जिले के माधवनगर थाना क्षेत्र में चोरी करने वालों ने इतनी साहसिकता से एक घटना को अंजाम दिया है कि पूरे पुलिस विभाग की नींद उड़ी हुई है। बीती रात शहर के मध्य माधव नगर चौराहे पर स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एटीएम पहले काटा गया, फिर उसे एक पिकअप में लादकर चोर आसानी से भाग निकले। सवाल यह उठता है कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था सो रही थी या फिर इसे सोने दिया गया था?
यह घटना केवल चोरी नहीं है—यह कटनी पुलिस की कमजोर गश्त, सतर्कता की कमी और सुरक्षा के दावों की असलियत प्रकट करने वाला एक बड़ा उदाहरण है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एटीएम में 10 लाख रुपए से अधिक की राशि थी, जिसे चोरों ने बिन किसी डर के उठा लिया। इससे पहले, चोरों ने एटीएम में लगे कैमरे पर स्प्रे कर दिया और फुटेज को धुंधला कर दिया, इसके बाद उन्होंने मशीन को काटना शुरू किया—लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी!
जबलपुर में दो दिन पहले इसी तरह की वारदात हुई, फिर भी कटनी पुलिस ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई!
घटना को और भी अपमानजनक बनाती है यह सूचना कि जबलपुर के गोसलपुर में इसी तरह की चोरी का असफल प्रयास दो दिन पहले ही देखा गया था। वहाँ की जागरूक जनता ने चोरों के प्रयासों को विफल कर दिया था। लेकिन कटनी पुलिस ने इस चेतावनी को नजरंदाज किया।
गोसलपुर में पकड़ी गई पिकअप चोरी की निकली थी, इसलिए यह संभावना भी है कि कटनी में एटीएम चोरी में इस्तेमाल की गई पिकअप भी चुराई गई हो। कटनी जैसे शहर में मुख्य सड़क से थोड़ी दूरी पर एटीएम मशीन को काटकर ले जाना बताता है कि चोरों का हौसला बहुत बढ़ गया है और पुलिस व्यवस्था पूर्णतः नाकाम है। जब चौराहे पर स्थित एटीएम की ही सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई, तो आम लोग अपने घर, दुकानों और तिजोरियों की रक्षा का भरोसा किस पर करें?
गार्ड था या नहीं? अगर था तो गया कहाँ?
इस घटना ने बैंक के प्रबंधन पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्या एटीएम पर सुरक्षा का गार्ड मौजूद था? यदि नहीं था, तो यह बैंक की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। और यदि वह मौजूद था, तो उस समय वह कहाँ चला गया था? फुटेज के अनुसार, चोरों के जबलपुर की दिशा में भागने का प्रमाण तो है, लेकिन पुलिस की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है। भले ही कई टीमों को मौके पर भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी चोर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। जिले में लूट, हत्या और चाकू की घटनाओं के बाद अब खुली चोरी के बढ़ते मामलों ने यह दिखा दिया कि यह घटना केवल चोरी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक ढांचे की असफलता का प्रतीक है। सुरक्षा, सतर्कता और कानून-व्यवस्था के दावे इस एक घटना ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिए हैं। यह स्पष्ट है कि शहर में चोरों की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि पुलिस की प्रतिक्रिया धीमी है।
