किसानों की जमीन पर डाका, ई-उपार्जन में पंजीयन कर्ता ऑपरेटर पंकज पटेल के द्वारा भूमि फर्जीवाड़ा

कटनी | किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए स्थापित की गई ई-उपार्जन व्यवस्था अब भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के संकट में दिखाई दे रही है। कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील के अंतर्गत धान खरीदी केंद्र अरुण प्रताप वेयरहाउस में सामने आए एक प्रकरण ने पूरे तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। यहां एक अन्य व्यक्ति की कृषि भूमि को नकली दस्तावेजों के आधार पर अपनी बताकर न केवल ई-उपार्जन केंद्र में पंजीकरण कराया गया, बल्कि धान को बेचकर सरकारी धन भी प्राप्त किया गया। इस धोखाधड़ी से बनी योजना
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मुरावल, तहसील रीठी के कृषि भूमि खसरा नंबर 353, 355, 357/1, 357/2, जिसकी कुल माप 4.26 हेक्टेयर है, मूलतः पंकज सिंह पिता नागेंद्र सिंह के स्वामित्व में है। आरोप है कि इस भूमि का पंजीकरण दिनांक 10 अक्टूबर 2025 को धोखाधड़ी के माध्यम से पंजीयन करने वाले ऑपरेटर पंकज पटेल पिता इंदल पटेल के नाम किया गया। यह पंजीकरण वास्तविक भूमि स्वामी की जानकारी और अनुमति के बिना किया गया, जो कि प्रथम दृष्टया गंभीर आपराधिक गतिविधि के अंतर्गत आता है।
ई-उपार्जन में गलत केंद्र का चुनाव, पंजीयनकर्ता ऑपरेटर पंकज पटेल की भूमिका संदिग्ध
इस भूमि को धोखाधड़ी के दस्तावेजों के आधार पर ई-उपार्जन प्रणाली में दर्ज किया गया। यह चौंकाने वाला है कि भूमि रीठी तहसील के ग्राम मुरावल में स्थित होने के बावजूद इसे जानबूझकर बहोरीबंद धान खरीदी केंद्र में पंजीकृत किया गया। बिना भौगोलिक सत्यापन और स्थानीय मूल्यांकन के यह प्रक्रिया पूर्ण होना पंजीयनकर्ता ऑपरेटर पंकज पटेल की भूमिका को संदेह के घेरे में रखता है।
धोखाधड़ी का पता चलने पर शपथ पत्र का सहारा
मामले के उजागर होने की संभावनाओं के चलते दिनांक 3 नवंबर 2025 को एक संदिग्ध शपथ पत्र तैयार किया गया। जानकारों के अनुसार, यह शपथ पत्र भूमि पंजीकरण या ई-उपार्जन पंजीकरण के चरण में नहीं, बल्कि धोखाधड़ी के सामने आने के बाद बनाया गया, जिससे पूरे प्रकरण को वैधता प्रदान करने का प्रयास किया गया। यह दस्तावेज खुद में संदिग्ध है और यह बचाव के प्रयास का हिस्सा प्रतीत होता है।
धान की बिक्री कर सरकारी धन का हवन
इन्हीं नकली दस्तावेजों के आधार पर ई-उपार्जन केंद्र में धान बेची गई और शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर भुगतान की राशि प्राप्त कर ली गई। यह न केवल असली किसान के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि सरकार को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला कार्य भी है। उठी जांच और कार्रवाई की मांग प्रकरण के सामने आने के बाद मांग की जा रही है कि भूमि के वास्तविक स्वामित्व की राजस्व स्तर पर पुनः जांच कराई जाए।ई-उपार्जन पंजीयन व धान विक्रय की प्रक्रिया की फॉरेंसिक जांच हो। पंजीयन कर्ता ऑपरेटर पंकज पटेल, समिति प्रबंधक एवं संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। फर्जी तरीके से आहरित राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए। दोषियों पर भारतीय दंड संहिता की कूटरचना, धोखाधड़ी एवं आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में कठोर कार्रवाई की जाए । ‌ वरिष्ठ अधिकारियों की मोनता जिला आपूर्ति अधिकारी एवं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी से खरीदी केंद्र बहोरीबंद में फर्जी पंजीयन के मामले में जानकारी चाहे जाने पर वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों की मोनता क्या साबित करती है।

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