कटनी:कटनी जिले में राजस्व अधिकारियों की तानाशाही और मनमानी का एक बड़ा मामला सामने आया है। ओबीसी महासभा कटनी द्वारा मुख्यमंत्री और कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि जिले में कानून के रखवाले ही अब पूंजीपतियों के इशारे पर गरीबों का गला घोंट रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक प्रशासनिक अमले द्वारा खुलेआम नियम विरुद्ध और भेदभावपूर्ण कार्रवाई की जा रही है. कुम्हार मोहल्ले के गरीबों पर चली जेबीसी, उजाड़ी रोजी-रोटीमामला कुम्हार मोहल्ले का है, जहाँ आजादी के बाद से कुम्भकार/प्रजापति समाज के गरीब परिवार पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं. आरोप है कि गरीब और लाचार होने का फायदा उठाकर पूंजीपतियों ने प्रशासन की मिलीभगत से इनकी जमीनें छीन लीं और वहाँ बड़ी-बड़ी मिलें व फैक्टरियाँ खड़ी कर लीं. हद तो तब हो गई जब राजस्व तहसीलदार (शहरी) और चक्रवर्ती द्वारा बेदखली का आदेश जारी कर गरीब कुम्हारों के ईंट-भट्टे जेसीबी से पूरी तरह नष्ट करा दिए गए. इतना ही नहीं, नजूल तहसीलदार आकाश नीरज द्वारा जबरन कार्रवाई करते हुए लगभग 5 हजार तैयार ईंटें (कीमत करीब 40,000 रुपये) ट्रॉली में भरकर ले जाई गईं. पूंजीपतियों की बड़ी फैक्ट्रियों पर मेहरबान प्रशासन, गरीबों पर बुलडोजर ज्ञापन में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि जिस खसरा नंबर 83 (रकवा लगभग 17 हेक्टेयर) पर यह कार्रवाई की गई, उसी पर पहले से पाल मिल, बेकरी, होटल, 50 दुकानें और धर्मकांटा जैसी बड़ी व्यावसायिक इमारतें धड़ल्ले से चल रही हैं. लेकिन प्रशासन को ये अवैध निर्माण नजर नहीं आते, कार्रवाई की गाज सिर्फ और सिर्फ गरीब कुम्हारों पर ही गिरती है. इससे स्पष्ट होता है कि अधिकारी पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने की नीयत से जमीन को खुर्द-बुर्द करने में लगे हैं. तहसीलदार पर अभद्रता और ‘गुंडाराज’ के गंभीर आरोप कार्रवाई के दौरान विरोध करने पर अधिकारियों का रवैया बेहद आपत्तिजनक रहा. आरोप है कि नजूल तहसीलदार द्वारा जनप्रतिनिधियों और जनता से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए यहाँ तक कहा गया कि “यहाँ झाक मराने आये हो”—जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. महासभा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि “420 हो, ब्लैकमेलर हो” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं और बच्चों के साथ अभद्रता की जा रही है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्र में राजस्व अधिकारी के रूप में कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं बल्कि ‘गुंडाराज’ चल रहा है. लेन-देन कर नियमों के विरुद्ध फैसले सुनाए जा रहे हैं, जिससे किसानों और गरीबों का भीषण शोषण हो रहा है. ओबीसी महासभा की दो टूक: 2 दिन में कार्रवाई नहीं तो होगा उग्र आंदोलन ओबीसी महासभा कटनी ने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट तहसीलदारों को तत्काल निलंबित कर गरीबों के नुकसान की भरपाई नहीं की गई, और इस भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जाँच नहीं हुई, तो संपूर्ण ओबीसी समाज 02 दिवस के बाद अनिश्चितकालीन धरना देने के लिए विवश होगा. इस प्रशासनिक तानाशाही और हंगामे की समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी.













Leave a Reply