मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में अवैध शराब निर्माण के बाद फेंके गए दूषित अवशेषों के सेवन से पांच गायों की दुखद मृत्यु हुई। इस घटना ने प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि कुछ दिनों पहले पास के गांव में महिलाओं ने शराबबंदी के समर्थन में प्रदर्शन किया था।
उमरिया जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है, जहां अवैध शराब के व्यापारियों द्वारा फेंके गए विषैले अवशेषों के खाने से पांच गायों की जान गई। यह घटना चंदिया थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव में हुई। इस मामले ने सरकार की गौ-संरक्षण नीतियों पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, इसके साथ आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की गतिविधियों को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।
इस घटना की गंभीरता उस समय और बढ़ जाती है जब कुछ समय पहले पास के कोइलारी गांव में महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन किया था। उस विरोध की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब इन निर्दोष जानवरों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।
सूचनाओं के अनुसार, बिलासपुर गांव के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध रूप से कच्ची शराब बनाई जा रही है। शराब के निर्माण के बाद जो जहरीला पदार्थ (महुआ लहान) बचता है, उसे खुले में फेंक दिया जाता है। गांव में चरने वाली गायों ने उसे खा लिया, जिसके परिणामस्वरूप एक-एक करके पांच गायों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने बताया कि ये गायें लंबे समय से इसी क्षेत्र में घूम रही थीं।घटना के पश्चात ग्रामीणों में गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ है। उनका कहना है कि पुलिस और आबकारी विभाग के सहयोग से यह अवैध व्यापर चल रहा है। लोगों ने यह प्रश्न उठाया है कि जब शराब की भट्टियां खुलकर संचालित हो रही हैं, तो प्रशासन कैसे अनजान बना हुआ है? इस घटना के बाद अब तक कोई ठोस कार्रवाई प्रशासन द्वारा नहीं की गई है और न ही कोई आरोपी पकड़ा गया है, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी और अधिक बढ़ गई है। एक ओर सरकार गाय को ‘गौ माता’ का दर्जा देते हुए उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी मृत्यु पर इस प्रकार की खामोशी चिंतित करने वाली है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि अवैध शराब निर्माताओं के खिलाफ जल्दी से FIR दर्ज की जाए और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। वे यह भी चाहते हैं कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ पुनः न हों। यह मामला सिर्फ पांच गायों की मौत का ही नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, जिसका उत्तर प्रशासन को प्रदान करना होगा।
