धान खरीदी केंद्र में बंदरों का कब्जा, भगाने पर काटने की धमकी, टावर के लिए खोदी गई खाइयों से हो रहे हादसे कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील के उमरिया पान वन क्षेत्र में बनते हैं। यहां बंदरों की समस्या से स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। वर्तमान में, प्रशासन के धान खरीद केंद्र में किसानों की फसल की खरीद में भी ये बाधा बन गए हैं। बंदरों का डर इस हद तक है कि जब कोई उन्हें भगाने का प्रयास करता है, तो वे हमला कर देते हैं और बहुत ही आक्रामक हो जाते हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों में डर का माहौल है, जो उन्हें नुकसान पहुंचाते हुए देखते रहते हैं। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि यह बंदरों का आतंक कोई नई बात नहीं है। लगभग एक सदी से ज्यादा समय से ये बंदर उमरिया पान क्षेत्र में उपस्थित हैं। ये न केवल स्थानीय निवासियों को परेशान कर रहे हैं बल्कि व्यापारियों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई बार राहगीरों पर भी बंदरों ने हमला किया है। लेकिन अब तक इस स्थिति का समाधान नहीं हो पाया है।
यह भी याद रखें कि विधानसभा चुनाव में इन बंदरों की समस्या के चलते बड़वारा विधानसभा के एक गांव के लोगों ने मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। क्योंकि लगातार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन ने बंदरों के आतंक को समाप्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए थे।
बीएसएनएल विभाग की लापरवाही कहीं न पड़ जाए मुश्किल
ढीमरखेड़ा पंचायत कार्यालय और ग्राम पंचायत भवन के बीच में बीएसएनएल विभाग द्वारा टावर लगाने के लिए खाइयां खोदी गई हैं। लगभग एक महीने पहले इन गड्ढों को खुदवाने के बाद इन्हें खुला छोड़ दिया गया, जहां सुरक्षा उपायों की व्यवस्था नहीं की गई है। मुख्यालय में स्थित दो आधार केंद्रों पर भी बच्चों का आना-जाना होता है और इन खोदी गई खाइयों के कारण दुर्घटनाएं होने का डर बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह एक गाय गड्ढे में गिर गई थी और दोपहर में एक कुत्ता भी गड्ढे में गिर गया। कुत्ते के मुंह में एक डिब्बा फंसा हुआ था, जिसे ग्रामीणों ने बड़ी मेहनत के बाद बाहर निकाला। ग्राम पंचायत देवरी बिछिया के सरपंच पति राहुल दुबे ने कहा कि बीएसएनएल विभाग ने पंचायत की अनुमति के बिना गड्ढे खोदे हैं और खुले छोड़ दिए हैं, जिससे प्रतिदिन घटनाएं घटित हो रही हैं। जनपद अध्यक्ष पति संतोष दुबे ने मुख्यालय की स्थिति के संबंध में एसडीएम से शिकायत करते हुए सुधार के लिए आश्वासन दिया।
