badwara news today बड़वारा में खाकी पर पथराव, डायल 112 का कांच चकनाचूर; तीन युवक हिरासत में ​दुकानदार से विवाद सुलझाकर लौट रही थी पुलिस टीम

कटनी। जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र में स्थित ग्राम खहरटा में बीती रात कुछ असामाजिक तत्वों का हौसला काफी बढ़ा हुआ नजर आया। विवाद की सूचना मिलने पर पहुंची डायल 112 की टीम पर कुछ युवकों ने पत्थर फेंके। इस हमले में पुलिस के वाहन का आगे का कांच पूरी तरह से टूट गया। पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए सुबह तक तीन संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

सिगरेट के झगड़े से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, घटना का मूल कारण एक छोटा सा विवाद था। स्थानीय किराना दुकान के मालिक हरिहर गुप्ता ने बताया कि रात लगभग 10 बजे, जब उन्होंने दुकान बंद कर ली थी, तब अंकित बर्मन अपने दोस्तों के साथ वहां आया और सिगरेट की मांग करने लगा। दुकान बंद होने की बात सुनकर जब दुकान के मालिक ने मना किया, तब युवक गुस्सा हो गए और दुकान के शटर पर जोर से मारने लगे। विवाद बढ़ता देख दुकानदार हरिहर गुप्ता ने अपने आप को अंदर बंद कर लिया।

शांति बहाल करने आई पुलिस पर हमला
सिगरेट न मिलने के कारण नाराज अंकित बर्मन ने 112 में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद डायल 112 का वाहन तुरंत खहरटा गांव आया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को समझाया और विवाद को शांत कराया। पुलिस को लगा कि स्थिति अब सामान्य है, लेकिन जैसे ही डायल 112 का वाहन गांव से बाहर जाने लगा, छिपे हुए युवकों ने उस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस अचानक हमले में वाहन का आगे का कांच बुरी तरह टूट गया। हालांकि, पुलिसकर्मी इस हमले से सुरक्षित बच गए।

तीन संदिग्ध पुलिस की हिरासत में
पुलिस पर हमले की सूचना मिलते ही शुक्रवार सुबह पुलिस ने गांव में छापेमारी की और ​लव सिंह, अंशुल सिंह और अंकित बर्मन नामक तीन मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी के के पटेल का कहना है कि पुलिस वाहन पर पत्थर फेंका गया है और इस घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

katni news 15 सूत्रीय मांगों को लेकर लघु वेतन कर्मचारी संघ ने की प्रेस वार्ता मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और उग्र

कटनी। मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ की जिला शाखा ने गुरुवार को सिविल लाइन के रेस्ट हाउस में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। संघ के जिला अध्यक्ष पूर्णेश उइके और मीडिया प्रभारी अनिल पांडेय ने पत्रकारों की एकत्रित भीड़ को संबोधित करते हुए राज्य सरकार के प्रति कर्मचारियों की लंबित मांगों के कारण निराशा व्यक्त की।

संघ के अधिकारियों ने जानकारी दी कि लघु वेतन कर्मचारियों की पंद्रह सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन जारी है। यह आंदोलन सात चरणों की योजना के तहत संचालित हो रहा है, जिसमें से अभी तक पांच चरण पूरे हो चुके हैं, फिर भी सरकार द्वारा इन मांगों पर कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया।

प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि पूरे प्रदेश में विभिन्न विभागों में लगभग 65 हजार से अधिक लघु वेतन कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन को सुनिश्चित करना, पदनाम परिवर्तन, ग्रेड पे 1300 से 1800 में बढ़ाना, स्थायी कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों और अंशकालिक कर्मचारियों का नियमितीकरण करना, पुराने पेंशन योजना को लागू करना, और परिवीक्षा अवधि के पुराने नियमों के अनुसार लागू करना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को शीघ्र लागू करने, कार्यभारित और आकस्मिक निधि कर्मचारियों को नियमित स्थापना में सम्मिलित कर 300 दिनों का अर्जित अवकाश नगद देने, आउटसोर्स प्रणाली का गठन करने, रसोइया बहनों को 10000 रुपए मानदेय देने, तथा आशा-उषा कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं देने की मांग भी उठाई गई।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द ही सही निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। इस दिशा में 21 फरवरी 2026 को भोपाल के अंबेडकर मैदान में एक बड़े धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी मध्यप्रदेश सरकार की होगी।

प्रेस वार्ता के दौरान संघ की ओर से सम्मानित पत्रकारों को फूलों की माला, शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संघ के अधिकारी अजय गौतम, मनोज श्रीवास, अजीमुद्दीन शाह, रामावतार विश्वकर्मा, रत्ना ठाकुर, ललिता, खुशबू, उषा, रीना सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

katni news UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 का विरोध

कटनी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा पेश किए गए UGC (Promotion of Equity) Regulations, 2026 के खिलाफ कटनी जिले के ब्राह्मण समुदाय ने तीव्र विरोध प्रकट किया है। समुदाय के नेताओं और सदस्यों ने कलेक्टर कटनी के माध्यम से मध्यप्रदेश के माननीय राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन प्रस्तुत किया है, जिसमें इन नियमों को संविधान के खिलाफ बताते हुए इन्हें तुरंत रद्द करने का आग्रह किया गया है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि UGC के नए इक्विटी नियम प्रशासनिक दृष्टि से गलत हैं और ये भारतीय संविधान के मौलिक सिद्धांतों तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित मानकों का उल्लंघन करते हैं। समाज का आरोप है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 द्वारा देखे जाने वाले समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इसमें सभी समुदायों को समान सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है।

ब्राह्मण समुदाय ने यह भी बताया कि संविधान के अनुच्छेद 15 और 21 के अंतर्गत भेदभाव न करने और गरिमायुक्त जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। जबकि प्रस्तावित नियमों में उचित जांच, पारदर्शिता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना दंड के प्रावधान रखे गए हैं। इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों की छवि और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए यह कहा गया है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई बिना जांच और उचित प्रक्रिया के कानून का दुरुपयोग मानी जाएगी। समाज ने चिंता व्यक्त की कि ये नियम भविष्य में “कानून को हथियार” के रूप में इस्तेमाल होने का रास्ता खोल सकते हैं।

ब्राह्मण समाज की प्राथमिक मांगें —

UGC (Promotion of Equity) Regulations, 2026 को तुरंत रद्द किया जाए।

यदि ये नियम लागू होते हैं, तो सभी वर्गों को समान सुरक्षा दी जाए और झूठी शिकायतों पर कठोर दंड का प्रावधान हो।

इक्विटी समिति में सभी वर्गों का उपयुक्त प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया जाए।

अल्पसंख्यक और सामान्य समुदाय के अधिकारों का स्पष्ट और मजबूत संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

ब्राह्मण समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर जल्दी और उचित निर्णय नहीं लेती है, तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।

bhopal news इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज युवक ने लगाई फांसी

बिलखिरिया थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह व्यक्ति प्रेम विवाह कर चुका था। हालिया कुछ दिनों से उसकी पत्नी बच्चों के साथ अपने मायके में थी। जानकारी के अनुसार, जब पत्नी मायके से लौटने से इनकार कर दी, तो युवक ने कुछ रिश्तेदारों को इंस्टाग्राम पर संदेश भेजने के बाद आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच आरंभ कर दी है। थाने के अधिकारियों ने बताया कि 23 वर्षीय राजकुमार बड़वई गांव का निवासी था। वह पहले मिसरोद और अवधपुरी थाने में सरकारी वाहन चलाता था। दो साल पूर्व, उसने एक लड़की से प्रेम विवाह किया था। इसके बाद, उसे थाने के वाहन की ड्राइवरी से हटा दिया गया था। इसके बाद, वह झागरिया गांव के एक फार्महाउस में चौकीदारी करने लगा। वह वहां अपनी पत्नी, बच्चों और मां के साथ रह रहा था। प्रेम विवाह के कारण, उसके ससुराल के लोगों से उसके संबंध ठीक नहीं थे। हाल ही में, किसी मुद्दे पर पत्नी से उसकी बहस हुई थी, जिसके बाद पत्नी बच्चे लेकर घर छोड़कर चली गई थी। राजकुमार ने पत्नी की गुमशुदगी के बारे में थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पत्नी की खोज करते हुए, जब वह ससुराल पहुंचा, तो वहां भी पत्नी नहीं मिली। इसके बाद, जब उसकी पत्नी से इंस्टाग्राम पर बात हुई, तो उसने कहा कि तुमने मेरे परिवार के सदस्यों के साथ बुरा व्यवहार किया है, और जब तक तुम माफी नहीं मांगोगे, वह वापस नहीं आएगी। पत्नी की वापसी न होने की वजह से वह तनाव में रहने लगा। दो दिन पहले उसने अपने भाई और भतीजे को इंस्टाग्राम पर संदेश भेजा जिसमें उसने लिखा कि वह आत्महत्या करने जा रहा है। जब तक भतीजा घर पहुंचा, तब तक वह फांसी लगा चुका था। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि राजकुमार को शराब पीने की आदत थी। शराब के नशे में, वह पत्नी के साथ मारपीट करता था, जिसके कारण वह घर छोड़कर चली गई थी। इस समय पुलिस आगे की कार्रवाई में लगी हुई है।

up news UGC के नए नियमों पर Supreme Court के स्टे का Mayawati ने किया स्वागत

बसपा की नेता मायावती ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए समानता नियमों पर लगाए गए प्रतिबंध का समर्थन किया है, उनका कहना है कि इन नियमों के कारण समाज में तनाव उत्पन्न हुआ और इन्हें लागू करने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में नहीं लिया गया था। शीर्ष अदालत ने नियमों की स्पष्टता की कमी को देखते हुए वर्तमान में 2012 के पुराने विनियमों को ही जारी रखने का आदेश दिया है।

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को बताया कि विश्वविद्यालयों में वर्तमान में फैले सामाजिक तनाव को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नवीनतम समानता नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक सही है। मायावती ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में उल्लेख किया कि UGC को नियमों का कार्यान्वयन करने से पहले सभी पक्षों से विचार-विमर्श करना आवश्यक था और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का ध्यान रखना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवाद से संबंधित घटनाओं को रोकने के लिए UG C द्वारा बनाए गए नए नियमों ने सामाजिक तनाव को बढ़ावा दिया है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए, सर्वोच्च न्यायालय का UGC के नए नियमों पर रोक लगाने का निर्णय संतोषजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में इस मुद्दे को लेकर कोई सामाजिक तनाव नहीं होना चाहिए था, यदि UGC ने नए नियमों के कार्यान्वयन से पूर्व सभी पक्षों को भरोसे में लिया होता और उच्च जातियों के प्रतिनिधियों को जांच समिति में उचित स्थान दिया होता।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए) विनियम, 2026 के संदर्भ में सामान्य वर्ग के प्रति कथित “भेदभाव” को लेकर देशभर में उठे जमावड़ों के बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने इन विनियमों पर रोक लगा दी। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वर्तमान में 2012 के UGC विनियम लागू रहेंगे। अदालत ने यह भी दावा किया कि विनियम 3 (सी) (जो जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा प्रस्तुत करता है) में पूरी अस्पष्टता विद्यमान है और इसे गलत तरीके से उपयोग किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा, “भाषा में संशोधन की आवश्यकता है।”

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