कटनी (बड़वारा):बड़वारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम रूपोद में जेके सीमेंट फैक्ट्री के ठीक सामने संचालित हो रहे एक अवैध रेत प्लांट को लेकर बड़ा और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध प्लांट पूरी तरह से शासकीय भूमि पर कब्जा करके चलाया जा रहा था, जहाँ विभागीय मिलीभगत के स्पष्ट प्रमाण के रूप में बिजली विभाग का स्थाई विद्युत कनेक्शन और मीटर भी लगा हुआ था। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे डरावना और भ्रष्ट पहलू तब सामने आया जब खनिज (माइनिंग) विभाग की छापेमारी के बाद जप्त की गई अवैध रेत को चुपचाप जेके सीमेंट फैक्ट्री के अंदर ले जाकर खपाया जाने लगा! जानकारों का मानना है कि इसी फैक्ट्री के अप्रत्यक्ष संरक्षण और भरोसे यह पूरा अवैध कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा था
प्रेस के तीखे सवालों से घबराकर भागे माइनिंग अधिकारी, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं लौटे वापस!जब इस अवैध प्लांट पर खनिज विभाग की टीम पहुँची, तो मौके पर हड़कंप मच गया। इस दौरान जब वहां मौजूद प्रेस और मीडिया के जागरूक साथियों ने जिम्मेदार माइनिंग अधिकारियों से तीखे सवाल करने शुरू किए और इस अवैध संचालन, शासकीय भूमि पर कब्जे व बिजली कनेक्शन पर जवाब माँगा, तो अधिकारियों के होश उड़ गए।अधिकारियों के पास पत्रकारों के किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं था। बचने का कोई रास्ता न पाकर माइनिंग विभाग के अधिकारी मौके से उल्टे पाँव भाग खड़े हुए और जाते-जाते यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “हम अभी थोड़ी देर में वापस आते हैं”। लेकिन बेहद शर्मनाक बात यह है कि घंटों की लंबी देरी और इंतजार के बाद भी वे अधिकारी दोबारा लौटकर वापस नहीं आए! अधिकारियों की इस तरह की संदिग्ध और डरपोक हरकत से साफ प्रतीत होता है कि इस अवैध रेत के काले कारोबार में बड़वारा से लेकर जिले स्तर तक के कई सफेदपोश और जिम्मेदार अधिकारियों की प्रत्यक्ष मिलीभगत है, जिनके संरक्षण में यह सिंडिकेट चल रहा था।

स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था खेल, फिर भी चुप्पी क्यों?इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं:कार्यालय के समीप अवैध साम्राज्य: बड़वारा तहसील और थाना कार्यालय के ठीक समीप इतने बड़े पैमाने पर शासकीय जमीन पर अवैध रेत का प्लांट वर्षों से चल रहा था, लेकिन स्थानीय अमले को इसकी भनक तक न लगना असंभव है।अधिकारियों का रोजाना का आना-जाना: जेके सीमेंट फैक्ट्री में बड़वारा से लेकर जिला मुख्यालय तक के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का आए दिन दौरा और वीआईपी मूवमेंट रहता है। इसी मुख्य रास्ते और फैक्ट्री के ठीक सामने चल रहे इस अवैध प्लांट को रोजाना देखकर भी अनदेखा करना क्या किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा नहीं करता?

छापेमारी के दौरान मिले पुख्ता सबूत: माइनिंग टीम की दबिश में भले ही कोई सामने नहीं आया, लेकिन मौके पर जलती हुई अगरबत्ती यह चीख-चीख कर गवाही दे रही थी कि अधिकारियों के आने की सूचना पहले ही लीक हो चुकी थी और कर्मचारी ऐन वक्त पर भागे हैं।भारी जब्ती: मौके से एक ट्रैक्टर (क्रमांक: MP 21 ZF 7440) और 100 ट्रक से अधिक रेत का भारी-भरकम अवैध स्टॉक बरामद किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि यहां कितने बड़े पैमाने पर अवैध खनन और भंडारण का खेल चल रहा था।जिम्मेदार अधिकारियों और रेत माफियाओं में मचा हड़कंपप्रेस द्वारा पकड़े गए इस भ्रष्टाचार के खेल और माइनिंग अधिकारियों के इस तरह मैदान छोड़कर भागने की घटना ने पूरे कटनी जिले में सनसनी फैला दी है। जनता और जागरूक नागरिकों में इस प्रशासनिक मिलीभगत को लेकर भारी आक्रोश है।
अब देखना यह है कि क्या इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन और शासन के उच्च अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाकर जेके सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन, अवैध प्लांट संचालकों और अपनी पीठ दिखाकर भागने वाले भ्रष्ट माइनिंग अधिकारियों पर सख्त कानूनी डंडा चलाते हैं या फिर इस मामले को भी हमेशा की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।(विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट — प्रशासनिक भ्रष्टाचार, अवैध खनन और स्थानीय मिलीभगत का पर्दाफाश)













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