मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इस बार कारण चिंता पैदा करने वाला है। पिछले एक महीने में टाइगर रिजर्व में तीन बाघों की मृत्य ने पार्क के कर्मचारियों और वन्यजीव enthusiasts दोनों को चौंका दिया है।
सूचनाओं के अनुसार, तीनों बाघ विभिन्न स्थानों पर मृत पाए गए। पार्क के अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक जांच में विभिन्न कारण सामने आए हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सका है। कहीं पर आपसी संघर्ष की आशंका व्यक्त की जा रही है तो कहीं विद्युत लाइन के कारण करंट लगने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल देश में ही नहीं, बल्कि विश्व भर में बाघों की सबसे बड़ी घनत्व वाली आबादी के लिए मशहूर है। इसलिए बाघों की लगातार होने वाली मौतें सुरक्षा प्रबंधन और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती हैं। विशेषज्ञों की राय है कि अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि सभी मामलों का पोस्टमार्टम किया गया है और नमूने जाँच के लिए भेज दिए गए हैं। रिजर्व क्षेत्र में गश्त को बढ़ा दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भी इस मामले से अवगत करा दिया गया है।
स्थानीय समुदाय और वन्यजीव संगठनों ने इस घटना पर गहरी चिंता प्रकट की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब प्रश्न यह उठता है कि बांधवगढ़ जैसे सुरक्षित माने जाने वाले टाइगर रिजर्व में बाघ आखिर क्यों असुरक्षित हैं? क्या वन विभाग इन मौतों के कारण की सच्चाई को पता लगा पाएगा?
इस बीच, सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
