jabalpur news today जबलपुर में दिनदहाड़े कत्ल! घर से बाहर बुलाकर युवक पर हमला

रांझी पुलिस थाने के क्षेत्र में, मानेगांव इंद्रा आवास बस्ती में मंगलवार सुबह लगभग 10 बजे घर से बाहर बुलाकर रितेश पटेल उर्फ आयुष पर एक्टिवा बाइक सवार बदमाशों ने चाकू से बर्बर हमला कर दिया। इस घटना के बाद रितेश को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ वो उपचार के दौरान निधन हो गया। पुलिस ने मामले में मर्ग दर्ज कर शव का पोस्टमॉर्टम मेडिकल कॉलेज में भिजवाते हुए आरोपी की खोज शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, रितेश अपने घर पर था जब आवाजें निकालते हुए एक युवक और उसके साथी ने एक्टिवा पर आकर उसे बुलाया। जैसे ही रितेश बाहर आया, उन दोनों ने उस पर चाकुओं से जोरदार हमला कर दिया।जब आसपास के लोग और रिश्तेदार उस शोर के कारण बाहर आए, तो दोनों आरोपी एक्टिवा छोड़कर वहां से भाग गए। कुछ लोगों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए उनका पीछा किया, लेकिन वे भाग निकलने में सफल रहे। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और एसएसएल की टीम ने सबूत इकट्ठा करते हुए एक्टिवा को जब्त कर लिया और आरोपी की सक्रियता से तलाश शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि लड्डू बावरिया नाम के आरोपी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जबकि उसके साथी राजू सोनकर की खोज जारी है। मृतक लगभग 23 साल का था और निजी क्षेत्र में कार्यरत था।रितेश की हत्या की खबर मिलते ही उसके दोस्तों की एक टोली मानेगांव पहुंच गई और आरोपी के घर पर पथराव करते हुए उनकी कार, एक्टिवा और खिड़की-दरवाजों को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान हमलावरों ने आरोपी के साथी विवेक के साथ भी हिंसा की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और वहां से भाग निकला। थाना प्रभारी उमेश गोलानी ने बताया कि रितेश पटेल उर्फ आयुष पर लड्डू बावरिया और राजू सोनकर ने चाकू से हमला कर दिया। उनके बीच पूर्व में अवैध शराब की बिक्री को लेकर संघर्ष चल रहा था, जिसमें दोनों के खिलाफ पहले भी आबकारी के मामले दर्ज किए गए थे। हालाँकि, लड्डू को पकड़ लिया गया है और राजू सोनकर की खोज की जा रही है।

umariapan news today ग्राम पंचायत उमरियापान न्यू बस स्टैंड बना गंदगी का अड्डा

कटनी जिले की जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत उमरियापान का नया बस अड्डा हाल ही में अपनी बुरी स्थिति और फैली गंदगी के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि सरकार और प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई की पहल को बढ़ावा देने का दावा करते हैं, वास्तविकता इन दावों के विपरीत नजर आती है। न्यू बस स्टैंड पर गंदगी इस हद तक फैली हुई है कि न केवल स्थानीय निवासी, बल्कि यहां से गुजरने वाले यात्री भी नाक बंद करके निकलने पर मजबूर हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि पंचायत हर महीने सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसका कोई प्रभाव ग्राउंड लेवल पर दिखाई नहीं देता।कागजों में सफाई, धरातल पर खराब स्थितिस्थानीय लोग बताते हैं कि पंचायत हर महीने सफाईकर्मियों को भुगतान और कचरा उठाने के लिए बड़ी राशि खर्च कर रही है। परंतु इन खर्चों का कहीं भी न्यू बस स्टैंड पर असर नहीं दिख रहा है। बस स्टैंड के मार्ग गंदगी से भरे हुए हैं, वहां कचरा संग्रहण की सुविधा नहीं है, और जो कचरा डस्टबिन में होना चाहिए, वह संपूर्ण क्षेत्र में बिखरा हुआ है। कई स्थानों पर नालियों की सफाई महीनों से नहीं की गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनमें पानी और कचरा सड़ने लगा है, जिससे मच्छरों की समस्या बढ़ रही है।यात्रियों के लिए परेशानी: गंदगी और दुर्गंधहर दिन सैकड़ों यात्री बस स्टैंड पर आते हैं, लेकिन इनके लिए न तो बैठने की उचित व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई का माहौल, यात्री बस के इंतजार में दुर्गंध और गंदगी का सामना कर रहे हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और बिगड़ जाती है, कीचड़, जलभराव और कचरा यात्रियों के लिए असहनीय परिस्थिति उत्पन्न करते हैं। कई यात्रियों ने यह भी बताया है कि गंदगी और बदबू के कारण उन्हें चक्कर भी आने लगते हैं। पंचायत पर सवाल: बजट कहाँ जा रहा है?सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सफाई के लिए हर महीने लाखों रुपये खर्च होते हैं, तो न्यू बस स्टैंड पर सफाई क्यों नजर नहीं आती? क्या सफाई का काम केवल कागज़ों पर किया जा रहा है? क्या सफाईकर्मी समय पर ड्यूटी नहीं निभाते हैं? या फिर जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका सही से नहीं निभा रहे हैं? स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लापरवाह और भ्रष्टाचार से ग्रसित है।क्या स्वच्छता अभियान केवल दिखावा है?देशभर में स्वच्छ भारत मिशन की सफलता के लिए बड़ी-बड़ी बैठकें और रिपोर्टें तैयार की जाती हैं। पंचायत स्तर पर भी सफाई अभियान की कार्यशालाएँ, जागरूकता कार्यक्रम और निरीक्षण किए जाते हैं। लेकिन उमरियापान का नया बस अड्डा यह स्पष्ट करता है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजात, दीवारों पर लिखित नारों और सोशल मीडिया की पोस्ट तक ही सीमित हैं। चारों ओर फैली गंदगी, प्लास्टिक का कचरा, खराब नालियां, आवारा जानवरों की भीड़ और दुर्गंध को देखने के बाद गांव की साफ-सफाई की रैंकिंग पर भी प्रश्न उठते हैं।

विद्यालोक वेलफेयर फाउंडेशन ने ‘बॉर्डर-2’ को टैक्स-फ्री करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

देशभक्ति से भरी फिल्म ‘बॉर्डर-2’ को मध्यप्रदेश में करमुक्त करने की मांग को लेकर विद्यालोक वेलफेयर फाउंडेशन ने शुक्रवार को अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) प्रमोद चतुर्वेदी को माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कहा गया कि ‘बॉर्डर-2’ जैसी एक राष्ट्रवादी फिल्म युवा पीढ़ी में देशप्रेम, बलिदान, त्याग और भारतीय सेना के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करती है। ऐसे प्रेरणादायक सिनेमा को अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इसे करमुक्त करना जनहित में जरूरी है। इस मौके पर फाउंडेशन के अध्यक्ष अर्जित खरे की अगुवाई में एडवोकेट राज दुबे, विपांशु पटेल, हर्ष चौधरी, दीपक, सुयंत गर्ग, ध्रुव बिचपुरिया, करण मिश्रा, एडवोकेट जया थापा, यश कोटवाल तथा अन्य सदस्य मौजूद थे। सभी सदस्यों ने एकजुट होकर सरकार से अपील की कि इस राष्ट्रवादी फिल्म को करमुक्त कर आम लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी ने ज्ञापन को उचित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया।

rithi news today उप स्वास्थ्य केंद्रों पर लटके ताले… बिना इलाज लौट रहे मरीज

कटनी जिले के रीठी तहसील के अंतर्गत सरकारी मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तेजी से घटिया होती जा रही है। ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा देने के बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ऐसी है कि तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंखें बंद किए हुए हैं। चाहे व्यवस्था में सुधार हो या न हो, बस कागजों पर सब सही लगना चाहिए।स्वास्थ्य विभाग की इस गंभीर लापरवाही का एक ताजा उदाहरण रीठी समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े बड़खेरा उप स्वास्थ्य केंद्र में देखा गया। चिकित्सा के लिए आई बुजुर्ग महिलाएं घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौटने को मजबूर हो गईं, क्योंकि केंद्र पर हमेशा की तरह इस बार भी ताला लटका हुआ मिला।ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। इस उप स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर ताला लगा ही रहता है। इलाज मिलने की तो बात छोड़िए, यहां के कर्मचारी भी समय पर नहीं आते। बड़खेरा ही नहीं, क्षेत्र के अन्य कई उप स्वास्थ्य केंद्रों की भी यही स्थिति है—कहीं ताला, और कहीं सुविधाएं केवल नाम की ही होती हैं।सबसे आश्चर्य की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को इस अव्यवस्था से कोई अंतर नहीं पड़ता। मरीज तड़पते रहें, समस्याओं का सामना करें—उन्हें सिर्फ कागज पर डेटा पूरा चाहिए। वास्तविकता से उनका कोई लेना-देना नहीं है।ग्रामीणों में नाराजगीइस लापरवाह सिस्टम से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से कठोर कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में मिलनी चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थितियों में गरीब और जरूरतमंद लोगों को सही समय पर सेवा मिल सके।

katni news today वाहन चालकों को कानून का पाठ पढ़ाने दलबल के साथ सड़क पर उतरी लेडी शहर कोतवाल, मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक काटे अव्यवस्था फैलाने वालों 26 वाहन चालकों के चालान

कटनी। शहर में वाहन चलाने वाले लोग जहाँ भी चाहें अपने वाहनों को खड़ा कर देते हैं, जिससे रास्ते में बाधा उत्पन्न होना आम बात बन चुकी है। मिशन चौक से लेकर जगन्नाथ चौक तक, पुल के नीचे खड़े वाहन हमेशा ट्रैफिक में रुकावट डालते रहते हैं। आज इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देते हुए, लेडी शहर कोतवाल राखी पांडे अपने दल के साथ सड़कों पर निकलीं। उन्होंने मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक, पुल के नीचे खड़े वाहनों के ड्राइवरों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए उनके खिलाफ चालान जारी किए।
इस मौके पर बातचीत के दौरान, लेडी शहर कोतवाल राखी पांडे ने कहा कि कटनी शहर में अनुचित पार्किंग हमेशा पैदल चलने वालों के लिए परेशानियों का कारण बनती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा द्वारा सख्त कदम उठाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त निर्देशों के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉक्टर संतोष डेहरिया और नगर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस लगातार बाजार क्षेत्र में आवश्यक कार्रवाई कर रही है, कभी सावधान करके और कभी सख्ती से, व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रयास में। आज इसी सिलसिले में, मिशन चौक से जगन्नाथ चौक तक पैदल चलते हुए, पुल के नीचे खड़े वाहनों के चालान बनाए गए। इस कार्रवाई में 26 लापरवाह वाहन चालकों पर आर्थिक दंड लगाया गया है। उन्हें चेतावनी भी दी गई है कि यदि वे फिर से ऐसी गलती करते हैं और अव्यवस्था उत्पन्न करते हैं, तो उनके वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

katni news today कुठला थाना क्षेत्र में जमीन को लेकर मारपीट, बड़े भाई के सिर पर फावड़े से वार

कुठला थाना क्षेत्र में एक जमीन के विवाद को लेकर मारपीट की एक घटना रिपोर्ट की गई है। वार्ड नंबर 5 चाका का निवासी शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचित किया कि वह कृषि कार्य में संलग्न है। 19 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 9 बजे, वह अपने बड़े भाई वीरेंद्र सिंह के साथ अपने घर के निकट मिट्टी फैलाने का कार्य कर रहा था, तभी रघुवीर सिंह, खूब सिंह, बलराम सिंह और रामखिलावन सिंह वहां पहुंचे और जमीन के मुद्दे पर बहस शुरू कर दी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने गालियाँ देनी शुरू कर दीं। जब उसने विरोध किया तो दीप सिंह भी मौके पर आ गए और दीप सिंह, बलराम सिंह तथा रामखिलावन सिंह ने शिकायतकर्ता पर हाथ और मुक्कों से हमला किया। इसी दौरान, रघुवीर सिंह और खूब सिंह ने फावड़ा छीनकर वीरेंद्र सिंह के सिर पर वार किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा। बीच-बचाव के दौरान शिकायतकर्ता को भी फावड़े के हैंडल से दाहिने हाथ के अंगूठे में चोट आयी।
घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकियाँ देते हुए भाग गए। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र सिंह को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शिकायतकर्ता की रिपोर्ट पर कुठला थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 296(a), 115(2), 351(3), 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

jabalpur news घायल 5वीं महिला ने भी दम तोड़ा

गत रविवार की दुपहर बरेला मार्ग पर हुए हिट एंड रन घटना में घायल पांचवी महिला ने भी इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में अपनी जान गंवा दी। वही मंडला मार्ग में मृतकों के परिवार ने सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। शव का पोस्टमार्टम करने के बाद शवों को मंडला के बम्हौरी गांव के रिश्तेदारों को सौंप दिया गया। इसी बीच पुलिस ने उस कार का पता लगा लिया जो हिट एंड रन की दर्दनाक घटना में शामिल थी, जो सिहोरा निवासी दीपक सोनी के नाम पर रजिस्टर्ड बताई जा रही है।
इस घटना के संबंध में बरेला थाने के प्रभारी अनिल पटेल ने स्पष्ट किया कि रविवार को लगभग 12:45 बजे सिग्मा कान्हा कॉलोनी सालीवाड़ा में मंडला के बम्हौरी गांव से आए श्रमिक निर्माणाधीन सड़क पर रोड डिवाइडर पर जाली लगाने का कार्य कर रहे थे। दोपहर के भोजन के समय जब श्रमिक खाने में लगे थे, तभी तेज़ गति से आती कार, एमपी 20 एक्स बी 1460, ने उन पर वाहन चढ़ा दिया। इस दुर्घटना में 45 साल की श्रीमती चेनवती गौड़ और 40 साल की श्रीमती लच्छो बाई की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि 45 साल की श्रीमती वर्षा कुशराम और 40 साल की श्रीमती गुमता बाई की इलाज के दौरान रात में और 40 वर्षीय श्रीमती कृष्णा बाई कडोपा की सोमवार की सुबह मेडिकल कॉलेज में मृत्यु हो गई।
इन घायलों का चल रहा इलाज ………
हादसे में घायल हुए श्रीमती गीता बाई उइके (उम्र 40 वर्ष), श्रीमती मीरा बाई उइके (उम्र 45 वर्ष), श्रीमती राजकुमारी उइके (उम्र 35 वर्ष), श्रीमती जमुना बाई (उम्र 40 वर्ष), श्रीमती ज्ञानवती बाई मसराम (उम्र 41 वर्ष), छोटी बाई मसराम (उम्र 35 वर्ष), श्रीमती भागवती बाई उइके (उम्र 35 वर्ष), श्रीमती लक्ष्मी गौड़ (उम्र 40 वर्ष), श्रीमती प्रभावती मरावी (उम्र 30 वर्ष), श्रीमती अकलवती मरावी (उम्र 40 वर्ष) और श्रीमती लक्ष्मी बाई बरकड़े (उम्र 45 वर्ष) का मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। मृतकों का पंचनामा तैयार करके शवों का पोस्टमार्टम किया गया और पुलिस ने शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने कार के चालक के खिलाफ धारा 281, 125(ए), 125(बी), 105 बीएनएस और धारा 184, 134, 187, 177 मोटरयान अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

nagpur accident news today कंपनी की लापरवाही से मजदूर की मौत, लोहे की प्लेट ने ली जान, कंपनी गेट पर शव रखकर आंदोलन

कामठी तहसील के कवठा में स्थित ट्रूफॉर्म टेक्नो प्रोडक्ट प्रा. लि. कंपनी में लापरवाह और अमानवीय प्रबंधन के कारण एक श्रमिक की दुखद मृत्यु हुई। घटना के बाद कंपनी के मालिक द्वारा दिए गए कथित असंवेदनशील बयान ने क्षेत्र में गहरा आक्रोश उत्पन्न कर दिया। नाराज परिवार के सदस्यों ने मृतक का शव कंपनी के गेट के सामने रखकर विरोध प्रदर्शन आरंभ किया।
सूत्रों के मुताबिक, टेकाड़ी निवासी प्रमोद नत्थुजी बोराडे (45) पिछले आठ साल से इस कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी पर आरोप है कि यहाँ सुरक्षा उपकरणों की कमी गंभीर है। काम के दौरान एक भारी लोहे की प्लेट रात में अचानक उनके पेट पर गिर गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद, मृतक के परिवार ने कंपनी से चिकित्सा खर्च और मुआवजा मांगा, लेकिन प्रबंधन ने किसी भी जिम्मेदारी को लेने से इंकार कर दिया। इसी दौरान, परिजनों ने आरोप लगाया कि कंपनी के मालिक ने फोन पर कहा, “उसे मरना ही था, इसलिए वह हमारी कंपनी में आया।” इस कथित अमानवीय टिप्पणी ने जनमानस में गुस्सा भड़काया। नाराज परिवार ने मृतक के शव को कंपनी के गेट पर रखकर विरोध प्रदर्शित किया, जिसमें रिश्तेदारों, सहकर्मी श्रमिकों और स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी में सुरक्षा किट, हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट, सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिससे श्रमिकों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। मृतक प्रमोद बोराडे के पास अपनी पत्नी और एक नाबालिग बेटी है, जिससे उनके परिवार के लिए आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, कंपनी को सील किया जाए और पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।इस दौरान कामठी क्षेत्रीय अस्पताल में भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। परिजनों ने शव को लेने से मना कर दिया, जिससे कंपनी के अधिकारियों और परिजनों के बीच जोरदार बहस हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कंपनी परिसर और अस्पताल में पुलिस का कड़ा इंतजाम किया गया था।

katni news today पीपीपी मॉडल वाले मेडिकल कॉलेज के विरोध में आज कटनी बंद की पहली तस्वीर आई सामने, कृषि कृषि उपज मंडी में दिखा सन्नाटा

पीपीपी मॉडल वाले मेडिकल कॉलेज के खिलाफ आज कटनी बंद की शुरूआत की पहली तस्वीर सामने आई, कृषि उत्पाद मंडी में शांति का माहौल देखा गया, व्यापारियों ने स्वेच्छा से कार्य रोक दिया।
कटनी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा कटनी में मेडिकल कॉलेज के नाम पर किए गए धोखे के प्रतिरोध में आज कटनी बंद का आह्वान किया गया है। भाजपा सरकार ने मेडिकल कॉलेज का सपना दिखाकर कटनी की जनता से वोट लिए, लेकिन जब कॉलेज का समय आया तो पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज प्रस्तुत किया। कॉलेज के निजीकरण के कारण होने वाली समस्याओं के खिलाफ कटनी के जागरूक नागरिक और समाजसेवी एकत्रित होकर आंदोलन कर रहे हैं। कटनी बंद के आह्वान के बाद कृषि उपज मंडी कटनी से जो शुरुआती छवि सामने आई है, उसमें मंडी के व्यापारी बंद का समर्थन करते हुए नजर आ रहे हैं।
बंद का नेतृत्व कर रहे जागरूक और समाजसेवी व्यक्तियों ने जिले के निवासियों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस बंद को सफल बनाने में अपना योगदान दें। एक दिन का बंद सरकार को इस निर्णय पर फिर से विचार करने के लिए बाध्य कर सकता है। उन्होंने जिले के लोगों से आज 20 जनवरी को कटनी बंद रखने और विरोध जताने की अपील की है।

katni news बढ़ती जा रही नगर निगम के प्राइवेट अतिक्रमण दस्ते की गुंडागर्दी, गरीब सब्जी विक्रेताओं पर कहर बनकर टूट रही कार्रवाई, बिना पंचनामा के जप्त किया जा रहा सामान

शहर में नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते की हंगामे की प्रवृत्ति हर दिन बढ़ती जा रही है। अतिक्रमण दस्ते में शामिल निजी कर्मचारी दुकानदारों और मोदी सरकार के स्ट्रीट वेंडरों को निशाना बनाकर परेशान कर रहे हैं। बिना उचित प्रक्रिया के फुटपाथ पर काम करने वालों का सामान लूटना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। अतिक्रमण दस्ते का ध्यान न तो झंडाबाजार की ओर होता है और न ही सिल्वर टॉकीज रोड पर उनकी उपस्थिति होती है। जहाँ एक दस फीट की दुकान वाले व्यापारी बाहर 20 फीट तक दुकान लगाकर सड़क को संकरा कर देते हैं। नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता मुख्य रूप से नगर निगम से निकलते ही जिला अस्पताल रास्ता, कचहरी चौक और मोहन टॉकीज के अतिरिक्त मेन रोड पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि पुरानी कचहरी से एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय तक पहुँचने के बाद यहाँ की रौनक पहले ही समाप्त हो चुकी है। कचहरी चौराहे पर अब केवल फुटपाथ पर सब्जी बेचने वालों की हलचल दिखती है, परंतु अतिक्रमण दस्ते के उत्पीड़न के कारण यहाँ सब्जी बेचने वाले मोदी सरकार के स्ट्रीट वेंडर दो समय की रोटी के लिए तरस रहे हैं। अतिक्रमण की इस कार्रवाई के चलते महापौर प्रीती संजीव सूरी की छवि भी प्रतिदिन गिरती जा रही है क्योंकि गरीब व्यापारी इस स्थिति के लिए सीधे महापौर को जिम्मेदार मान रहे हैं। प्रभावित व्यवसायियों का कहना है कि कचहरी चौराहे से स्टेट बैंक तिराहे के बीच एक तरफ कपड़ा व्यापारी को स्पेस दिया गया है, तो दूसरी ओर उन्हें भी सड़क किनारे व्यवसाय करने की इजाजत दी जाए ताकि वे अपने तथा अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।अतिक्रमण निरीक्षण की कार्रवाई से सिर्फ निम्न वर्ग को ही समस्या होती है। सड़क के किनारे अगर कोई गाड़ी 24 घंटे खड़ी रहे तो कोई चिंता नहीं होती, लेकिन यदि कोई दुकान का संचालन कर रहा है तो उसे परेशान किया जाता है। कचहरी चौराहे पर महारानी लक्ष्मी बाई की मूर्ति के चारों ओर नो पार्किंग का नियम है। इसके बावजूद, हर समय चारों ओर गाड़ियाँ खड़ी रहती हैं। जिन्हें अतिक्रमण दस्ते द्वारा देखकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन यदि वहीं कोई सब्जी बेचने के लिए बैठ जाए तो उसकी सारी सब्जियाँ बिना किसी प्रक्रिया के जब्त कर ली जाती हैं।

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