शहर में नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते की हंगामे की प्रवृत्ति हर दिन बढ़ती जा रही है। अतिक्रमण दस्ते में शामिल निजी कर्मचारी दुकानदारों और मोदी सरकार के स्ट्रीट वेंडरों को निशाना बनाकर परेशान कर रहे हैं। बिना उचित प्रक्रिया के फुटपाथ पर काम करने वालों का सामान लूटना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। अतिक्रमण दस्ते का ध्यान न तो झंडाबाजार की ओर होता है और न ही सिल्वर टॉकीज रोड पर उनकी उपस्थिति होती है। जहाँ एक दस फीट की दुकान वाले व्यापारी बाहर 20 फीट तक दुकान लगाकर सड़क को संकरा कर देते हैं। नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता मुख्य रूप से नगर निगम से निकलते ही जिला अस्पताल रास्ता, कचहरी चौक और मोहन टॉकीज के अतिरिक्त मेन रोड पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि पुरानी कचहरी से एसडीएम व तहसीलदार कार्यालय तक पहुँचने के बाद यहाँ की रौनक पहले ही समाप्त हो चुकी है। कचहरी चौराहे पर अब केवल फुटपाथ पर सब्जी बेचने वालों की हलचल दिखती है, परंतु अतिक्रमण दस्ते के उत्पीड़न के कारण यहाँ सब्जी बेचने वाले मोदी सरकार के स्ट्रीट वेंडर दो समय की रोटी के लिए तरस रहे हैं। अतिक्रमण की इस कार्रवाई के चलते महापौर प्रीती संजीव सूरी की छवि भी प्रतिदिन गिरती जा रही है क्योंकि गरीब व्यापारी इस स्थिति के लिए सीधे महापौर को जिम्मेदार मान रहे हैं। प्रभावित व्यवसायियों का कहना है कि कचहरी चौराहे से स्टेट बैंक तिराहे के बीच एक तरफ कपड़ा व्यापारी को स्पेस दिया गया है, तो दूसरी ओर उन्हें भी सड़क किनारे व्यवसाय करने की इजाजत दी जाए ताकि वे अपने तथा अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।अतिक्रमण निरीक्षण की कार्रवाई से सिर्फ निम्न वर्ग को ही समस्या होती है। सड़क के किनारे अगर कोई गाड़ी 24 घंटे खड़ी रहे तो कोई चिंता नहीं होती, लेकिन यदि कोई दुकान का संचालन कर रहा है तो उसे परेशान किया जाता है। कचहरी चौराहे पर महारानी लक्ष्मी बाई की मूर्ति के चारों ओर नो पार्किंग का नियम है। इसके बावजूद, हर समय चारों ओर गाड़ियाँ खड़ी रहती हैं। जिन्हें अतिक्रमण दस्ते द्वारा देखकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन यदि वहीं कोई सब्जी बेचने के लिए बैठ जाए तो उसकी सारी सब्जियाँ बिना किसी प्रक्रिया के जब्त कर ली जाती हैं।
