अवैध कारोबार को स्कूल में ही पदस्थ कुछ कर्मचारियों के सगे-संबंधियों व उनके चहेतों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। स्कूल प्रशासन के मौन समर्थन या साठगांठ के बिना इतनी बड़ी मात्रा में स्कूल परिसर का इस्तेमाल व्यावसायिक व अवैध डंपिंग के लिए होना संभव नहीं लगता। (हालाँकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।)

ये बड़े सवाल माँग रहे हैं जवाब:

  1. किसके इशारे पर हुआ डंपिंग? – शासकीय स्कूल परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर रेत डंप करने की इजाजत आखिर किसने और किस अधिकार से दी?
  2. कार्रवाई से परहेज क्यों? – जब राजस्व और खनिज विभाग की टीम पहले ही मौका मुआयना कर चुकी है, तो अब तक एफआईआर (FIR) या जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  3. कौन जिम्मेदार? – अगर यह रेत अवैध है, तो इसके वास्तविक मालिकों और इसमें संलिप्त स्थानीय लोगों पर बुल्डोजर या दंडात्मक कार्रवाई कब होगी?

निष्पक्ष जाँच और सख्त कार्रवाई की माँग

क्षेत्रीय नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला कलेक्टर, खनिज विभाग और राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों से माँग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए। रेत भंडारण के स्रोत (Source), इसके वास्तविक खरीदार/बेचने वाले और इसमें शामिल जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान कर उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि शासकीय संपत्तियों को माफिया के कब्जे से मुक्त कराया जा सके।

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