पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत को मूक नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह बताया कि भारत को अपने हितों का ध्यान रखते हुए बातचीत में सीधे हस्तक्षेप किए बिना अपने रणनीतिक विकल्पों का सावधानीपूर्वक आकलन करना आवश्यक है। शशि थरूर ने कहा कि हम केवल दर्शक बनकर नहीं रह सकते। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का भारत के लिए कोई बड़ा झटका नहीं होगा।
सीएनएन-न्यूज18 के साथ एक विशेष बातचीत में शशि थरूर ने बताया कि भारत के लिए इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं, इसीलिए उसे कूटनीतिक दृष्टिकोण से सतर्क रहने की आवश्यकता है। थरूर ने यह भी बताया कि भारत को मध्यस्थता में जल्दबाजी नहीं करना चाहिए, लेकिन सरकार को लगातार यह आकलन करना चाहिए कि परिस्थिति के अनुसार आगे क्या कदम उठाना है।
कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कहा कि अगर पाकिस्तान की मध्यस्थता असफल होती है, तो भारत को यह देखना होगा कि वह क्या विकल्प अपना सकता है। बदलते हालात को ध्यान में रखते हुए भारत को अपने संभावित विकल्पों को खुला रखना चाहिए। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को भारत की इस स्तर पर बातचीत में सीधी भागीदारी के समर्थन में नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत को वार्ता में शामिल होना चाहिए। इसके साथ उन्होंने बताया कि भारत का चुप रहना किसी प्रकार की कमजोरी नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है। सरकार को किसी भी कदम को उठाने में राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखना चाहिए। शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के संबंधों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि द्विपक्षीय संबंध विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भारत-अमेरिका संबंधों में कोई नकारात्मक बदलाव न आए।
