बाल विवाह रोकथाम के लिए जिला प्रशासन सजग और मुस्‍तैद बाल विवाह कराने,सहयोग देने वाले व्‍यक्ति

बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन सक्रिय और चौकस
बाल
विवाह की व्यवस्था करने वाले व्यक्तियों, संगठनों और संस्थाओं के लिए कारावास के दो वर्ष और एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। कटनी (16 अप्रैल) – जिले में अक्षय तृतीया और अन्य विवाह मुहूर्तों के मौके पर बाल विवाह को प्रतिबंधित करने के लिए एक प्रभावशाली, समन्वित और बहुस्तरीय व्यापक योजना बनाई गई है। इस उद्देश्य के लिए, विकासखंड स्तर पर संबंधित क्षेत्र के एसडीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यों की बाल विवाह रोकथाम टीम स्थापित की गई है।
कलेक्टर
श्री आशीष तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाल विवाह निगरानी समितियां और कोर ग्रुप बाल विवाह से संबंधित गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें। उन्होंने कहा कि बाल विवाह समाज में एक गंभीर सामाजिक समस्या है। इस प्रथा का स्वरूप समाज में अत्यंत भयानक है। कलेक्टर श्री तिवारी ने बाल विवाह को रोकने के लिए समुदाय से भी सहयोग की अपील की है और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से, संबंधित एसडीएम और महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों को दी जा सकती है।
कलेक्टर
ने स्पष्ट किया कि प्रशासन बाल विवाह के खिलाफ सजग और तैयार है। बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धाराएं 9,10,11 और 13 उन व्यक्तियों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के लिए दो साल तक की सजा या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान करती हैं, जो बाल विवाह का आयोजन या सहयोग करते हैं।
जिला
कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास ने हलवाई, प्रेस करने वालों, कैटरर्स, धार्मिक गुरुओं, समाज के नेताओं, बैंड और घोड़ी वाले, तथा परिवहन सेवा देने वालों से भी अपील की है कि वे बाल विवाह के आयोजन में सहयोग करें, अन्यथा उन्हें भी बाल विवाह के सहयोगी माना जाएगा और वे बाल विवाह रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के शिकार हो सकते हैं।
बाल
विवाह मुक्त भारत पोर्टल
महिला
बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत बाल विवाह मुक्त भारत नामक पोर्टल की स्थापना की गई है। यह पोर्टल नागरिकों को बाल विवाह की घटनाओं की रिपोर्ट करने, शिकायतें दर्ज कराने और देश भर में बाल विवाह निषेध अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक होता है। हेल्पलाइन नंबर 181, 1098, 100 और बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल (https://stopchildmarriage.wcd.gov.in) पर भी सूचना या जानकारी दर्ज कराई जा सकती है।

पुरानी रंजिश में खूनी खेल: युवक पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला

पुरानी दुश्मनी के चलते युवक पर जानलेवा हमला, तीन के खिलाफ मामला दर्ज

कटनी/आशीष
चौधरी /न्यूज़ एम पी एक्सप्रेस : एन.के.जे. थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है जिसमें मारपीट और धारधार हथियार से हमला शामिल है। बड़ी खिरहनी के एक क्षेत्र में पुरानी दुश्मनी के चलते तीन युवकों ने मिलकर एक युवक पर जानलेवा हमला किया।

प्राप्त
किए गए विवरण के अनुसार, आर्यन दुबे, अंकित और विक्की यादव ने मिलकर अभिषेक साहू उर्फ लव को घेर लिया। पहले आरोपियों ने अभिषेक के साथ गाली-गलौज की, फिर धारधार हथियार से उस पर हमला किया। इस हमले में अभिषेक को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

घटना
की जानकारी मिलने के तुरंत बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और मामले की तहकीकात प्रारंभ की। एन.के.जे. थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बी.एन.एस.) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

पुलिस
अब आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।

मध्यप्रदेश में नई तबादला नीति 2026 की तैयारी तेज, एक माह के लिए हट सकती है ट्रांसफर पर रोक

भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार जल्दी ही वर्ष 2026 के लिए एक नई ट्रांसफर नीति लागू करने का इरादा रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने नई नीति का मसौदा बनाने का कार्य आरंभ कर दिया है। यह प्रस्तावित नीति संभवतः अप्रैल के अंत में कैबिनेट में पेश की जाएगी।

एक
महीने के लिए ट्रांसफर विंडो खुलेगी
सरकार इस बार भी
हर साल की तरह ट्रांसफर पर लगी रोक को निश्चित समय के लिए हटाने की योजना बना रही है।
प्रस्ताव
के अनुसार تقريباً एक महीने के लिए ट्रांसफरों की अनुमति दी जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले संभव होंगे। 10 प्रतिशत की सीमा निर्धारित
बेतरतीब
ट्रांसफरों पर रोक लगाने के उद्देश्य से नई नीति में स्पष्ट व्यवस्था की जा रही है कि किसी भी विभाग में कुल ट्रांसफर उसके कैडर के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगे। “प्रभारी मंत्रियों की भूमिका में वृद्धि होगी
सूत्रों
के अनुसार इस बार प्रभारी मंत्रियों को एक महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।
जिलों
में ट्रांसफरों के लिए मंत्रियों की मंजूरी अनिवार्य होगी। जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

कलेक्टर
स्तर से शुरू होगी प्रक्रिया
तृतीय
और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के ट्रांसफर पहले कलेक्टर स्तर पर प्रस्तावित किए जाएंगे, जिसके पश्चात विभागीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

मई
से ट्रांसफरों का दौर शुरू होने की संभावना
पिछले
वर्ष कम ट्रांसफर होने के कारण कर्मचारियों में नई नीति को लेकर उत्साह बढ़ गया है। लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को इस बार राहत मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट
की स्वीकृति के तुरंत बाद मई 2026 की शुरूआत से ट्रांसफरों का सिलसिला आरंभ होने के संकेत मिल रहे हैं।

गांव की बेटी एवं प्रतिभा किरण योजना: वंचित छात्राएं अब फिर कर सकेंगी आवेदन

भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों एवं प्रतिभा किरण योजना का लाभ लेने से चूक गई विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के निर्देश पर उच्च शिक्षा विभाग ने स्कॉलरशिप पोर्टल को पुनः खोलने के आदेश दिए हैं।
शैक्षणिक
वर्ष 2025-26 में विभिन्न कारणों से योजनाओं का लाभ नहीं ले सकने वाली योग्य छात्राएं अब फिर से आवेदन कर सकेंगी। मंत्री परमार ने विभाग को निर्देशित किया था कि कोई भी पात्र छात्रा योजना से वंचित न रहे और तेजी से कार्रवाई की जाए।
पोर्टल
फिर से शुरू
उच्च
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार गांव की बेटी योजना और प्रतिभा किरण योजना के लिए स्कॉलरशिप पोर्टल पुनः सक्रिय किया गया है। अब नई और नवीनीकरण दोनों श्रेणी की छात्राएं ऑनलाइन तरीके से आवेदन दे सकेंगी।
आवेदन
की अंतिम तिथि
छात्राओं
के लिए स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन करने की आखिरी तिथि 15 मई 2026 तय की गई है। विभाग ने योग्य छात्राओं से निवेदन किया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपने आवेदन प्रस्तुत करें।
योजनाओं
का उद्देश्य
इन
योजनाओं का प्रमुख लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाशाली बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि आर्थिक परेशानियों के कारण उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
सरकार
का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक छात्राएं उच्च शिक्षा हासिल कर आत्मनिर्भर बनें और शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी को बढ़ावा मिले।

ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत निवार पुलिस की दबिश, अवैध शराब पिलाते 4 आरोपी गिरफ्तार

कटनी | पुलिस अधीक्षक श्री अभिनय विश्वकर्मा द्वारा जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ जारी ‘ऑपरेशन शिकंजा’ के तहत माधवनगर थाना क्षेत्र की निवार चौकी की पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पुलिस ने ग्राम घुघरा में छापेमारी करते हुए अवैध शराब पिलाने और बेचने वाले चार व्यक्तियों को रंगे हाथों पकड़ा है।
​मुखबिर
से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई
सूत्रों
के अनुसार, निवार चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक अंजनी मिश्रा को खबर मिली थी कि ग्राम घुघरा में कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से शराब का कारोबार चला रहे हैं, जहां लोगों को शराब परोसी जा रही है। सूचना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती नेहा पच्चीसिया और थाना प्रभारी माधवनगर श्री संजय दुबे के निर्देशन में पुलिस टीम ने तुरंत घेराबंदी की।
​इन
आरोपियों पर किया गया मामला दर्ज
कार्रवाई
के दौरान पुलिस ने चार व्यक्तियों को अपनी गिरफ्त में लिया। आरोपियों की पहचान नरेश बर्मन (32 वर्ष), रामकेश बर्मन (59 वर्ष) निवासी ग्राम घुघरा, शकुन शर्मा (52 वर्ष) निवासी जरवाही और रतन आदिवासी (37 वर्ष) निवासी ठरका के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही आरंभ की है।
​इनकी
रही प्रशंसनीय भूमिका
इस
अवैध गतिविधियों के खिलाफ की गई त्वरित कार्रवाई में चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अंजनी मिश्रा, प्रधान आरक्षक गौरव सेन और आरक्षक वकील यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पालतू श्वानों का पंजीयन अनिवार्य, निगम प्रशासन की अपील

150 रुपये वार्षिक शुल्क के साथ सरल प्रक्रिया, बिना पंजीकरण पर लगेगा दंड

कटनी,
/ कटनी नगर पालिका निगम ने शहर के क्षेत्र में पालतू कुत्तों के अच्छे प्रबंधन और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुत्ता पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम एक्ट 1956 और 1961 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत निगम प्रशासन ने सभी कुत्ता पालकों से निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराने का अनुरोध किया है।

निगम
प्रशासन ने पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया है। कुत्ते के मालिक नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कक्ष 66 या अपने वार्ड के दरोगा से आवेदन पत्र ले सकते हैं।

सरल
पंजीकरण प्रक्रिया

आवेदन
के साथ कुत्ते का फोटो, टीकाकरण की जानकारी, निवास और सफाई व्यवस्था का विवरण जमा करने की आवश्यकता होगी। पंजीकरण के लिए 150 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है, जिसे स्वास्थ्य शाखा में जमा कर पंजीकरण किया जा सकता है।

नियम
उल्लंघन पर कार्यवाही

निगम
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नगर के क्षेत्र में बिना पंजीकरण अपने पालतू कुत्ते रखने पर नियमानुसार दंड लगाया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी ने बताया कि इस पहल से पालतू और आवारा कुत्तों का कुशल प्रबंधन, रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पंजीकरण से कुत्तों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे शिकायतों का समाधान में भी आसानी होगी।

जल
गंगा संवर्धन अभियान के तहत सोख्तापिट से भूजल सुधार की पहल

हैंडपंप
से निकलने वाला पानी अब जमीन में किया जाएगा सुरक्षित

कटनी,
/ जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत नगर निगम कटनी द्वारा जल संरक्षण को लेकर एक नई पहल प्रारंभ की गई है। शहर के सार्वजनिक हैंडपंपों के निकट सोख्ता गड्ढे बना कर उपयोग के बाद का पानी जमीन में समाहित किया जा रहा है, जिससे भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

अक्सर
हैंडपंपों से निकलने वाला अतिरिक्त पानी आस-पास फैलकर कीचड़ और गंदगी का कारण बनता है और मच्छरों के पनपने की संभावना को बढ़ाता है। नई व्यवस्था के अंतर्गत पाइपलाइन के जरिए पानी सीधे सोख्ता गड्ढे तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण और सफाई दोनों सुनिश्चित हो रहे हैं।

कार्यपालन
यंत्री सुधीर मिश्रा ने कहा कि सोख्ता गड्ढे लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं और सालभर धीरे-धीरे पानी को जमीन में रिसाकर सूखे जलस्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं। नगर निगम प्रशासन इस मॉडल को शहर के अन्य हैंडपंपों और सार्वजनिक स्थलों पर भी लागू करने की योजना बना रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार यह पहल “लोकल समाधान, बड़ा प्रभाव” की सोच को साकार करती है और आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही है।

कलेक्‍टर श्री तिवारी ने स्‍व-गणना पोर्टल में ऑनलाईन दर्ज की जानकारीजिले में स्‍व-गणना शुरू

कटनी / कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने गुरूवार को ‘स्व-गणना’ वेब पोर्टल पर अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी भरी। कलेक्टर श्री तिवारी ने स्व-गणना साइट पर अपने मोबाइल नंबर और कैप्चा दर्ज कर पंजीकरण पूरा किया। ओटीपी की पुष्टि के बाद, उन्होंने लॉगिन कर परिवार के सभी आवश्यक डेटा को डिजिटल रूप से एंटर किया। जानकारी सबमिट करने के बाद, उन्हें H से शुरू होने वाली 11 अंकों की विशेष स्व-गणना पहचान मिली, जिसे उन्होंने सुरक्षित रखा।
कलेक्टर
ने बताया कि इस पहचान के जरिए जनगणना प्रक्रिया और भी आसान और सुगम बन जाएगी। 1 मई से 30 मई के बीच जब प्रगणक घर-घर जाएंगे, तब नागरिकों को केवल इस पहचान को बताना होगा, जिससे पहले से भरी गई जानकारी की पुष्टि करना सरल होगा और समय की बचत होगी।
जिले
में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-गणना की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद, 1 मई से 30 मई तक मकानों का सूचीकरण पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से किया जाएगा।
कलेक्टर
श्री तिवारी ने जिलेवासियों से अनुरोध करते हुए कहा कि “जनगणना देश के विकास की नींव है। नागरिक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करें और जनगणना टीम का सहयोग करें।”

रेलवे का 6 घंटे का मेगा ब्लॉक: कल कटनी नहीं आएँगी 5 मेमू ट्रेनें, बीच रास्ते में होंगी टर्मिनेट

कटनी | रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कल, 18 अप्रैल को कटनी में एक आवश्यक तकनीकी कार्य किया जाने वाला है। 103 ए और 104 बी केबिन के निकट ‘डायमंड डबल स्लिप क्रॉस ओवर’ के निर्माण के कारण रेलवे ने लगभग 6 घंटे का बड़ा ब्लॉक लिया है। इस ब्लॉक का प्रभाव कटनी की ‘लाइफ लाइन’ मानी जाने वाली मेमू ट्रेनों पर पड़ेगा।
जबलपुर
मंडल के इस फैसले के कारण बिलासपुर, चिरमिरी, बीना, इटारसी और सतना की ओर से आने वाली मेमू ट्रेनें कटनी जंक्शन तक नहीं पहुँच पाएंगी। इन्हें बाहर के स्टेशनों पर रोका जाएगा और वहीं से उनकी वापसी होगी।
कौन
सी ट्रेन कहाँ तक पहुँचने वाली है?
बंदिश
के दौरान ट्रेनों के संचालन में निम्नलिखित परिवर्तन किए गए हैं:
बिलासपुर-कटनी
(68747/48): यह ट्रेन केवल उमरिया तक जाएगी और वहीं से लौट जाएगी।
चिरमिरी-कटनी
(61602/01): यह ट्रेन झलवारा स्टेशन पर समाप्त हो जाएगी।
बीना-कटनी
(11601/02): इसे मुड़वारा स्टेशन तक ही चलाने का निर्णय लिया गया है।
इटारसी-कटनी
(61617/18): यह ट्रेन निवार स्टेशन से वापस लौट जाएगी।
सतना-कटनी
(61606/05): यह मेमू सिर्फ मैहर तक जाएगी और वहीं से सतना के लिए रवाना होगी।
यात्रियों
को बड़ी असुविधा होने वाली है
एक हैरान करने वाली
बात यह है कि इतने बड़े ब्लॉक और ट्रेनों के शॉर्ट टर्मिनेशन के बारे में रेलवे ने अब तक कटनी जंक्शन पर पर्याप्त प्रचार-प्रसार या घोषणाएँ नहीं की हैं। जानकारी की कमी के कारण कल मध्यम दूरी के यात्रियों और नियमित यात्रियों को काफी परेशानी हो सकती है। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे मेमू ट्रेनों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद ही घर से निकलें, ताकि स्टेशन पर पहुँचकर किसी तरह की उलझन का सामना करना पड़े।

बसाड़ी में अवैध पैकारी चालक मुन्नू श्रीवास पर मारपीट के कारण व्यक्ति की मौत का आरोप।

संदिग्ध पस्थिति में मिला युवक का शवजिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत बसाड़ी गांव में गुरुवार को एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजनों ने गांव के ही एक अवैध शराब संचालक पर मारपीट कर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। जिसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। मृतक के पिता प्रेमलाल चौधरी ने आरोप लगाया कि शराब संचालक मुन्नू श्रीवास ने पहले कैलाश को शराब पिलाई और फिर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।परिजनों का दावा है कि युवक के शरीर पर चोट के निशान मौजूद हैं। घटना के बाद बसाड़ी गांव के ग्रामीणों ने क्षेत्र में संचालित अवैध शराब के कारोबार पर विरोध जताया है। स्थानीय लोगों ने पुलिस प्रशासन से अवैध शराब बिक्री पर अंकुश लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने कि मांग की है। बड़वारा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर मामले की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है। थाना प्रभारी केके पटेल ने बताया कि परिजनों के आरोपों को संज्ञान में लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार एवं वास्तविक कारणों की पुष्टि क्व बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कटनी 1734 पुनर्वास पट्टों की लीज दो साल से खत्म

1994 में मिले थे पट्टे, तीन दशक बाद बेघर होने की कगार पर सिंधी समाज! पट्टा नवीनीकरण पर प्रशासन की चुप्पी, करोड़ों का राजस्व भी अटका, 250 परिवारों ने जमा किए ढाई करोड़ के चालान, फिर भी कार्रवाई शून्य, एसडीएम से कलेक्टर तक दौड़ रहे लोग, प्रशासन कटवा रहा चक्कर

कटनी. माधवनगर क्षेत्र में निवास करने वाले सिंधी समुदाय के अनेक परिवार आज प्रशासनिक चूक के चलते अनिश्चितता और असुरक्षा के हालात का सामना कर रहे हैं। 1993-94 में पुनर्वास के तहत प्रदान किए गए आवासीय पट्टों की अवधि समाप्त होने के बाद 2-3 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस स्थिति का परिणाम यह है कि लगभग 1734 परिवारों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
यह
कहना आश्चर्यजनक है कि कुछ महीने पहले प्रशासन ने नवीकरण प्रक्रिया की शुरुआत की थी। लगभग 250 व्यक्तियों ने निर्धारित शुल्क के चालान के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपए सरकार के खजाने में जमा किए, लेकिन इसके बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप्प हो गई। अब तक केवल 3 पट्टों का ही नवीनीकरण हुआ है, जो प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि धारणा अधिकारी के तहत 3200 आवेदन किए गए थे, जिनमें से सिर्फ 400 लोगों को पट्टे प्रदान किए गए हैं। 500 से अधिक मामले कलेक्ट्रेट में फाइलों में बंद पड़े हैं। पट्टों की लीज खत्म होने के कारण अब निवासियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जमीन का कानूनी स्वामित्व खत्म होने के चलते लोग न तो बैंक से ऋण प्राप्त कर पा रहे हैं और न ही अपनी संपत्ति से संबंधित अन्य निर्णय ले पा रहे हैं। धारणा अधिकारी द्वारा दिए गए आदेशों में स्पष्ट प्रावधान होते हुए भी नवीनीकरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। इसमें आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रीमियम निर्धारित करके वारिसानों को हक देने की व्यवस्था है, लेकिन संबंधित विभाग इस दिशा में सक्रिय नहीं हो रहा। इस समय स्थिति यह है कि लोग पिछले 2-3 वर्षों से बिना वैध पट्टे के रह रहे हैं, जिससे उनके भविष्य के लिए अनिश्चितता बढ़ रही है। जबकि अन्य जिलों में पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, कटनी में राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय, एडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में फाइलें धूल खा रही हैं। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण न सिर्फ हजारों परिवारों पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। सिंधी समाज के लोग लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और माधवनगर की यह स्थिति प्रशासनिक निष्क्रियता का स्पष्ट उदाहरण बन गई है, जहां नागरिक अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटक रहे हैं और जिम्मेदार तंत्र मौन बना हुआ है। जनप्रतिनिधि भी केवल चुनाव के समय ही राजनीतिक स्वार्थ साधते हैं। नंदलाल टहलरामानी जो पूज्य पंचायत सिंधी समाज हाउसिंग बोर्ड वैदिक कॉलोनी के अध्यक्ष हैं, बताते हैं कि जब लोगों से करोड़ों रुपए की राशि वसूल की गई है, तो फिर पट्टे जारी करने में इतनी देरी क्यों? आस-पास के जिलों में यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन कटनी में जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक घुमा रहे हैं। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही को ही नहीं उजागर करती, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता कितनी कम हो चुकी है। इस मामले में वीरेंद्र तीर्थानी जो पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष हैं, का कहना है कि 1994 में सिंधी समाज के लोगों को पट्टे दिए गए थे। लीज खत्म होने को दो साल हो गए हैं। लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया नहीं की जा रही। हमारी तरफ से हम लोग लगातार अपनी मांगे रख रहे हैं। हमने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को समस्या के बारे में सूचित किया है। सैकड़ों लोगों ने चालान भी जमा कर दिया है, लेकिन शासन-प्रशासन निष्क्रिय है। स्वामित्व प्राप्त नहीं हो रहा है। धारणा अधिकार के तहत भी केवल 27 पट्टे ही वितरित हुए हैं। हालाँकि, हम इसकी पक्षधर नहीं हैं। क्योंकि यह नियम पुनर्वास के लिए लागू नहीं है। यह झुग्गी-झोपड़ी के लिए है। हमारे पूर्वजों ने जो पाकिस्तान में अपनी जमीन छोड़कर आए थे, उसके एवज में केंद्र सरकार ने हमें यहाँ जमीन दी थी। इसलिए हमें इसका स्वामित्व मिलना चाहिए।

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