समाचार ने बार-बार जटिलताओं को उजागर किया है, फिर भी जिम्मेदार लोग नहीं जागे हैं। खस्ताहाल सड़क पर हादसों का सिलसिला जारी है, विधायक और जिला पंचायत सदस्यों से तुरंत मरम्मत की मांग की जा रही है। कटनी जिले की ग्राम पंचायत सिलोड़ी के तहत सिलोड़ी–अम्हेटा मार्ग पिछले कई वर्षों से बेहद बुरी स्थिति में है। सड़क में गहरे गड्ढे हैं, जगह-जगह बड़े पत्थर पड़े हैं और किनारों पर झाड़ियाँ उग आई हैं, जिससे यह मार्ग ग्रामीणों के लिए प्रतिदिन का खतरा बन गया है। स्थानीय मीडिया इस विषय को लगातार उठाते रहे हैं, लेकिन न तो पंचायत ने ध्यान दिया और न ही संबंधित विभागों के अधिकारियों ने। इस लापरवाही का खामियाज़ा बुधवार, 26 नवंबर 2025 को एक निर्दोष युवक ने भुगता, जब यह टूटी सड़क حادثे का कारण बनी।
सूत्रों के अनुसार, लादवार से सिलोड़ी बाजार की ओर मोटरसाइकिल पर आ रहे शिवराज बैगा, पिता भगतलाल बैगा, की उम्र 23 वर्ष, जब इस खस्ताहाल मार्ग से गुजरे तो उनकी बाइक सड़क की खराब सतह पर अस्थिर हो गई। अचानक आए हिंसक झटके में उनकी बाइक सड़क के किनारे लगे धारदार तारों से टकरा गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि शिवराज के चेहरे, होंठ, दाढ़ी और सिर पर गहरी चोटें आईं। दुर्घटना के बाद वहां मौजूद ग्रामीणों के बीच भारी गुस्सा फैल गया और लोगों ने इसे पंचायत और प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया।
उद्विग्न ग्रामीणों ने घायल युवक को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिलोड़ी पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने उसके घावों का उपचार किया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने अपनी परेशानी व्यक्त करते हुए कहा कि यह मार्ग उनकी मजबूरी बन चुका है। हर दिन सैकड़ों लोग इसी सड़क से होते हुए बाजार, स्कूल, अस्पताल और अपने काम पर जाते हैं, लेकिन दिन-प्रतिदिन खराब होती सड़क पर यात्रा करना जोखिम भरा हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह सड़क किसी खतरनाक चुनौती से कम नहीं है, जबकि ट्रैक्टर, ऑटो और अन्य भारी वाहनों के ड्राइवर भी अक्सर पलटने, फिसलने और टकराने जैसी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।गाँव के निवासियों का कहना है कि पंचायत की लापरवाही ने सड़क की समस्या को और अधिक गंभीर बना दिया है। ग्राम पंचायत सिलोड़ी में जन शिक्षिका सरपंच पति संतोष बर्मन की सक्रियता पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि वे अपनी मूल शैक्षणिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करते हुए पंचायत के निर्माण कार्यों में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं, जबकि सड़कों की मरम्मत जैसे जरूरी कामों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। ग्रामीणों ने व्यक्त किया कि ऐसा लगता है जैसे सरपंच और अधिकारी किसी गंभीर हादसे या जनहानि की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
स्थानीय मीडिया जैसे समाचार नेशन और अन्य न्यूज़ वेबसाइटें कई महीनों से इस सड़क की विकराल स्थिति को प्रमुखता से प्रस्तुत कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक ग्राम पंचायत और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह और जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय को पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि अभी भी निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो उन्हें सामूहिक रूप से जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।ग्रामीणों की चिंता यह है कि यह सड़क केवल एक रास्ता नहीं है, बल्कि उनके रोजमर्रा के जीवन, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात है। हर दिन जब लोग इस मार्ग से यात्रा करते हैं, तो उनके मन में यह आशंका बनी रहती है कि कहीं अगला मोड़ उनके लिए खतरनाक न हो। गड्ढों में भरा कीचड़, बारिश के समय बहने वाला पानी और टूटे स्थानों पर पड़े पत्थर हर समय एक जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके बावजूद, अब तक किसी भी प्रकार की जांच, संकेत या मरम्मत का कार्य न होना प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
अब तक हुए दुर्घटनाओं के संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय पर ध्यान देता, तो कई लोग चोटिल होने से बचाए जा सकते थे। शिवराज बैगा का मामला सामने आने के बाद से अब ग्रामीणों की सहिष्णुता समाप्त हो चुकी है और वे निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार हैं। उनका स्पष्ट मत है कि यह केवल सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जनहित और सुरक्षा का विषय है, इसलिए इस मामले में और देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
