कटनी। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर बाल विवाह को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तैयारी में था। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर बनाए गए कोर ग्रुप की सक्रियता के कारण कटनी शहर में 1 और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में 2 बाल विवाहों को समय पर रोक दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुप्त सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक और पुलिस टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और तीनों स्थानों पर हो रहे बाल विवाह को रोकते हुए परिवार को सख्त चेतावनी दी। अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार, यह एक दंडनीय अपराध है।
मजबूत योजना से मिली सफलता
कलेक्टर के निर्देश पर इस वर्ष बाल विवाह की रोकथाम के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी। एसडीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कोर टीम का गठन किया गया, साथ ही जिला और विकासखंड स्तर पर एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया ताकि निगरानी तंत्र को मजबूती दी जा सके। इसी सक्रियता के कारण समय पर कार्रवाई संभव हो पाई।
कटनी शहर में संयुक्त टीम की कार्रवाई
कटनी के आधार कॉलोनी में एक 18 वर्ष से कम उम्र की बालिका का विवाह होने वाला था। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम तुरंत वहां पहुंची। जांच में बालिका की उम्र 16 वर्ष और बालक की उम्र 22 वर्ष पाई गई। टीम ने परिवार, बारातियों, और आयोजन से जुड़े अन्य लोगों को कानून की जानकारी देते हुए विवाह रुकवाया। समझाने के बाद परिवार ने सहमति दी कि बालिका के बड़े होने के बाद ही विवाह करेंगे।
ढीमरखेड़ा में दो बाल विवाह पर रोक
विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम संकुई में दो नाबालिग बालकों के विवाह की तैयारी चल रही थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि दोनों बालक 21 वर्ष से कम उम्र के हैं। अधिकारियों ने परिवार को समझाया कि 21 वर्ष से कम उम्र में विवाह करना कानून के खिलाफ है। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिवार ने बालकों के वैधानिक आयु पूरी होने के बाद ही विवाह करने पर सहमति दी।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से निवेदन किया है कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने में सहयोग करें और ऐसी किसी भी सूचना को तुरंत प्रशासन तक पहुंचाएं, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
