150 रुपये वार्षिक शुल्क के साथ सरल प्रक्रिया, बिना पंजीकरण पर लगेगा दंड
कटनी, / कटनी नगर पालिका निगम ने शहर के क्षेत्र में पालतू कुत्तों के अच्छे प्रबंधन और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुत्ता पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम एक्ट 1956 और 1961 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत निगम प्रशासन ने सभी कुत्ता पालकों से निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराने का अनुरोध किया है।
निगम प्रशासन ने पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया है। कुत्ते के मालिक नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कक्ष 66 या अपने वार्ड के दरोगा से आवेदन पत्र ले सकते हैं।
सरल पंजीकरण प्रक्रिया
आवेदन के साथ कुत्ते का फोटो, टीकाकरण की जानकारी, निवास और सफाई व्यवस्था का विवरण जमा करने की आवश्यकता होगी। पंजीकरण के लिए 150 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है, जिसे स्वास्थ्य शाखा में जमा कर पंजीकरण किया जा सकता है।
नियम उल्लंघन पर कार्यवाही
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नगर के क्षेत्र में बिना पंजीकरण अपने पालतू कुत्ते रखने पर नियमानुसार दंड लगाया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी ने बताया कि इस पहल से पालतू और आवारा कुत्तों का कुशल प्रबंधन, रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पंजीकरण से कुत्तों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे शिकायतों का समाधान में भी आसानी होगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सोख्तापिट से भूजल सुधार की पहल
हैंडपंप से निकलने वाला पानी अब जमीन में किया जाएगा सुरक्षित
कटनी, / जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर निगम कटनी द्वारा जल संरक्षण को लेकर एक नई पहल प्रारंभ की गई है। शहर के सार्वजनिक हैंडपंपों के निकट सोख्ता गड्ढे बना कर उपयोग के बाद का पानी जमीन में समाहित किया जा रहा है, जिससे भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
अक्सर हैंडपंपों से निकलने वाला अतिरिक्त पानी आस-पास फैलकर कीचड़ और गंदगी का कारण बनता है और मच्छरों के पनपने की संभावना को बढ़ाता है। नई व्यवस्था के अंतर्गत पाइपलाइन के जरिए पानी सीधे सोख्ता गड्ढे तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण और सफाई दोनों सुनिश्चित हो रहे हैं।
कार्यपालन यंत्री सुधीर मिश्रा ने कहा कि सोख्ता गड्ढे लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं और सालभर धीरे-धीरे पानी को जमीन में रिसाकर सूखे जलस्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं। नगर निगम प्रशासन इस मॉडल को शहर के अन्य हैंडपंपों और सार्वजनिक स्थलों पर भी लागू करने की योजना बना रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार यह पहल “लोकल समाधान, बड़ा प्रभाव” की सोच को साकार करती है और आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है।
