कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बड़वारा में किसान संगोष्ठी आयोजित: नरवाई न जलाने की शपथ ली, जलाने पर लगेगा ₹15,000 तक का जुर्माना

बड़वारा (कटनी):

कृषि उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बड़वारा के तत्वावधान में क्षेत्र में नरवाई प्रबंधन संबंधित एक भव्य किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष (नरवाई) जलाने से होने वाले गंभीर नुकसान के प्रति जागरूक करना और इसके वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराना था।

भूमि और पर्यावरण पर दुष्प्रभावों की जानकारी

संगोष्ठी के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र के किसानों को विस्तार से समझाया कि खेत में नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है। भूमि के मित्र जीव (केंचुए आदि) समाप्त हो जाते हैं, जिससे जमीन बंजर होने लगती है। इसके साथ ही, इसके धुएं से निकलने वाली जहरीली गैसें हवा और वातावरण को प्रदूषित करती हैं, जिससे इंसानों और पशुओं में सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं।

सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से रबी की उन्नत बोवाई

कार्यक्रम में धान की कटाई के बाद गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुवाई के लिए सुपर सीडर और हप्पी सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन यंत्रों की मदद से बिना नरवाई जलाए ही खेत में सीधे बीजों की बुवाई की जा सकती है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है और मिट्टी की नमी भी सुरक्षित रहती है।

नरवाई जलाने पर कड़ा अर्थदंड: ₹15,000 तक का जुर्माना

प्रशासन और कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खेतों में नरवाई जलाते हुए पाए जाने वाले किसानों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में कड़ा अर्थदंड लगाया जाएगा:

  • 2 एकड़ तक की भूमि पर: ₹2,500
  • 2 से 5 एकड़ भूमि पर: ₹5,000
  • 5 एकड़ से अधिक भूमि पर: ₹15,000

संगोष्ठी के अंत में सभी उपस्थित किसानों को सामूहिक रूप से नरवाई न जलाने की शपथ भी दिलाई गई।

अधिकारियों के मुख्य संदेश:

  • प्रतिभा गौर (उपसंचालक कृषि):
    उन्होंने कहा कि बड़वारा से किसानों की जागरूकता के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई है। आने वाले समय में यह आयोजन हर पंचायत स्तर पर किया जाएगा, ताकि हर एक किसान तक नरवाई न जलाने और इसका सही प्रबंधन कर भूमि की उर्वरशक्ति बढ़ाने का संदेश पहुंचाया जा सके।
  • रजनी चौहान (परियोजना संचालक, आत्मा):
    उन्होंने नरवाई प्रबंधन में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों (जैसे सुपर सीडर और हैप्पी सीडर) के उपयोग की विधि, उनके दीर्घकालिक लाभों तथा कृषि विभाग की योजनाओं के तहत इन यंत्रों को अनुदान पर प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।
  • आर. के. रावत (वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बड़वारा):
    उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे खेतों में आग लगाने की पुरानी प्रथा को त्यागें और नरवाई के सुरक्षित प्रबंधन के अन्य वैकल्पिक तरीकों को अपनाकर पर्यावरण और अपनी उपजाऊ मिट्टी दोनों की रक्षा करें।

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