katni news today तेज रफ्तार ट्रक ने यात्री बस को मारी टक्कर, कई यात्री घायल

पन्ना–कटनी मार्ग पर मंगलवार की दोपहर एक गंभीर सड़क दुर्घटना हुई। एक तेज गति से आ रहा ट्रक ने आगे चल रही एक यात्री बस को पीछे से टक्कर मार दी। इस घटना में बस में मौजूद कई लोगों को हल्की चोटें आई हैं। राहत की बात यह है कि किसी भी तरह की गंभीर हानि नहीं हुई।
विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुन्ना राजा कंपनी की यात्री बस (क्रमांक MP 21 P 0283) कटनी से पन्ना की दिशा में यात्रा कर रही थी। इसी दौरान, तेज गति वाले ट्रक (क्रमांक MP 21 G 2220) के चालक ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए बस को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का पिछला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।
इस घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। थाना प्रभारी मनोज कुमार यादव के निर्देशन में एएसआई शिवेंद्र सिंह परिहार, प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र हरदेनिया और आरक्षक अभिनव पाराशर मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला और घायलों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की।
दुर्घटना के कारण कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ, जिसे पुलिस के प्रयासों से जल्द ही सामान्य कर दिया गया।
गवाहों के अनुसार, ट्रक की गति काफी तेज थी, जिससे चालक अपने वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। पुलिस ने ट्रक के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और घटना की जांच की जा रही है।

badwara news today बड़वारा के झरेला में संचालित बिड़ला प्लांट में 14 वर्षो से फंसी है महिला की भूमि, कलेक्ट्रेट पहुँच की शिकायत

जिले के बड़वारा तहसील स्थित झरेला (पटी) में पिछले 13 साल से बिड़ला व्हाइट सीमेंट प्लांट कार्य कर रहा है। इस प्लांट के स्थापित होने के बाद से क्षेत्र के कई किसानों की ज़मीन पर प्लांट प्रबंधन ने नियंत्रण स्थापित कर लिया। लेकिन इस कारण ग्रामीणों की भूमि छीनने से उन्हें खेती करने से वंचित कर दिया गया। क्षेत्र की निवासी महिला रेखा चौधरी, जिनकी भी ज़मीन प्लांट में चली गई, वह पिछले 14 वर्षों से कलेक्टर और एसपी तहसील में अपनी ज़मीन वापस पाने के लिए शिकायतें कर रही हैं, लेकिन उन्हें उनकी ज़मीन अभी तक नहीं मिली। महिला ने कहा कि जब उन्होंने विरोध किया, तो प्लांट प्रबंधन उनके घर पर पुलिस भेजता है और ग्रामीणों को परेशान करता है। महिला ने एक बार फिर कलेक्ट्रेट का दौरा किया और न्याय की मांग की।

katni news उमरियापान बनीं देश की पहली नगर परिषद

प्रदेश के कटनी जिले की ढ़ीमरखेड़ा तहसील में स्थापित नगर परिषद उमरियापान संभवतः देश की पहली नगर परिषद बन गई है। जिसके सभी 15 वार्डों के नाम परमवीर चक्र प्राप्त करने वालों के नाम पर रखे गए हैं। मध्यप्रदेश के विशेष राजपत्र में 31 दिसंबर 2025 को इन वार्डों के विस्तार और नामकरण की सूचना का आधिकारिक प्रकाशन हुआ है।
कटनी जिले के कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा राजपत्र में जारी की गई अधिसूचना में सभी 15 वार्डों के नाम भारत के शहीद परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गए हैं। यह अभिनव कदम शहीदों के अद्वितीय बलिदान को एक स्थायी श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति और शौर्य की भावना को जगाने का प्रयास है। इस नामकरण के परिणामस्वरूप उमरियापान की सड़कों, गलियों और वार्ड शहीदों के महान बलिदान की गाथाओं के प्रतीक बन गए हैं।
नवगठित उमरियापान नगर परिषद के वार्डों के नाम
वार्ड क्रमांक 1 का नाम मेजर पीरू सिंह के नाम पर रखा गया है। पीरू सिंह शेखावत 6 राजपूताना रायफल्स में कंपनी हवलदार मेजर रहे। जुलाई 1948 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के टिथवाल सेक्टर में एक भयानक आक्रमण किया। इस दौरान पीरू सिंह की टुकड़ी के अधिकतर जवान गंभीर रूप से घायल हुए या शहीद हो गए। लेकिन उन्होंने अकेले ही मशीन गन से दुश्मनों पर हमला कर एक पोस्ट पर नियंत्रण प्राप्त किया और फिर उन्होंने एक अन्य पोस्ट से भी दुश्मनों को खदेड़ दिया, हालांकि इस दौरान वे वीरता के साथ शहीद हो गए।
वार्ड क्रमांक 2 का नाम मेजर धन सिंह थापा के सम्मान में रखा गया है। अगस्त 1949 में भारतीय सेना की 8वीं गोरखा रायफल्स में कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्त मेजर धन सिंह थापा परमवीर चक्र से सम्मानित हुए। मेजर थापा ने 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान लद्दाख में चीनी सेना का सामना किया।
वार्ड क्रमांक 3 का नाम मेजर होशियार सिंह के नाम पर रखा गया है। मेजर होशियार सिंह का 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान रहा। जब पाकिस्तानी सेना 1971 में सकरगढ़ सेक्टर पर काबिज हो गई थी, उस समय होशियार सिंह ने सीधे मुकाबले में पाकिस्तानी सैनिकों को नष्ट कर दिया। इस कारण पाकिस्तानी सेना अपने मारे गए साथियों की लाशें छोड़कर भागने को मजबूर हुई। मेजर होशियार सिंह को परमवीर चक्र पुरस्कार उनके जीवित रहने के दौरान ही प्रदान किया गया।नवीनतम नगर परिषद के वार्ड संख्या 4 का नाम कैप्टन विक्रम बत्रा के नाम पर रखा गया है। करगिल युद्ध के दौरान, कैप्टन विक्रम बत्रा ने दो प्रमुख पहाड़ियों को पाकिस्तानियों से मुक्त कराया था। उनकी यूनिट को 1 जून 1999 को करगिल युद्ध में भेजा गया। विक्रम बत्रा ने अपनी जान की परवाह किए बिना लेफ्टिनेंट अनुज नैय्यर के साथ कई पाकिस्तानियों को समाप्त किया। करगिल युद्ध के समय उनका नाम कोड शेरशाह था। विक्रम बत्रा को युद्ध में शहादत के बाद मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
उमरियापान नगर परिषद के वार्ड संख्या 5 का नाम शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के नाम पर रखा गया है। श्री खेत्रपाल ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की। उनके साहस और बलिदान को देखते हुए मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर नगर परिषद के वार्ड संख्या 6 का नामकरण किया गया है। वे चौथी कुमाऊँ रेजिमेंट की डेल्टा कंपनी के अधिकारी थे। उन्होंने 1947 में पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ अपनी यूनिट का नेतृत्व किया और मुंहतोड़ जवाब दिया, जबकि एक मोर्टार विस्फोट में शहीद हुए, फिर भी उन्होंने पाकिस्तान के इरादों को सफल नहीं होने दिया। मेजर शर्मा पहले परमवीर चक्र विजेता बने।
शहीद मेजर शैतान सिंह के नाम पर वार्ड संख्या 7 का नाम रखा गया है। मेजर शैतान सिंह ने भारत-चीन युद्ध 1962 में लगभग 17,000 फीट की ऊँचाई पर कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं के बीच कुमाऊं रेजिमेंट के 13वीं बटालियन के सैनिकों की कमान संभाली और चीनी सैनिकों को भागने के लिए मजबूर कर दिया।
सूबेदार जोगिंदर सिंह के नाम पर नवगठित नगर परिषद के वार्ड संख्या 8 का नामकरण किया गया है। उन्होंने 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान बेमिसाल साहस का परिचय देते हुए चीनी सैनिकों पर जोरदार हमला किया। इस दौरान सूबेदार जोगिंदर सिंह को गोली लगी, लेकिन उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना चीनी सैनिकों को धूल चटा दी। सर्वोच्च बलिदान देने और सैनिकों को युद्ध के समय प्रेरित करने के लिए और अंत तक लड़ने के लिए भारत सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया।कैप्टन मनोज कुमार पांडे के नाम पर वार्ड संख्या 9 का नाम रखा गया है। 24 वर्ष की आयु में, कैप्टन मनोज कुमार पांडे ने कारगिल युद्ध में 3 जुलाई 1999 को भारत की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देकर अमरता प्राप्त की।
परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर रामस्वामी परमेश्वरम के नाम पर वार्ड संख्या 10 का नामीकरण किया गया है। उन्होंने 25 नवंबर 1987 को श्रीलंका में शांति अभियान के दौरान अद्वितीय बहादुरी का परिचय देते हुए शहीद होने का गौरव प्राप्त किया। सीने में गोली लगने के बावजूद, वे 6 आतंकवादियों को समाप्त करने में सफल रहे। उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र प्रदान किया गया।
सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे के नाम पर वार्ड संख्या 11 का नामकरण किया गया है। 1948 में पाकिस्तान के कबाइलियों के हमले के दौरान, वे वीरता का उत्कृष्ट उदाहरण बने। उन्होंने लगातार तीन दिनों तक बिना भोजन-पानी के पाकिस्तानी सैनिकों का सामना किया। उनके इस बलिदान के लिए उन्हें जीवित रहते हुए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
वार्ड संख्या 12 का नाम शहीद अब्दुल हमीद के नाम पर रखा गया है। शहीद अब्दुल हमीद ने 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान खेमकरन सेक्टर में पाकिस्तान के 7 पैटर्न टैंकों को नष्ट कर दिया। इस लड़ाई के दौरान, वे दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए। फिर भी, उन्होंने अपने शहादत से पहले दुश्मनों को कड़ा मुकाबला दिया। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया।
शहीद अल्बर्ट एक्का के नाम पर वार्ड संख्या 13 का नामकरण किया गया। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में घायल होने के बावजूद, उन्होंने दुश्मन की सेना को नतमस्तक कर दिया और हैंड ग्रेनेड के जरिए पाकिस्तानी बंकर को ध्वस्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप वे शहीद हो गए। श्री एक्का को उनकी शहादत के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

rewa news जमीनी विवाद में भाई सहित अन्य पर हत्या का आरोप, पेड़ में लटकता मिला था शव; पत्नी ने आईजी से लगाई न्याय की गुहार

रीवा: एक मामूली भूमि विवाद के चलते एक युवक को उसके अपने भाइयों पर सामूहिक हत्या का आरोप लगा है, जिसमें आरोपियों ने शव को जंगल में एक पेड़ से लटकाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। पीड़िता का दावा है कि जब उसने इस घटना की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराने का प्रयास किया, तो पुलिस ने हत्या के मामले को लेने के बजाय उसे टाल दिया और पीएम रिपोर्ट का इंतजार करने का कहा। इसके बाद, पीड़िता ने आज आईजी कार्यालय में न्याय की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम दुआरी की निवासी संगीता रजक ने पुलिस महानिरीक्षक को दिए गए पत्र में उल्लेख किया कि 31 दिसंबर 2025 की रात उसके पति ज्ञानू रजक (28 वर्ष) को उनके बड़े भाई शम्भू रजक अपने घर बुलाकर ले गए थे। वहां भूमि वितरण को लेकर हुए झगड़े के बाद आरोपियों शम्भू रजक, सत्येंद्र रजक और संतोष रजक ने मिलकर ज्ञानू पर हमला किया और उसकी हत्या गला दबाकर की।
शिकायतकर्ता पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने हत्या को आत्महत्या के रूप में पेश करने की कोशिश की और शव को घर से तीन किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर ले जाकर आम के पेड़ से तौलिए से लटका दिया। संगीता के अनुसार, स्थानीय गुढ़ थाना पुलिस ने उसकी बात सुनने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया।
छोटे-छोटे दिव्यांग बच्चों के भविष्य पर संकट पीड़िता ने बताया कि उसके दो छोटे बच्चे हैं, और दोनों को पैरों से दिव्यांगता है। पति की मृत्यु के बाद उनके परिवार के सामने जीवनयापन और सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। महिला ने आईजी से अनुरोध किया है कि दोषियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

jabalpur news डॉक्टर युवक की हत्या करने वाले आरोपी बदमाश गिरफ्तार, सीसीटीवी वीडियो से आरोपियों की हुई पहचान, क्राइम ब्रांच और भेड़ाघाट थाना पुलिस ने किया सात आरोपियों को गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के भेड़ाघाट थाना क्षेत्र में सहसपुर ब्रिज के नीचे एक डॉक्टर युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने डॉक्टर पर बेरहमी से चाकू से वार कर उसकी जान ली थी। घटना के बाद आरोपी मौके से भाग निकले थे, लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें पहचाना और मुखबिर की सूचना के अनुसार गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार, पकड़े गए आरोपी थाना क्षेत्र के बदमाश हैं जिन्होंने डॉक्टर से गाली-गलौज को लेकर विवाद किया था और इसी विवाद में उन्होंने युवक की चाकू से हत्या कर दी।
शराब की दुकान के पास विवाद के दौरान डॉक्टर की चाकू के द्वारा हत्या की घटना हुई है। मृतक डॉक्टर अभिषेक, जो महेंद्र साहू के नाम से भी जाने जाते थे, 27 वर्ष के थे और वह पाटन थाना क्षेत्र के निवासी थे। उनके पिता ने बताया कि अभिषेक अपनी गाड़ी लेकर उज्जैन जा रहे थे, जब उनकी गाड़ी रास्ते में बिगड़ गई और वह भेड़ाघाट के सहसपुर के पास एक मैकेनिक का इंतजार कर रहे थे। इस बीच, कुछ नकाबपोश युवक वहां आए और किसी बात पर बहस करने लगे। जब अभिषेक ने गाली देने से मना किया, तो बदमाशों ने उन पर 16 से 17 बार चाकू से वार कर दिया। चाकू लगने के कारण अभिषेक का खून काफी बह गया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस को घटना की सूचना मिलने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल अस्पताल भेजा गया और आरोपियों की तलाश में जुट गई।
दिनदहाड़े सड़क पर डॉक्टर युवक की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभिषेक के हत्याकांड का पर्दाफाश किया गया है और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी आरोपियों ने शराब के नशे में आकर आपस में विवाद किया और चाकू से हमला कर डॉक्टर युवक को मार डाला। फिलहाल, पुलिस ने इन पर हत्या का मामला दर्ज किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

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