कटनी जिले के रीठी तहसील के अंतर्गत सरकारी मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तेजी से घटिया होती जा रही है। ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा देने के बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ऐसी है कि तहसील से लेकर जिले तक के अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंखें बंद किए हुए हैं। चाहे व्यवस्था में सुधार हो या न हो, बस कागजों पर सब सही लगना चाहिए।स्वास्थ्य विभाग की इस गंभीर लापरवाही का एक ताजा उदाहरण रीठी समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े बड़खेरा उप स्वास्थ्य केंद्र में देखा गया। चिकित्सा के लिए आई बुजुर्ग महिलाएं घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर लौटने को मजबूर हो गईं, क्योंकि केंद्र पर हमेशा की तरह इस बार भी ताला लटका हुआ मिला।ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। इस उप स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर ताला लगा ही रहता है। इलाज मिलने की तो बात छोड़िए, यहां के कर्मचारी भी समय पर नहीं आते। बड़खेरा ही नहीं, क्षेत्र के अन्य कई उप स्वास्थ्य केंद्रों की भी यही स्थिति है—कहीं ताला, और कहीं सुविधाएं केवल नाम की ही होती हैं।सबसे आश्चर्य की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को इस अव्यवस्था से कोई अंतर नहीं पड़ता। मरीज तड़पते रहें, समस्याओं का सामना करें—उन्हें सिर्फ कागज पर डेटा पूरा चाहिए। वास्तविकता से उनका कोई लेना-देना नहीं है।ग्रामीणों में नाराजगीइस लापरवाह सिस्टम से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से कठोर कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में मिलनी चाहिए, ताकि आपातकालीन स्थितियों में गरीब और जरूरतमंद लोगों को सही समय पर सेवा मिल सके।
