गांव ककरेहटा में सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही

जिले की बहोरीबंद तहसील के गांव ककरेहटा में सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जहां शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर हितग्राहियों को घटिया गेहूं दिया गया जिसमें मिट्टी और कंकड़ मिले थे। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसने खाद्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या
है पूरा मामला?

शनिवार
की शाम को राशन वितरण के दौरान सेल्समैन पूरन रैकवार ने बेहद निम्न गुणवत्ता वाले गेहूं की एक बोरी उपभोक्ताओं को दी। इस गेहूं में भारी मात्रा में मिट्टी और कंकड़ पाए गए, जिसे देखकर हितग्राही भड़क उठे।

हितग्राहियों
का आरोप

स्थानीय
निवासी दुर्गेश चौधरी ने आरोप लगाया कि उन्हें दिया गया गेहूं पूरी तरह से मानकों के विपरीत था और यह गरीबों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर समस्या है। उन्होंने यह भी बताया कि इस दुकान पर पहले भी कई बार इस तरह का खराब राशन बांटा गया है।

विरोध
के बाद मचा हड़कंप

घटना
का वीडियो बनते ही राशन दुकान में अफरा-तफरी उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों के तीव्र विरोध के बाद तुरंत उस खराब गेहूं के वितरण को रोका गया और जिन लोगों को वह अनाज दिया गया था, उनसे वापस ले लिया गया।

सेल्समैन
की सफाई

सेल्समैन
पूरन लाल रैकवार ने इसे एक बोरी की गलती बताते हुए कहा कि जैसे ही खराब गेहूं की पहचान हुई, उसे अलग कर दिया गया और बांटा गया अनाज भी वापस लिया गया।

विभागीय
दावों पर सवाल

यह
घटना खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाती है। यदि गोदाम से राशन दुकानों तक अनाज की गुणवत्ता की जांच नहीं की जा रही है, तो गरीबों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? ग्रामीणों ने इस पूरे मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बहोरीबंद थाने का कार्यभार ग्रहण किया विजय विश्वकर्मा ने

विजय विश्वकर्मा ने बहोरीबंद थाने का कार्यभार ग्रहण किया
पूर्व कोतवाली
और माधव नगर थाने के प्रभारी रह चुके निरीक्षक विश्वकर्मा, कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने को प्राथमिकता देंगे कटनी/ बहोरीबंद थाने में हाल ही में हुए प्रशासनिक परिवर्तन के बाद रविवार को नए थाना प्रभारी विजय विश्वकर्मा ने अपनी जिम्मेदारियों को ग्रहण किया है। यह ध्यान देने योग्य है कि पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा द्वारा कुछ दिनों पहले की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत पूर्व थाना प्रभारी अखिलेश दहिया को लाइन अटैच किया गया था और एक आरक्षक को निलंबित किया गया, जिसके फलस्वरूप यह पद खाली रह गया था।
अनुभवी
अधिकारी को मिली नई ज़िम्मेदारी निरीक्षक विजय विश्वकर्मा कटनी जिले की भौगोलिक स्थिति और कार्यशैली से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। उन्होंने पहले जिला मुख्यालय के कोतवाली और माधव नगर जैसे संवेदनशील थाने के प्रभारी के रूप में एक लंबा और सार्थक कार्यकाल बिताया है। कुछ समय पहले, उनका जबलपुर से कटनी जिले में स्थानांतरण हुआ था और वे पुलिस लाइन में तैनाती के इंतजार में थे।
जनता
की समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा पदभार ग्रहण करने के बाद निरीक्षक विजय विश्वकर्मा ने बताया कि क्षेत्र में एक सुरक्षित वातावरण बनाना और कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाना उनकी मुख्य प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि थाने में आने वाले सभी फरियादियों की सुनवाई की जाएगी और उनकी समस्याओं का समाधान मौके पर ही करने की कोशिश की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पुलिस अवैध गतिविधियों और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

ऑपरेशन शिकंजा जब शिकारी खुद शिकार बन गया,क्लाइमैक्स मे 500 का नोट बना फंदा फिल्मी जाल

सीक्रेट ऑपरेशन शिकंजा: जब शिकारी खुद ही शिकार बन गया, क्लाइमैक्स में 500 का नोट बना फंदा
फिल्मी
जाल, वास्तविक शिकंजा महिलाएं DSP और SDOP का वेश धारण कर रिश्वतखोर आरक्षक को पकड़ा, SP के कठोर कदमों से बहोरीबंद थाना हिल गया
कटनी
जिले के पुलिस विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसा हमलाः हुआ कि पूरे संगठन को झकझोर कर रख दिया। वेश बदलकर ट्रैक्टर में बैठी महिला पुलिसकर्मियों ने एक आरक्षक को 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्यवाही केवल एक गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था में जिम्मेदारी और ईमानदारी की नई दिशा तय करने वाली साबित हुई।
सीक्रेट
ऑपरेशन ‘शिकंजा’: जब शिकारी खुद शिकार बन गया
किसानों
और ट्रैक्टर चालकों से अवैध वसूली की निरंतर मिल रही शिकायतों ने पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। एक गुप्त योजना बनाई गई, जिसका नाम दिया गया ऑपरेशन शिकंजा। इस योजना के तहत स्लीमनाबाद के SDOP आकांक्षा चतुर्वेदी और प्रशिक्षु DSP शिवा पाठक को निर्धारित किया गया। सोमवार सुबह लगभग 5 बजे, टीम बहोरीबंद पहुंच गई। महिला अधिकारियों ने ग्रामीण महिलाओं का रूप धारण किया और एक ट्रैक्टर में सवार हो गईं। ट्रैक्टर चालक को पहले से पहचाना गया 500 रुपये का नोट दिया गया। निर्देश स्पष्ट थे, यदि कोई पुलिस कर्मी पैसे मांगे तो यही नोट थमाना है। स्लीमनाबाद मोड़ पर पहले से मौजूद बहोरीबंद थाना का मोबाइल वाहन चालक आरक्षक लक्ष्मण पटेल ट्रैक्टर को रोकता है। कार्रवाई की धमकी देकर वह 500 रुपये की मांग करता है। जैसे ही नोट उसके पास आता है, अचानक ट्रैक्टर में बैठी महिलाओं का असली रूप सामने आता है। महिला DSP और SDOP तुरंत बाहर निकलकर आरक्षक को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लेती हैं। पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो जाता है। यह दृश्य, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी। SP का सख्त कदम: तुरंत कार्रवाई, जीरो टॉलरेंस का संदेश
जैसे
ही वीडियो और रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के पास पहुंची, कार्रवाई में कोई देरी नहीं हुई। बहोरीबंद थाना प्रमुख अखिलेश दहिया को तत्कालन हटा दिया गया और रिश्वत लेते पकड़े गए आरक्षक लक्ष्मण पटेल को निलंबित कर दिया गया। पूर्व में आयी शिकायतों के आधार पर अन्य कर्मियों पर भी कार्रवाई की गई, यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि वर्दी में किसी प्रकार के दाग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिकायतों
का अतिक्रमण: कार्रवाई का इंतजार
बहोरीबंद
थाना क्षेत्र में लंबे समय से नियमित रूप से यह शिकायतें रही थीं कि वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली के लिए ट्रैक्टर चालकों से 500 से 1000 रुपये की मांग की जाती थी, कार्रवाई का भय दिखाकर शोषण किया जाता था। इतना ही नहीं, पहले भी हवलदार द्वारा की गई ऑनलाइन वसूली और SI द्वारा की जा रही रिश्वत मांगने के वीडियो वायरल होते रहे हैं।
महकमे
में हड़कंप: अब अगला कौन?
इस
फिल्मी शृंगार वाली घटना के बाद केवल कटनी में नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश के पुलिस विभाग में हलचल उत्तेजित हो गई है। जहाँ-जहाँ अवैध वसूली के बारे में बातें थीं, वहां अब डर का माहौल पनप गया है। अब यह भय साफ देखा जा रहा है कि कहीं भी, कभी भी, कोई भी फंस सकता है। ईमानदार नेतृत्व का अनुकरण बनते हुए एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने यह घटना स्पष्ट कर दी है कि यदि नेतृत्व निष्कलंक और दृढ़ हो, तो प्रणाली में सुधार संभव है। अभिनय विश्वकर्मा ने यह सिद्ध किया कि शिकायतों की अनदेखी नहीं होगी। प्रणाली के भीतर की सफाई उतनी महत्वपूर्ण है जितनी कि बाहरी कानून व्यवस्था। उनके कार्यशैली ने आम जनता में विश्वास को बल प्रदान किया है।
वर्दी
की प्रतिष्ठा बनाम लालच की कीमत
यह
घटना केवल एक पुलिसकर्मी के पकड़े जाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतिबिम्ब है जो प्रणाली को भीतर से कमजोर बनाती है। जब कानून के रक्षक ही कानून का उल्लंघन करने लगते हैं, तो आम जन का भरोसा टूटना स्वाभाविक होता है। हालांकि, इस कार्यवाही ने इस उम्मीद को भी सृजित किया है कि प्रणाली में अभी भी ऐसे अधिकारी हैं जो न केवल गलत को पहचानते हैं, बल्कि उसे समाप्त करने की हिम्मत भी रखते हैं। नियमित निगरानी की जवाबदेही तय करने और ईमानदार अधिकारियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, तभी जनता का पुलिस पर विश्वास बना रह सकेगा।
एक
कार्यवाही, कई संदेश
बहोरीबंद
की यह गतिविधि केवल एक ट्रैप नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो वर्दी की सुरक्षा में भ्रष्टाचार के खेल में लगे हुए हैं। कटनी से उठी यह आवाज अब समग्र प्रदेश में सुनाई दे रही है। ईमानदारी अब एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गई है।

अमेरिका-ईरान युद्ध से सोने में 17 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण मार्च में सोने की कीमतें 17 वर्षों में सबसे ज्यादा गिरावट का सामना कर चुकी हैं, इस दौरान इस बहुमूल्य धातु की कीमत लगभग 14.5 प्रतिशत कम हो गई है।

इससे
पहले इतनी भारी गिरावट लगभग 17 वर्ष पूर्व देखी गई थी, जब अक्टूबर 2008 में सोने की कीमत लगभग 16.8 प्रतिशत घट गई थी।

वर्तमान
में कॉमेक्स पर सोने की कीमत लगभग 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास है, जब कि इस महीने के प्रारंभ में सोने का मूल्य लगभग 5,400 डॉलर प्रति औंस था।

विशेषज्ञों
का मानना है कि सोने में आए तीव्र गिरावट के लिए मुनाफा निकालना, डॉलर के सूचकांक में वृद्धि, बॉंड यील्ड का बढ़ना और कच्चे तेल जैसी अन्य वस्तुओं में वृद्धि जिम्मेदार हैं। इन सभी तत्वों ने सोने पर दबाव डाला।

विशेषज्ञों
ने आगे बताया कि पिछले चार वर्षों में सोने के व्यापार के तरीके में बदलाव आया है।

उन्होंने
कहा, “यूक्रेन युद्ध से पहले, सोने के दाम का बॉंड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन के विपरीत संबंध था; जब ये सूचकांक घटते थे, तो सोने की कीमतें बढ़ती थीं, और जब ये सूचकांक बढ़ते थे, तो सोने की कीमतें घटती थीं।”

उन्होंने
आगे कहा, “यूक्रेन युद्ध के बाद की अवधि में इन संबंधों में पूरी तरह से बदलाव आया, खासकर 2025 और 2026 की प्रारंभिक अवधि में जब सोने की कीमतों में तेजी से वृद्धि देखी गई।”

ईरान
के युद्ध के बाद, सोने ने अपने पारंपरिक संबंधों को फिर से स्थापित किया है।

उन्होंने
कहा, “जब बॉंड यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में वृद्धि हुई, तब सोने ने इन मानकों के प्रति अपनी पारंपरिक विपरीत संवेदनशीलता को प्रदर्शित किया, जिससे इसकी कीमतों में कमी आई।”

हालांकि,
पिछले वर्ष में सोने ने बेहद ऊंची रैली दर्ज की है। डॉलर के मुकाबले सोने की कीमत पिछले एक साल में 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। वहीं, पिछले छह महीने में सोने की कीमत में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

बड़वारा में आजाद समाज पार्टी के कार्यालय का शुभारंभ

आजाद समाज पार्टी (भीमआर्मी) के नवीन कार्यालय का शुभारम्भ किया गया। जिले के बड़वारा में शनिवार की शाम कार्यकताओ ने फीता काटकर कार्यालय का शुभारम्भ किया। भीमआर्मी आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओ ने बताया कि पीड़ित लोगों को अपनी शिकायत लेकर 24 किलोमीटर का सफर तय करके जिला कार्यालय जाना पड़ता था जिससे लोगों को बड़ी परेशानी उठानी पडती थी, लोगों की समस्याओ को दृस्टिगत रखते हुए भीमआर्मी आजाद समाज पार्टी के कार्यालय का शुभारम्भ किया गया है जहाँ लोग बड़ी आसानी से अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते है। इस दौरान भीमआर्मी के जिला अध्यक्ष चंद्रभान बौद्ध, राम सूर्यवंशी, जयचंद सूर्यवंशी, अनिमेष पटेल, प्रीतम चौधरी, रामखिलावन, अनुज सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कदाचार की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई बहोरीबंद थाना प्रभारी हटाए गए

कदाचार की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई बहोरीबंद थाना प्रभारी हटाए

https://x.com/i/status/2038557040122237355

कटनी।। बहोरीबंद थाना क्षेत्र में लगातार मिल रही कदाचार की सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने कठोर निर्णय लिया है। जब शिकायतों की जांच की गई, तो यह स्पष्ट हुआ कि थाना प्रभारी अपने अधीन कर्मचारियों पर उचित नियंत्रण नहीं रख सके, जो कि समस्या की गंभीरता बढ़ा रहा था।
पुलिस
के अलग अनुभाग के प्रमुख अधिकारियों द्वारा मामले की छानबीन की गई, जिसके परिणामस्वरूप कदाचार की शिकायतें सही ठहराई गईं। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने त्वरित रूप से बहोरीबंद थाना प्रभारी को उनके पद से हटा दिया है।
पुलिस विभाग ने
इस कार्रवाई को अनुशासन और जिम्मेदारी को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। साथ ही, यह सिद्ध कर दिया गया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या कदाचार को सहन नहीं किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • सत्यापन: राजपत्रित अधिकारियों द्वारा शिकायतों की पुष्टि की गई।
  • कारण: अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण की कमी और कदाचरण की शिकायतें।
  • कार्रवाई: थाना प्रभारी को पद से तत्काल हटाया गया।
बड़वारा 5 वर्षों से भुगतान के इंतजार में, संकट में स्व-सहायता समूह की नर्सरी

बड़वारा जनपद: 5 वर्षों से भुगतान के इंतजार में, संकट में स्व-सहायता समूह की नर्सरी
बड़वारा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी दावे जनपद पंचायत बड़वारा जिला कटनी में बेकार साबित हो रहे हैं। यहां ‘दुर्गा स्व-सहायता समूह’ की सदस्याएं पिछले पांच साल से अपनी मेहनत का भुगतान पाने के लिए सरकारी दफ्तरों में लगातार घूम रही हैं, चक्कर लगा रही है। लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं आया है।

अधिकारियों की लापहरवाही
स्व-सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत के ऊपर भरी बड़ा जनपद पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही।
साल 2020 में उत्साहपूर्वक दुर्गा स्व-सहायता समूह को नर्सरी के संचालन का कार्य सौंपा गया था। महिलाओं ने पूरी मेहनत से पौधों की तैयारी की। इन पौधों का वितरण मनरेगा के माध्यम से जिले के अलग-अलग पंचायतों में किया गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद विभाग ने अपने किए गए वादे को भुला दिया। और अपनी बातो से मुकर गए।

भुगतान
अस्वीकृत भुगतान: 5 साल गुजर जाने के बावजूद पौधों की बिक्री और मेहनत की रकम समूह को नहीं मिली। जो लगत लगाई गई वह भी बसूला नहीं हुई। समूह की महिलाएं तो बर्बाद हो जाएगी।

नर्सरी हुई बंद:
आर्थिक समस्याओं के चलते एक सफल नर्सरी अब वीरान हो चुकी है। पेड़ पूरी तरह से सुख गए ।

सीएम हेल्पलाइन द्वारा सहायता: महिलाओं ने निराश होकर 181 (शिकायत संख्या 37345594) पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है,पर अधिकारियों की मिली भगत होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हुई। न ही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को कोई जब्बा मिला।

अधिकारियों पर मनमानी और पक्षपात का आरोप

समूह की महिलाओं का सीधा आरोप बड़वारा में कार्यरत प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह बघेल पर है। उनका कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। और हमेशा कार्यालय के चक्कर काटने पर मजबूर किया। कुछ खास समूहों को लाभ दिया गया।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं का कहना

“हमने इस नर्सरी को अपने सपनों के साथ शुरू किया था ताकि हम आत्मनिर्भर बन सकें, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही ने हमारे सपने को चूर-चूर कर दिया। आज हम पूरी तरह से टूट चुके हैं। अपना समय और पैसा दोनों ही हमने लगता दिया । पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ। कुछ खास समूहों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और हमें अनदेखा किया जा रहा है।” — अध्यक्ष/सचिव, दुर्गा स्व-सहायता समूह

प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल
एक ओर सरकार ‘महिला सशक्तिकरण’ का संदेश देती है, दूसरी ओर एक ही स्थान पर कई सालों से बैठे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिन पर महिलाओं का उत्पीड़न किया जाता है। और शासन प्रशासन के लोग महिलाओं के हितों को मर रहे हैं। आखिर क्यों एक गरीब स्व-सहायता समूह की फाइल 5 वर्षों तक दबाई रही? समूह ने कुछ पाया नहीं बस अपना सब कुछ खोती रही क्या प्रशासन इन महिलाओं को न्याय दिलाने में सक्षम होगा या उनका हक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा? इस तरह के भ्रष्टाचार को आखिर कब तक लोगों की उम्मीदों से खेलते रहेगा। स्व-सहायता समूह की महिलाओं मांग है कि जल्द से जल्द ठोस कारवाही की जाए। जाने रोज और कितने भ्रष्टाचार बड़वारा जनपद पंचायत के अधिकारियों के द्वारा किए जाते होगे। सच सबके सामने आना चाहिए

15 करोड़ की लागत से बन रही क्रिटिकल केयर यूनिट अब तक शुरू नहीं, मरीजों को नहीं मिल रही बेहतर सुविधा

कटनी. दो वर्ष से चल रहा निर्माण, अब भी 2-3 माह का इंतजार, लापरवाही और धीमी प्रगति पर उठ रहे सवाल
कटनी.
जिले के अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं से सजी क्रिटिकल केयर यूनिट का कार्य पिछले दो वर्षों से चल रहा है, लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस यूनिट से क्षेत्र के मरीजों को बेहतर आपात चिकित्सा सेवा मिलने की आशा थी, जो अभी पूरी नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यूनिट के चालू होने में अगले 2 से 3 महीने लग सकते हैं।
इस
क्रिटिकल केयर यूनिट में आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है। साथ ही, यहाँ आइसोलेशन वार्ड और आर्थो (हड्डी रोग) वार्ड भी तैयार किए जा रहे हैं। भवन के पहले तल पर 26 बेड की क्षमता वाला वार्ड बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे तल पर दो आधुनिक ऑपरेशन थियेटर और 16 बेड का आईसीयू स्थापित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, डायलिसिस हेतु 2 बेड की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी। एक अन्य तल पर 16 बेड का एक और आईसीयू भी बनाने का प्रस्ताव है, जिससे गंभीर मरीजों की देखभाल की क्षमता में सुधार होगा।

सुविधाएं
हो रहीं प्रभावित
हालांकि,
निर्माण की धीमी गति के कारण मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में गंभीर मरीजों को सीमित संसाधनों में उपचारित किया जा रहा है, जिसके कारण कई बार उन्हें अन्य जिलों के अस्पतालों में रेफर होना पड़ता है। स्थानीय जनता और मरीजों के परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य की नियमित और प्रभावी निगरानी नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। यदि समय पर कार्य पूरा होता, तो जिले को अब तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल चुकी होती। अब देखना होगा कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस महत्वपूर्ण परियोजना को कितनी जल्दी पूरा कर पाते हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

10 फरवरी 2026 को कीमतों में उछाल और गिरावट दोनों दर्ज

10 फरवरी 2026 को भारत के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में निरंतर हलचल देखी जा रही है। पिछले सोमवार को इन दोनों कीमती धातुओं में वृद्धि देखने को मिली, हालाँकि मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों के कारण कीमतों पर थोड़ा दबाव भी दिखा। घरेलू बाजार में आज 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम के आस-पास कारोबार कर रहा था, वहीं चांदी का मूल्य लगभग ₹3 लाख प्रति किलोग्राम पर स्थिर है। वैश्विक स्तर पर डॉलर सूचकांक, अमेरिकी बांड उपज और आर्थिक अनिश्चिता का सीधा प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले सप्ताह आई गिरावट के बाद सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने और चांदी की मांग में फिर से वृद्धि हुई है। इसीलिए बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

प्रमुख नगरों में आज के मूल्य
देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में 10 फरवरी 2026 को सोना-चांदी के नवीनतम मूल्य इस प्रकार हैं

दिल्ली
24 कैरेट सोना: ₹1,58,060 / 10 ग्राम
चांदी: ₹3,01,900 / किलोग्राम

मुंबई
24 कैरेट सोना: ₹1,58,560 / 10 ग्राम
चांदी: ₹3,00,900 / किलोग्राम

चेन्नई
24 कैरेट सोना: ₹1,59,360 / 10 ग्राम
चांदी: ₹3,04,200 / किलोग्राम

कोलकाता
24 कैरेट सोना: ₹1,58,060 / 10 ग्राम
चांदी: ₹3,01,900 / किलोग्राम

मध्य प्रदेश में सोने के मूल्य (10 फरवरी 2026)
24 कैरेट सोना: लगभग ₹15,341 प्रति ग्राम (≈ ₹1,53,410 प्रति 10 ग्राम)
22 कैरेट सोना: लगभग ₹14,610 प्रति ग्राम (≈ ₹1,46,100 प्रति 10 ग्राम)
मध्य प्रदेश में चांदी के मूल्य (10 फरवरी 2026)
चांदी का मूल्य: लगभग ₹263,550 प्रति किलो (≈ ₹2,63,550)

इन दरों में आभूषण निर्माण प्रसंस्करण शुल्क और जीएसटी शामिल नहीं हैं। वास्तविक खरीदारी के समय स्थानीय ज्वेलर्स से अंतिम मूल्य की पहले पुष्टि करना आवश्यक है।

rithi news today रिठी में कटनी के व्यवसायी ने लिया फर्जी मार्कशीट

कटनी- नकली और बनावटी मार्कशीट के आधार पर सुभांशु नगरिया, जो डन कॉलोनी, मदन मोहन चौबे वार्ड, कटनी का निवासी है, को रीठी में गोपाल फिलिंग के तहत एक पेट्रोल पंप लेना काफी महंगा पड़ा है। शिकायतकर्ता सुनील सेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिथलेश जैन ने अदालत में बताया कि आरोपी ने धोखाधड़ी से एक नकली और बनावटी मार्कशीट बनाई और इसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को देकर पेट्रोल पंप हासिल करने का गंभीर अपराध किया है, जिनके तर्कों से सहमति जताते हुए श्रीमान न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी, कटनी ने सुभांशु नगरिया के खिलाफ भा.द.सं. की धाराएं 467, 468 और 471 लागू करने का आदेश जारी किया है।

यह ज्ञात है कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने वर्ष 2015 में रीठी में पेट्रोल पंपों के आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसमें सुभांशु नगरिया ने अपने आवेदन के साथ तमिलनाडु विश्वविद्यालय से परीक्षा उत्तीर्ण करने की मार्कशीट प्रस्तुत की थी। इन दस्तावेजों के आधार पर उसे एक पेट्रोल पंप आवंटित किया गया, जिसे उसने गोपाल फिलिंग के नाम से संचालित करना प्रारंभ किया।

समाजसेवी और आर.टी.आई. कार्यकर्ता सुनील सेन को इस मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड में शिकायत दाखिल की। जांच के बाद, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने शिकायत को सही मानते हुए मार्कशीट को फर्जी घोषित कर दिया और पेट्रोल पंप का आवंटन रद्द कर दिया। सुनील सेन ने इस संबंध में पुलिस को एक आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए शिकायत की, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत का सहारा लिया और अदालत ने शिकायतकर्ता सुनील सेन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक जबलपुर की गवाही और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद सुभांशु नगरिया के खिलाफ धारा 467, 468, 471 भा.द.सं. के तहत मामला दर्ज किया।

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