जबलपुर: संस्कारधानी का नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल क्षेत्र का सबसे प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है, परंतु यहां मरीजों की स्थिति अब पूरी तरह परित्यक्त है. अस्पताल में दलालों का इतना प्रभाव है कि चाहे रक्त का सौदा हो या एंबुलेंस के किराए का, हर चीज खुलेआम होती है. लाखों रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट लेने के बाद भी अस्पताल प्रशासन और निजी ठेकेदार यूडीएस की लापरवाही के कारण सब कुछ बिखर चुका है. जबलपुर का मेडिकल अस्पताल दलाली का गढ़ बन चुका है, वार्ड बॉय से लेकर एंबुलेंस चलाने वाले तक सभी दलाली और गुंडागर्दी में लगे हुए हैं. अस्पताल परिसर में इलाज से लेकर प्रक्रियाओं तक हर जगह दलालों का कब्जा है. गंभीर बीमारियों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा, महंगी रक्त जांच बाहर की दुकानों पर करवाई जा रही है. जबकि दलालों के इशारों पर ही सुविधाएं प्रदान की जाती हैं. इस सब के बीच, सरकार और प्रशासन की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है. अस्पताल की लापरवाही का रहस्य फिर से उजागर हुआ है,
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इसी दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. वीडियो में एक वार्ड बॉय को वेंटिलेटर पर रखे मरीज को ऑक्सीजन मास्क लगाते हुए दिखाया गया है, जब यह कार्य डॉक्टर या प्रशिक्षित नर्स का होता है. एक अन्य दृश्य में परिवार के सदस्य स्वयं अपने बीमार रिश्तेदार को सक्शन पाइप लगा रहे हैं, जबकि यह कार्य चिकित्सा स्टाफ द्वारा किया जाना चाहिए. इस स्थिति से स्पष्ट है कि अस्पताल में न तो डॉक्टरों की निगरानी है और न ही किसी प्रकार की जिम्मेदारी का एहसास है. जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरण की नींद में सो रहे हैं.
इन घटनाओं से यह बात सामने आती है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है. दलाली, लापरवाही और अव्यवस्था के कारण मरीजों की जिंदगी खतरे में है. प्रश्न यह है कि आखिर कब तक यह सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल इस प्रकार “भगवान भरोसे” चलता रहेगा और कब प्रशासन इन दलालों और उत्तरदायी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? फिलहाल, मेडिकल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है.
